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ज़ख़्मी अली की वसीयत

दुनिया की तरफ़ मत झुकना चाहे वह तुम्हारी तरफ़ खिंची क्यों न चली आ रही हो।और दुनिया की जो चीज़ तुम से रोक ली जाए तो उस पर अफ़सोस ना करनाजो भी कहना हक़ के लिए कहनाजो कुछ करना सवाब के लिए करनायाद रखना हमेशा ज़ालिम के दुश्मन और मज़लूम के मददगार रहना।

विलायत पोर्टल : ज़रबत के बाद इमाम अली अ.स. ने अपने बेटों इमाम हसन अ.स. और इमाम हुसैन अ.स. और उन के चाहने वालों के नाम वसीयत की:
मैं तुम दोनों को ख़ुदा से डरते रहने की वसीयत करता हूं, और दुनिया की तरफ़ मत झुकना चाहे वह तुम्हारी तरफ़ खिंची क्यों न चली आ रही हो।
और दुनिया की जो चीज़ तुम से रोक ली जाए तो उस पर अफ़सोस ना करना
जो भी कहना हक़ के लिए कहना
जो कुछ करना सवाब के लिए करना
याद रखना हमेशा ज़ालिम के दुश्मन और मज़लूम के मददगार रहना।
मैं तुम दोनों को अपनी दूसरी औलादों को अपने कुनबे के लोगों को और जिन लोगों तक मेरी यह बात पहुंचे उन सब को यह वसीयत करता हूं कि अल्लाह से डरते रहना और अपने उमूर को मुनज़्ज़म रखना।
बाहमी तअल्लुक़ात और आपसी संबंध को सुलझाए रखना, क्योंकि मैंने तुम्हारे नाना रसूल अल्लाह स.अ. को फ़रमाते सुना है कि: "आपस के मतभेदों और मन मुटाव को मिटाना और ख़त्म करना आम नमाज़ रोज़े से अफ़ज़ल है।
देखो! यतीमों के बारे में अल्लाह से डरते रहना उन पर फ़ाक़े और भूखे प्यासे रहने की नौबत ना आए और तुम्हारे होते हुए वह बर्बाद ना हों।
देखो! अपने पड़ोसियों के बारे में ख़ुदा से डरते रहना, क्योंकि इन के बारे में तुम्हारे नबी स.अ. ने बराबर हिदायत की है। आप इनके बारे में इस हद तक ताक़ीद फ़रमाते थे कि हमें यह गुमान होने लगा था कि आप उन्हें भी विरासत में हक़ दिलाएंगे।

और क़ुरआन के बारे में अल्लाह से डरते रहना, कहीं ऐसा ना हो के दूसरे इस पर अमल करने में तुम पर सबक़त ले जाएं और तुमसे आगे निकल जाएं।
नमाज़ के बारे में अल्लाह से डरना क्योंकि वह तुम्हारे दीन का सुतून है।
और अपने रब के घर के बारे में ख़ुदा से डरते रहना, जीते जी इसे ख़ाली ना छोड़ना क्योंकि अगर यह ख़ाली छोड़ दिया गया तो फिर (अज़ाब से) मोहलत ना पाओगे।
अपने माल, जान और ज़बान से राहे ख़ुदा में जिहाद के सिलसिले में ख़ुदा से डरते रहना।
तुम पर लाज़िम है कि एक दूसरे से मेल मिलाप रखना और एक दूसरे की मदद करना, ख़बरदार! एक दूसरे से क़तए तआल्लुक़ (रिश्तों को ख़त्म करने और तोड़ने) से परहेज़ करना।

देखो! अम्र बिल मारूफ़ और नही अनिल मुन्कर को मत छोड़ना, वरना बद किरदार तुम पर मुसल्लत हो जाएंगे और फ़िर अगर तुम दुआ मांगोंगे तो वह क़ुबूल नहीं होगी।

ऐ अब्दुल मुत्तलिब के बेटो! ऐसा ना हो कि तुम "अमीरूल मोमिनीन क़त्ल हो गए, अमीरूल मोमिनीन क़त्ल हो गए" के नारे लगाते हुए मुसलमानों के ख़ून से होली खेलने लग जाओ....
देखो! मेरे बदले में सिर्फ़ मेरा क़ातिल ही क़त्ल किया जाए।

और देखो! अगर मैं इस वार से मर जाऊं, तो तुम इसे एक वार के बदले एक ही वार करना और इस शख़्स के हाथ पैर ना काटना, क्योंकि मैंने रसूल अल्लाह स.अ. को फ़रमाते सुना है कि: ख़बरदार किसी के हाथ पैर न काटना, ख़्वाह वह काटने वाला कुत्ता ही क्यों ना हो.


आएं हम अहद करें कि इमाम अली अलैहिस्सलाम की वसीयत पर अमल करने की कोशिश करेंगे... इंशाअल्लाह

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