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सोशल मीडिया का इस्तेमाल

उस वक़्त आप देखेंगे कि मुजरिम कैसे आमालनामे को देख कर डर रहे हैं और यह कह रहे हैं: हाय हमारी रुसवाई! यह कैसा आमाल नामा है? इसने किसी छोटी और बड़ी बात को नहीं छोड़ा (बल्कि) सब कुछ दर्ज कर लिया है और जो कुछ उन्होंने किया था वह इन सबको हाज़िर पाएंगे और आपका रब तो किसी पर ज़ुल्म नहीं करता। (सूरए कहफ़, आयत 49)

विलायत पोर्टल : इंसान कोई बात ज़बान से नहीं निकालता मगर यह कि उसके पास देखरेख वाला होता है। (सूरए क़ाफ़, आयत 18)
और जो नेक काम तुम अंजाम दोगे बेशक अल्लाह उससे अच्छी तरह बा ख़बर है। (सूरए बक़रह, आयत 215)
बेशक अल्लाह सीनों के राज़ ख़ूब जानता है। (सूरए आले इमरान, आयत 119)
इसी तरह इरशाद होता है कि: और आमाल नामा (सामने) रख दिया जाएगा, उस वक़्त आप देखेंगे कि मुजरिम कैसे आमालनामे को देख कर डर रहे हैं और यह कह रहे हैं: हाय हमारी रुसवाई! यह कैसा आमाल नामा है? इसने किसी छोटी और बड़ी बात को नहीं छोड़ा (बल्कि) सब कुछ दर्ज कर लिया है और जो कुछ उन्होंने किया था वह इन सबको हाज़िर पाएंगे और आपका रब तो किसी पर ज़ुल्म नहीं करता। (सूरए कहफ़, आयत 49)
यह हमारे हर तरह के आमाल पर अल्लाह की तरफ़ से की जाने वाली देखरेख का हाल था, अब आइए सोशल मीडिया के संबंध में कुछ बातें बयान करनी हैं:
यह सब जानते हैं कि किसी भी टेक्नोलॉजी का सकारात्मक और नकारात्मक दोनों इस्तेमाल किए जा सकते हैं, सोशल मीडिया भी इस क़ायदे से अलग नहीं है, अगर इसका नकारात्मक इस्तेमाल किया जाए तो अनगिनत ऐसे तरीक़े हैं जिससे कई तरह के ना मुनासिब हालात हमें देखने और सुनने को मिलते हैं, लेकिन अगर इसका सकारात्मक इस्तेमाल किया जाए तो यह बेहद फ़ायदेमंद वसीला है जिससे न केवल बड़े बड़े प्लेटफ़ार्म पर कही जाने वाली बड़े बड़े लोगों की बातों की जानकारी हासिल होती है बल्कि उन जगहों पर हम अपनी बात रख भी सकते हैं, किसी भी नैतिक, सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक मामले को एक मुद्दा बना कर उस प्लेटफ़ार्म पर उठा सकते हैं।
हम इन नीचे दिए गए उसूलों पर अमल करते हुए सोशल मीडिया का सकारात्मक इस्तेमाल कर सकते हैं।
** सोशल मीडिया पर हम बिना किसी वजह के किसी के निजी मामलों को न उछालें।
** उलमा और मोमेनीन का अपमान मत करें।
** शिक्षा से जुड़े मामलात और करप्शन जैसे इशूज़ को ज़्यादा अहमियत दें।
** किसी कमज़ोर पर होने वाले ज़ुल्‍म के ख़िलाफ़ ख़ामोश न बैठें।
** निजी फ़ायदे के बजाए सामाजिक और सामूहिक मुद्दों को उठाएं।
** मज़हबी, इलाक़ाई लोगों को जोड़ने से संबंधित कोशिश करें।
** सांप्रदायिक, इलाक़ाई, और लेंग्वेज को लेकर नफ़रत भरी पोस्ट न करें।
** नौजवानों में राजनीतिक, सामाजिक और इस्लामी जागरूकता पैदा करने वाली मालूमात शेयर करें।
** ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भूगोलिक नॉलेज वाली पोस्ट शेयर करें।
** दीनी और अख़लाक़ी मैटर शेयर करें, इल्मी और मज़हबी शख़्सियतों को टारगेट करने से परहेज़ करें।
** आलोचना और कटाक्ष का मक़सद सुधार होना चाहिए, आलोचना केवल नीच दिखाने के मक़सद से मत करें।
**  किसी से निजी या एक ही संगठन से जुड़े होने की बिना पर उसके अच्छे और बुरे कामों का सपोर्ट न करें।
** किसी से निजी या किसी दूसरे बिना पाए जाने वाले मतभेदों की वजह से उसका विरोध न करें।
** हर अच्छे और सामाजिक हितों से जुड़े कामों के तारीफ़ करें, चाहे वह काम आपका विरोध करने वाले लोगों या संगठन ने ही क्यों न किया हो।
** इस्लामी तहज़ीब और कल्चर के ख़िलाफ़ कोई पोस्ट शेयर न करें और न ही उस पर कमेंट और लाइक करें।
** लाइक और कमेंट का स्टैंडर्ड तय करें, हर पोस्ट पर लाइक और कमेंट करने की ज़रूरत नहीं है।
** किसी भी ग़लत पोस्ट को रोकने की हर संभव कोशिश करें।
** हक़ और सच का प्रचार करें।
** झूठ से नफ़रत करने का कल्चर और माहौल को बढ़ावा दें।
** करप्शन और भ्रष्टाचार जैसी बीमारियों से ख़ुद लड़ें और अपनी लड़ाई में सोशल मीडिया को शामिल करें।
** अम्र बिल मारूफ़ और नहि अनिल मुंकर की ज़िम्मेदारी अंजाम दें।
** इस्लामी तालीमात को ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंचाएं (ताकि इस्लाम के बारे में जिनके दिमाग़ में ग़लत विचार अगर किसी वजह से बन गए हैं तो वह दूर हो सकें)
** लोगों में इंसानी और दीनी जागरूकता पैदा करें।
** समाज में फैल चुके ग़लत तरीक़ों और रवैयों में सुधार लाने की कोशिश करें।
** नई नस्ल में पाई जाने वाली क्रिएटिविटी को उभारने की कोशिश करें।
** ग़ीबत (पीठ पीछे बातें करने) से ख़ुद भी बचें और दूसरों को भी बचाएं।

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