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अमेरिका, इस्राईल और सऊदी अरब के निशाने पर क्यूं रहता है ईरान?

इतिहास गवाह है कि ईरान ने कभी भी किसी देश पर आक्रमण नहीं किया, आतंकवाद का समर्थन नहीं किया और पीड़ितों और मज़लूमों के समर्थन में बड़ी से बड़ी ताक़तों से मुक़ाबला करने में ज़रा सा भी संकोच से काम नहीं लिया

विलायत पोर्टलः ईरान का नाम मन में आते ही यह विचार स्वतः उठता है कि यह वही देश है जिसका संविधान क़ुरआन व सुन्नत के आधार पर बना है, जहां सभी फैसले इस्लामी शिक्षाओं के आधार पर किए जाते हैं। जहां इस्लामी हुकूमत के प्रति जनता के दिलों में स्वाभाविक प्रेम है, जहां शिर्क और कुफ़्र का दूर दूर तक कोई नामो निशान नहीं हैं, जहां अत्याचार व भ्रष्टाचार को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर प्रयास किए जाते हैं और क़ानून को लागू करने तथा अपराधी को सज़ा देने में भेदभाव और पक्षपात नहीं किया जाता है। सभी धर्मों का आदर किया जाता है और सभी धर्मों को मानने वालों को अधिकार दिये जाते हैं।
इतिहास गवाह है कि ईरान ने कभी भी किसी देश पर आक्रमण नहीं किया, आतंकवाद का समर्थन नहीं किया और पीड़ितों और मज़लूमों के समर्थन में बड़ी से बड़ी ताक़तों से मुक़ाबला करने में ज़रा सा भी संकोच से काम नहीं लिया। वर्तमान समय में अमेरिका, इस्राईल और सऊदी अरब समर्थित दुनिया के सबसे बड़े आतंकवादी संगठन ISIS को नष्ट करने में ईरान ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई जिसे ख़ुद अमेरिकी फौजी कमांडरों ने भी स्वीकार किया है।  इस्लामी देशों में अकेला ईरान ऐसा देश है जिसने इस्राईल के वुजूद को स्वीकार नहीं किया और उसे एक आतंकवाद समर्थित अवैध राष्ट्र मानता है जिसने हमेशा इस्लामी देशों में आतंकवाद को बढ़ावा दिया है और निर्दोष शिया, सुन्नी मुसलमानों के खून से होली खेली है।
ईरान ने दुनिया भर के दबे कुचले लोगों और ख़ास कर मज़लूम व पीड़ित मुसलमानों की हर तरह से मदद की है कभी धर्म और जाति को आधार नहीं बनाया जिस तरह लेबनान के प्रतिरोध शिया संगठन हिज़्बुल्लाह का समर्थन किया वहीं फ़िलिस्तीन के सुन्नी संगठनों का भी भरपूर समर्थन करते हुए हर तरह से उनकी मदद की है। और यही बात अमेरिका, इस्राईल और सऊदी अरब को खटकती है इसीलिए वह अपने बिकाऊ मीडिया द्वारा ईरान के ख़िलाफ प्रोपगंडों में व्यस्त रहते हैं जिसके कारण बहुत सारे मुसलमान गलतफ़हमी का शिकार हो जाते हैं और आँख बंद करके ईरान की आलोचना करना शुरू कर देते हैं और बहुत से उल्मा व बुद्धिजीवी भी सऊदी रियाल के नशे में ईरान के विरूद्ध नफ़रत फैलाने को अपना प्राथमिक लक्ष्य समझते हैं। आज ईरान दुनिया की सभी बड़ी शक्तियों और वैश्विक मीडिया के हमलों का लक्ष्य है। लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि मुसलमान भी उस मीडिया की हाँ में हाँ मिलाते हैं, जो इस्लाम, मुसलमानों और ईरान के खिलाफ़ अफवाहें फैलाने में सक्रिय है।
ऐसे समय में हमें खुद सही और ग़लत की पहचान करनी होगी और देखना होगा कि कौन इस्लाम व मुसलमानों के सबसे बड़े दुश्मन से मुक़ाबला कर रहा है और कौन उनकी कठपुतली बना हुआ है भेदभाव और पक्षपात का चश्मा उतार कर ही सच्चाई को समझा जा सकता है।


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