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अमेरिकी नौसेना में ईरान से टकराने की क्षमता नहीं : फॉरेन पॉलिसी

ईरान के पास असाधारण तेज़ स्पीड युद्धक नौकाओं के पूरी खेप हैं जो खतरनाक मिसाइलों से लैस हैं जिसका एक उदाहरण सिराज-1 ज़ुल्फ़िक़ार इत्यादि हैं जो नस्र जैसी क्रूज़ मिसाइलों से लैस हैं इन सबसे आश्चर्यजनक ईरान की वह तेज़ नौकाएं हैं जो पानी के अंदर चलती हैं और उन्हें पकड़ना बहुत कठिन है।

विलायत पोर्टल : प्राप्त जानकारी के अनुसार अमेरिका की विख्यात पत्रिका फॉरेन पॉलिसी  ने ईरान की सैन्य शक्ति का लौह मानते हुए कहा कि अमेरिका नौसेना वास्तव में ईरान का सामना करने में असक्षम है ।
फॉरेन पॉलिसी के अनुसार फारस की खाड़ी में विमानवाहक युद्धपोतों द्वारा अपने सैनिकों को फैलाने की अमेरिका की क्षमता अब पहले जैसी नहीं है जो वास्तव में दशकों से अमेरिकी नौसेना की श्रेष्ठ तकनीक के पुराने होने का भी प्रमाण है।
आज के दौर में जब तट के निकट और उथले पानी में युद्ध बहुत खतरनाक हो गया है और  अमेरिका के युद्धपोत दुश्मन के निशाने पर हों तो फिर उन्हें सुरक्षित कैसे समझा जा सकता है?
अमेरिकी रणनीतिकारों के लिए बेहद कठिन समय आ चुका है ईरान के विरुद्ध अमेरिका के पास विकल्प ना होने के बराबर हैं। ट्रम्प के पास ईरान के सिलसिले में बस युद्धपोत और पनडुब्बियों का ही विकल्प है जो काफी दूर से क्रूज़ मिसाइल फायर कर सकते हैं। या फिर क्षेत्रीय देशों में  तैनात बी-2 और बी-52 जैसे युद्धक विमान।
जहाँ तक बात है दूसरे विश्व युद्ध के बाद से ही अमेरिका की शक्ति का प्रतीक समझे जाने वाले युद्धपोतों और उन पर तैनात युद्धक विमानों की तो ईरान उन्हें नाकारा बना चुका है  
ईरान के पास असाधारण तेज़ स्पीड युद्धक नौकाओं के पूरी खेप हैं जो खतरनाक मिसाइलों से लैस हैं जिसका एक उदाहरण सिराज-1 ज़ुल्फ़िक़ार इत्यादि हैं जो नस्र जैसी क्रूज़ मिसाइलों से लैस हैं इन सबसे आश्चर्यजनक ईरान की वह तेज़ नौकाएं हैं जो पानी के अंदर चलती हैं और उन्हें पकड़ना बहुत कठिन है।
कभी दुनिया भर के समंदरों में तैरता अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस लिंकन भी ईरान से अलग ओमान सागर से भी 200 मील दूर खड़ा है जिस पर तैनात अमेरिकी युद्धक विमान सिर्फ 500 मील तक ही उड़ान भर सकते हैं। जिसका मतलब  है कि यह युद्धक विमान अगर यूएसएस लिंकन के डेक से उड़ान भरते भी हैं तो बड़ी मुश्किल से ईरान के पूर्वी तट तक जाकर वापस आ सकते हैं, मतलब फारस की खाड़ी में ईरानी नौसेना के अड्डे तक पहुंचना तो उनके लिए असंभव है जिसे हमेशा संभावित टार्गेट कहा जाता रहा है।


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