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सय्यद हसन नसरुल्लाह बचपन से लेकर अब तक, तस्वीरों की ज़बानी

उस समय तक सैयद हसन नसरुल्लाह ना ही किसी आलिम से जुड़े थे और ना ही आपका घराना बहुत मशहूर था लेकिन आप ख़ुद एक ऐसे दीनदार इंसान थे जिसकी दीनदारी केवल नमाज़ रोज़े तक सीमित नहीं थी बल्कि आप इससे बहुत आगे की सोंच और विचार रखते थे।

विलायत पोर्टल : हसन नसरुल्लाह 31 अगस्त 1960 को दक्षिणी लेबनान के एक गांव अल-बुज़ूरिया में पैदा हुए, 

आपके वालिद अब्दुल करीम थे जिनकी सब्ज़ी और फलों की दुकान थी जिसमें आप उनका हाथ बटाने के लिए दुकान जाया करते थे, आपके वालिद की दुकान की दीवार  पर इमाम मूसा सद्र की फोटो हमेशा लगी रहती थी, इमाम मूसा सद्र जिन्होंने ज़ुल्म के विरुध्द प्रतिरोध की चिंगारी को दबे और कुचले हुए लोगों के दिलों में पैदा की थी जिसकी वजह से सैयद हसन नसरुल्लाह के दिल में उनकी मोहब्बत काफ़ी ज़्यादा थी, 

हालांकि उस समय तक सैयद हसन नसरुल्लाह ना ही किसी आलिम से जुड़े थे और ना ही आपका घराना बहुत मशहूर था लेकिन आप ख़ुद एक ऐसे दीनदार इंसान थे जिसकी दीनदारी केवल नमाज़ रोज़े तक सीमित नहीं थी बल्कि आप इससे बहुत आगे की सोंच और विचार रखते थे।


आप अपने इन्हीं उच्च विचारों के चलते 1976 में नजफ़ गए ताकि अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें, 

लेकिन परिस्तिथियां कुछ ऐसी हुईं कि आप 1978 में लेबनान वापस आ गए और फिर वहीं अल-इमामुल मुन्तज़र नामी मदरसे जिसका निर्माण शहीद अब्बास मूसवी ने किया था उसी में पढ़ाई करने लगे और साथ ही अमल नामी संगठन में सक्रिय रहे 

और आख़िरकार आपकी सूझ बूझ को देखते हुए बेक़ाअ नामी इलाक़े में अमल संगठन के सभी राजनीतिक गतिविधियों का इंचार्ज आपको बना दिया गया।




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