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जो भी है बहुत अच्छा है....

यह एक हक़ीक़त है कि आप ख़ुद अपने आप में ज़बर्दस्त हैं, लेकिन इसका एहसास तब तक नहीं होता जब तक कि आप अपने आपको दूसरों से कॉमपेयर करना छोड़ न दें।कुछ लोग दूसरों पर बहुत ध्यान देने की वजह से बहुत नर्वस हो जाते हैं और अपने आपको असुरक्षित महसूस करते हैं, अल्लाह ने जो नेमतें दी हैं उन पर फ़ोकस कीजिए, अपनी हाइट, वेट, शख़्सियत, जो कुछ भी आपके पास है उसी में ख़ुश रहिए।इस हक़ीक़त को स्वीकार कीजिए कि अल्लाह ने आपको भी बहुत कुछ दिया है, अपने आप पर फ़ोकस कीजिए, सेहतमंद और तंदुरुस्त ज़िंदगी गुज़ारिए।

विलायत पोर्टल : आज सुबह मैं जॉगिंग कर रहा था, मैंने एक शख़्स को देखा जो मुझसे आधा किलोमीटर दूर था, मैंने अंदाज़ा लगाया कि वह मुझसे थोड़ी कम स्पीड से दौड़ रहा है, मुझे बड़ी ख़ुशी महसूस हुई, मैंने सोचा इसे हराना चाहिए।
लगभग एक किलोमीटर बाद मुझे अपने घर की तरफ़ एक मोड़ पर मुड़ना था, मैंने तेज़ दौड़ना शुरू कर दिया कुछ ही मिनट में मैं धीरे धीरे उसके क़रीब पहुंचता चला गया।
जब मैं उससे सौ फ़ीट दूरी पर रह गया तो मुझे बहुत ख़ुशी हुई, पूरे जोश और जज़्बे के साथ मैंने तेज़ी से दौड़ना शुरू किया और उसे पीछे छोड़ दिया।
मैंने अपने आप से कहा "यस मैंने उसे हरा दिया"
हालांकि उसे मालूम ही नहीं था..... कि रेस चल रही है....
अचानक मुझे एहसास हुआ कि उसे करने की धुन में, मैं अपने घर की मोड़ से काफ़ी दूर आ गया हूं, फिर मुझे एहसास हुआ कि मैंने अपने अंदर के सुकून को बर्बाद कर दिया है, रास्ते की हरियाली और उस पर पड़ने वाली सूरज की नर्म किरणों का भी मज़ा नहीं ले सका, चिड़ियों की मधुर आवाज़ को सुनने से महरूम रह गया।
मेरी सांस फूल रही थी, बदन के कई अंगों में दर्द होने लगा, मेरा फ़ोकस मेरे घर का रास्ता था अब मैं उससे बहुत दूर आ गया था।
तब मुझे यह बात समझ में आई कि हमारी ज़िंदगी में भी हम कभी कभी बिना चाह कर भी कॉमपिटिशन किया करते हैं, अपने Co-workers के साथ, पड़ोसियों के साथ, दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ, हम उन्हें यह बताना चाहते हैं कि हम उनसे बहुत भारी हैं, ज़्यादा कामयाब हैं, या हमारी अहमियत ज़्यादा है, और इसी चक्कर में हम अपना सुकून, अपने आसपास की ख़ूबसूरती और ख़ुशियों से हाथ धो बैठते हैं।
इस बेकार के मुक़ाबले की सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि कभी ख़त्म न होने वाला चक्कर है।
हर जगह कोई न कोई आपसे आगे होगा, किसी को आपसे अच्छी जॉब मिली होगी, किसी को अच्छी बीवी, किसी को अच्छी कार तो किसी को अच्छी शिक्षा, किसी के हैंडसम शौहर होगा तो किसी के पास नेक औलाद, किसी को अच्छा माहौल मिला होगा तो किसी को आलीशान घर..... ।
यह एक हक़ीक़त है कि आप ख़ुद अपने आप में ज़बर्दस्त हैं, लेकिन इसका एहसास तब तक नहीं होता जब तक कि आप अपने आपको दूसरों से कॉमपेयर करना छोड़ न दें।
कुछ लोग दूसरों पर बहुत ध्यान देने की वजह से बहुत नर्वस हो जाते हैं और अपने आपको असुरक्षित महसूस करते हैं, अल्लाह ने जो नेमतें दी हैं उन पर फ़ोकस कीजिए, अपनी हाइट, वेट, शख़्सियत, जो कुछ भी आपके पास है उसी में ख़ुश रहिए।
इस हक़ीक़त को स्वीकार कीजिए कि अल्लाह ने आपको भी बहुत कुछ दिया है, अपने आप पर फ़ोकस कीजिए, सेहतमंद और तंदुरुस्त ज़िंदगी गुज़ारिए।
अपने बच्चों को कभी भी किसी दूसरे के बच्चों से कॉमपेयर मत कीजिए, कभी उनसे यह मत कहिए कि फ़लां का बच्चा देखो कितना अच्छा है..... ।
मुक़ाबला और कॉमपेयर हमेशा ज़िंदगी की ख़ुशियों पर डाका डालते हैं, यह आपकी ज़िंदगी के मज़े को किरकिरा कर देते हैं।
क़िस्मत से कोई मुक़ाबला नहीं, सबकी अपनी अपनी क़िस्मत होती है, इसीलिए केवल अपनी क़िस्मत और अपने मुक़द्दर पर फ़ोकस कीजिए।
दौड़िए ज़रूर लेकिन अपनी अन्दरूनी ख़ुशी और सुकून के लिए...।
ख़ुश रहिए और ख़ुशियां बांटते रहिए।
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