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अमेरिकी साम्राज्य का डूबता जहाज़ दुनिया भर में मचाएगा तबाही

नियाल फर्ग्यूसन ने कहा कि हम एक ओर अफगानिस्तान से अमेरिका की वापसी को देख रहे हैं वहीं दूसरी ओर विश्व पटल पर शक्तिशाली चीन का उदय हो रहा है जिसे हम सब देख रहे हैं।

विलायत पोर्टल : अमेरिकी साम्राज्य का धीरे धीरे पतन हो रहा है।  अमेरिकी साम्राज्य का अंत शांतिपूर्ण नहीं होने वाला है। अफगानिस्तान को अराजकता में डालते हुए अमेरिका इस देश से भाग खड़ा हुआ है। धीरे धीरे अमेरिका प्रभत्व और चौधराहट का अंत निकट आ रहा है और विश्व समुदाय इसे भलीभांति महसूस भी कर रहा है। दुनिया भर से अमेरिकी प्रभुत्व की समाप्ति पर टिप्पणी करते हुए नियाल फर्ग्यूसन ने कहा है कि अमेरिकी साम्राज्य का अंत शांतिपूर्ण नहीं होगा। अमेरिका के पतन ने जहां एक ओर अफगानिस्तान को अराजकता के संकट में डाल दिया है वहीं अमेरिकी साम्राज्य का पतन एक सदी पहले ब्रिटिश साम्राज्य के पतन के समान ही प्रतीत हो रहा है।
द इकोनॉमिस्ट की रिपोर्ट के अनुसार विख्यात इतिहासकार नियाल फर्ग्युसन ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अमेरिकी साम्राज्य का पतन दुनिया भर में व्यापक संघर्ष का कारण बन सकता है।
नियाल फर्ग्यूसन ने कहा कि हम एक ओर अफगानिस्तान से अमेरिका की वापसी को देख रहे हैं वहीं दूसरी ओर विश्व पटल पर शक्तिशाली चीन का उदय हो रहा है जिसे हम सब देख रहे हैं। मेरे अमेरिकी पाठक अफगानिस्तान से अपनी सरकार की क्रूर निकासी को देख रहे हैं साथ ही वह अफगानिस्तान को संकट में डालने वाले जो बाइडन के इस निर्णय को सही ठहराने के गंभीर प्रयासों को भी देख रहे हैं।
यह सब वैसा ही प्रतीत होता है जैसा एक सदी पहले चर्चिल के निर्णय के बाद हुआ था। एक सदी पहले चर्चिल ने जो कदम उठाए थे आज बाइडन के कदम और फैसले भी उसी जैसे प्रतीत हो रहे हैं।
याद रहे कि अमेरिका को हर हाल में 31 अगस्त तक अफ़ग़ानिस्तान से निकल जाना है। अपने वादे से मुकरने की अवस्था में तालिबान अमेरिका को गंभीर नतीजे भुगतने की धमकी दे चुका है। 31 अगस्त के बाद भी अफ़ग़ानिस्तान में फंसे रह जाने वाले अमेरिकी नागरिकों को निकालने की योजना पर बात करते हुए व्हाइट हाउस की प्रवक्ता जेन साकी ने कहा है कि हम अमेरिकी नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए तालिबान से बातचीत कर रहे हैं। इससे पहले अमेरिकी विदेश मंत्री ने भी कहा था कि अमेरिका पिछले कुछ सालों से तालिबान के साथ राजनीतिक संबंध बनाए हुए है। उन्होंने अब तक अपने वादों पर अमल किया है। वाशिंगटन अपने हितों के अनुसार काबुल की नई सरकार के बारे में फैसला लेगा।
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