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ट्रम्प ने ईरान से वार्ता के लिए जो दबाव का रास्ता चुनाव है यह उनकी सबसे बड़ी स्ट्रेटेजिक ग़लती हैः शीरीन हंटर

वाशिंगटन जॉर्ज टाउन विश्वविद्यालय की प्रोफेसर ने इस बात पर बल दिया है कि जब तक ईरान और अमेरिका अपने मतभेदों को हल नहीं कर लेते तबतक कोई मध्यस्थता सफल नहीं हो सकेगी। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद शायद जापानी प्रधानमंत्री तेहरान और वाशिंगटन के बीच तनाव कम करवाने में सफ़ल हो जाएं।

विलायत पोर्टलः  समाचार एजेंसी इर्ना की रिपोर्ट के मुताबिक़, वॉशिंग्टन जॉर्ज टाउन विश्वविद्यालय की ईरानी-अमेरिकी प्रोफेसर “शीरीन हंटर” ने कहा है कि ईरान पर अमेरिका द्वारा लगातार बनाए जा रहे दबाव के बावजूद तेहरान के संबंध अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के रवैये में आए बदलाव का मुख्य कारण अमेरिका में उठने वाली वह आवाज़ है जो मध्यपूर्व में एक और युद्ध की शुरुआत का विरोध कर रही है। शीरीन हंटर ने इर्ना से बात करते हुए कहा कि, पश्चिमी एशिया में नए युद्ध का विरोध न केवल कांग्रेस और अमेरिकी जनता कर रही है बल्कि अमेरिका के यूरोपीय और एशियाई सहयोगियों सहित जापान और उत्तरी कोरिया भी इस क्षेत्र में किसी और युद्ध के विरोधी हैं।

वाशिंगटन जॉर्ज टाउन विश्वविद्यालय की ईरानी-अमेरिकी प्रोफेसर ने कहा कि, अगर मध्यपूर्व में युद्ध आरंभ हुआ तो अमेरिका, पश्चिमी एशिया में अपनी सेना की संख्या को कम करने पर मजबूर हो जाएगा और अगर इस क्षेत्र में अमेरिकी सैनिकों की संख्या घटती है तो यह मध्यपूर्व में मौजूद उसके सहयोगियों के लिए चिंता का कारण बन जाएगा। अमेरिकी मुद्दों की टीकाकार ने ट्रम्प की वार्ता करने और दबाव बढ़ाने की नीति की ओर इशारा करते हुए कहा कि ट्रम्प के द्वारा वार्ता का प्रस्ताव और तेहरान के संबंध में उनके रवैये में आए बदलाव का उद्देश्य ईरान पर बढ़ते दबाव में कमी लाना नहीं है बल्कि ट्रम्प शुरुआत से ही इस्लामी गणतंत्र ईरान के साथ नए सिरे से वार्ता चाहते थे।

शीरीन हंटर ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प द्वारा इस्लामी गणतंत्र ईरान के ख़िलाफ़ लगातार बढ़ाए जा रहे दबाव का उद्देश्य तेहरान को वार्ता की मेज़ पर लाना है। उन्होंने कहा कि ट्रम्प, ईरान से वार्ता तो करना चाहते हैं लेकिन उन्होंने जो दबाव का रास्ता चुनाव है यह उनकी तेहरान के संबंध में सबसे बड़ी स्ट्रेटेजिक ग़लती है। शीरीन हंटर ने कहा कि ईरान के साथ वार्ता, केवल एक ही तरीक़े से संभव है और वह यह कि अमेरिका, जेसीपीओए में बिना शर्त वापस जाए और तेहरान पर दबाव की अपनी नीति को समाप्त करे।

पारस टुडे

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