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ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ने पर सहमत हुए ट्रम्प और नेतन्याहू? क्या इस्राईल के उन्माद की आग में जलेगी दुनिया

.............शायद यही कारण था कि तीन पहले ही आईआरजीसी बल के उच्च कमांडर ने कहा था कि खाड़ी के कम से कम 21 अमेरिकी सैन्य अड्डे हमारी मिसाइलों की रेंज में है और हम एक बड़े दुश्मन के विरुद्ध बड़े युद्ध की तैयारी कर रहे हैं।

विलायत पोर्टल :  प्राप्त जानकारी के अरबी भाषा के समाचार पत्र के संपादक तथा अरब जगत के प्रख्यात विश्लेषक अब्दुल बारी अतवान के अनुसार मीडिल ईस्ट विशेष रूप से लेबनान और इराक के आंतरिक संकट और ईरान में हुए हालिया विरोध प्रदर्शन तथा अमेरिकी -इस्राईली सैन्याधिकारियों की बयानबाज़ी और अमेरिका की सनेय गतविधियों को देख कर आसानी से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि ईरान के खिलाफ सैन्य ऑपरेशन की तैयारियां की जा रही हैं और ईरान इन सबसे अंजान भी नहीं है, लेकिन क्या सच में ईरान पर हमला हो सकता है यह अलग चर्चा का विषय है  ।
अतवान के अनुसार इस बात को कई संकेत और साक्ष्यों से बल मिलता है जो निम्नलिखित हैं
1 इस्राईली खुफिया एजेंसी  से संबधिंत वेबसाइट  दुबका के अनुसार  रविवार शाम  राष्ट्रपति ट्रम्प और नेतन्याहू के बीच फोन पर हुई बातचीत, ईरान के खिलाफ तत्काल सैनिक हमले पर केन्द्रित रही है।
2 अमेरिका के बड़े बड़े सैन्याधिकारियों का इस्राईल दौरा और अपन इस्राईली समकक्षों से मुलाक़ात तथा ईरान के खिलाफ किसी भी स्नभवित संभावित युद्ध की तैयारियों और आपसी तालमेल पर चर्चा भी इस आशंका को बल देती है ।
3 इस्राईली सैन्याधिकारियों की वाशिंगटन यात्रा तथा सऊदी अरब , अमीरात और बहरैन के सैन्याधिकारियों से मुलाक़ात और अनाक्रमण संधि पर हस्ताक्षर के साथ ही ईरान के खिलाफ युद्ध की अवस्था में भूमिकाओं का निर्धारण तथा इस्राईल को सैन्य एयरबेस देने पर राज़ी करना ।
पिछले साल जून के बाद से पहली बार अमेरिकी युद्धपोत अब्राहम लिंकन का हुर्मुज़ जलडमरू से गुज़रते हुए ईरान का सामना करने के लिए उद्देश्य से खाड़ी में पहुंचना, हालाँकि अमेरिकी अधिकारी कह रहे है कि यह सब गतिविधियां इस लिए हैं ताकि इस्राईल के खिलाफ ईरान की किसी भी संभावित बदले की कार्रवाई को विफल बनाया जा सके लेकिन सच्चे इसके विपरीत है अमेरिकी और ज़ायोनी अधिकारी लेबनान, इराक और ईरान में हुए हालिया प्रदर्शन को देखते हुए ईरान को कमज़ोर आंक रहे हैं और इसे अपने लिए सुनहरा अवसर मानते हुए अमेरिका और अवैध राष्ट्र इस्राईल का विचार है कि ईरान के लिए यह नाज़ुक दौर है और यही बेहतरीन अवसर है कि ईरान को घुटनों पर लाने का प्रयास शुरू कर देना चाहिए तथा उसके परमाणु प्रतिष्ठानों, सैन्य ठिकानों, आर्थिक बुनियादी ढांचे और तेल और गैस कुओं को हमलों का निशाना बनाना चाहिए ।
 इस्राईल के युद्ध मंत्री नफ्ताली बेनेट  ईरान के खिलाफ हमले के सब से बड़े समर्थक है वह सैन्य ताक़त से ईरान को सीरिया से निकालने की रणनीति पर काम कर रहे है। उनका मानना है कि इस्राईल ने 25 साल पहले हिज़्बुल्लाह की ताक़त के बारे में बेहद गलत अनुमान लगाया था जिसका परिणाम हिज़्बुल्लाह के पास लगभग डेढ़ लाख मिसाइल के भयानक सपने के रूप में सामने आया है।
लेकिन अहम् बात यह है कि ईरान इस्राईल और अमेरिका की किसी मूर्खता पर खामोश नहीं बैठेगा, न ही ईरानी जनता दुश्मन की मिसाइल और युद्धक विमानों का स्वागत करेगी, ठीक है हालिया प्रदर्शन और घटनाओं से इस देश की आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई होगी लेकिन वह सैन्य शक्ति के मामले में दिन प्रतिदिन और मज़बूत हो रहा है और सीरिया, लेबनान , फिलिस्तीन, यमन और अन्य क्षेत्रों में उसके सहयोगी और उसकी उपस्थिति तथा मिसाइल शक्ति बढ़ रही है, शायद यही  कारण था कि तीन पहले ही आईआरजीसी बल के उच्च कमांडर ने कहा था कि खाड़ी के कम से कम 21 अमेरिकी सैन्य अड्डे हमारी मिसाइलों की रेंज में है और हम एक बड़े दुश्मन के विरुद्ध बड़े युद्ध की तैयारी कर रहे हैं।
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