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ईरान ने यूक्रेन विमान दुर्घटना में अपनी गलती क्यों स्वीकारी ? क्या होंगे संभावित परिणाम?

जाँच हुई तो पता चला कि चोर यहूदी नहीं बल्कि एक मुसलमान ने ही चोरी की है कुछ लोगों ने मशविरा दिया कि इस रहस्य को उजागर न किया जाए मुसलमानों का अपमान होगाअल्लाह के रसूल स.अ.ने कहा उस खुदा की क़सम जिस के इख़्तियार में मेरी जान है मेरी रिसालत का यह उद्देश्य ही नहीं है, ऐलान किया जाए कि चोरी मुसलमान ने की है, ऐलान होना था कि यहूदी रसूले इस्लाम स.अ. की खिदमत में हाज़िर हुआ और इस्लाम क़ुबूल कर लिया।

विलायत पोर्टल : प्राप्त जानकारी के अनुसार ईरान ने तेहरान एयरपोर्ट के निकट यूक्रेन एयरलाइन के विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने में मानवीय भूल स्वीकारते हुए संवेदना व्यक्त की है ।
कुछ लोग ईरान सेना की मानवीय भूल से दुर्घटनाग्रस्त हुए इस विमान के बारे में ईरान की स्वीकारोक्ति से नाराज़ हैं सवाल यह होता है कि ईरान से इस भूल को क्यों स्वीकार किया है ?
रसूले इस्लाम स.अ. के ज़माने में के घर में चोरी हो गई, लोगों में मशहूर हो गया कि फलाँ यहूदी चोर है,जाँच हुई तो पता चला कि चोर यहूदी नहीं बल्कि एक मुसलमान ने ही चोरी की है कुछ लोगों ने मशविरा दिया कि इस रहस्य को उजागर न किया जाए मुसलमानों का अपमान होगा
अल्लाह के रसूल स.अ.ने कहा उस खुदा की क़सम जिस के इख़्तियार में मेरी जान है मेरी रिसालत का यह उद्देश्य ही नहीं है, ऐलान किया जाए कि चोरी मुसलमान ने की है, ऐलान होना था कि यहूदी रसूले इस्लाम स.अ. की खिदमत में हाज़िर हुआ और इस्लाम क़ुबूल कर लिया।
यहाँ भी मामला ज़ाहिरी इज़्ज़त और अपमान का नहीं है बल्कि वह संस्कार और शिक्षा है जिन से इस्लामी संस्कृति और सभ्यता रूप लेती है, इस संवेदनशील समय पर जब सारी दुनिया की नज़र ईरान की ओर है ईरान का सच्चाई के साथ मामले को उजागर करना मेरी निगाह में अमेरिका के सैन्य अड्डों पर ईरान के सफल मिसाइल हमलों से भी महत्वपूर्ण और साहसिक कार्य है ।
बिल्कुल उसी तरह जैसे जंगे सिफ़्फ़ीन में इब्ने अब्बास के सवाल के जवाब में इमाम अली अ.स. ने फ़रमाया कि इसी नमाज़ के लिए तो हम जंग लड़ रहे हैं मतलब एक बहुत महत्वपूर्ण और मूल्यवान चीज़ अल्लाह की इबादत है जिस के लिए यह सब संघर्ष किया जा रहा है।
इसी तरह ईरान का यह सब संघर्ष शहीदों के खून के नज़राने, उनकी क़ुर्बानियां इसी उद्देश्य से दी जा रही हैं कि दुनिया को पश्चिमी जगत के विपरीत इस्लाम और इस्लामी संस्कृति, इस्लामी सभ्यता, संस्कार और इस्लामी शिक्षा से आगाह किया जा सके ।
सच्चे नबी और सच्चे इमाम के सच्चे जानशीन आयतुल्लाह ख़ामेनई की ज़बान से निकला हुआ हुक्म न जाने कितनों लोगों की हिदायत का कारण बनेगा ।


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