×
×
×

ईरान ने पहले ही अभियान में अमेरिका के चौथे बेड़े को किया नाकाम, अमेरिका को दोहरी मार

ईरान ने अमेरिका को पहली चोट उसके इस बेड़े को प्रभावहीन बनाकर लगाई वही दूसरी चोट पैट्रोलियम उत्पादों का निर्यात करते हुए लगाई,एक समय था जब ईरान अपनी ज़रूरत का पैट्रोल भी नहीं बना पाता था और वह देश में पैट्रोल की ज़रूरत पूरा करने के लिए आयात करता था,

विलायत पोर्टल : प्राप्त जानकारी के अनुसार  ईरान के आयल टैंकर अमेरिकी नेता की धमकियों को धता बताते हुए अमेरिका के लिए गंभीर चुनौती बनते हुए वेनेज़ुएला पहुँच चुके हैं।
ईरान का यह क़दम अमेरिका के चौथे बेड़े के साथ साथ उसके उन प्रतिबंधों के लिए भी कड़ी चुनौती है जो उसने पौट्रोलियम कारोबार पर लगाए हुए हैं।
अमेरिका की धमकियों से यूरोपीय देश भी हैरान हो गए थे क्योंकि इस क्षेत्र में अमेरिका का समुद्री बेडा वैश्विक नेविगेशन के लिए एक गारंटी माना जाता था लेकिन इस बेड़े की तैनाती के बावजूद ईरान का वेनेज़ोएला पहुंचना वाशिंगटन के लिए एक चुनौती बन गया है।
 हांलाकि वेनेज़ोएला के लिए ईंधन के साथ जब पांच समुद्री जहाज़ वेनेज़ोएला के लिए रवाना हुए थे तो ट्रम्प ने जिस तरह की धमकियां दी थीं उनसे यूरोपीय देशों को भी हैरत हुई क्योंकि ट्रम्प ने इन जहाज़ों को रोकने की उसी तरह से धमकी दी थी जैसी धमकी कभी पूर्व सोवियत संघ के उन जहाजों को दी गयी थी जो क्यूबा के लिए परमाणु मिसाइल लेकर जाने वाले थे। अमेरिका ने ईरानी जहाज़ों को रोकने की धमकी के साथ ही, अपने युद्धपोत भी कैरेबियन सागर में रवाना कर दिये थे जिसके बाद बहुत से लोगों को धमकी में गंभीरता भी दिखायी देने लगी थी।
अमेरिका का चौथा बेड़ा, वर्षों तक निष्क्रिय था लेकिन जब लैटिन अमेरिका चीन और रूस की गतिविधियां बढ़ने लगी तो  ओबामा ने चौथी फ्लीट को  फिर से सक्रिय करने का आदेश दिया था अमेरिका का मत है कि रूस ने वेनेज़ोएला में खुफिया सैन्य छावनी बना रखी है।
ईरान का वेनेज़ोएला के लिए गैसोलीन भेजने का ऐलान और अमेरिका का ऐसा न करने देने का निर्णय दशकों बाद सक्रिय होने वाले इस चौथे बेड़े की पहली परीक्षा थी लेकिन पेंटागन ने व्हाइट हाउस की धमकियों को व्यवहारिक बनाने की ज़रूरत महसूस नहीं की जिसकी एक वजह यह थी कि उसकी नौसेना का बड़ा भाग रूस पर दबाव बनाने के लिए उत्तरी यूरोप में व्यस्त था तो दूसरी बड़ी वजह यह थी कि पेंटागन को फारस की खाड़ी में ईरान की तरफ से तगड़े जवाब का भी डर था।
ईरान ने अमेरिका को पहली चोट उसके इस बेड़े को प्रभावहीन बनाकर लगाई वही दूसरी चोट पैट्रोलियम उत्पादों का निर्यात करते हुए लगाई,
एक समय था जब ईरान अपनी ज़रूरत का पैट्रोल भी नहीं बना पाता था और वह देश में पैट्रोल की ज़रूरत पूरा करने के लिए आयात करता था, अमेरिका के कड़े प्रतिबंधों के बाद जब इस में भी कठिनाई आने लगी तो ईरान ने इस क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर बनने की ठानी और 2018 आते आते ईरान इतना पेट्रोल बनाने लगा कि उससे न केवल यह कि देश की ज़रूरत पूरी होने लगी बल्कि वह दूसरे देशों को भी पेट्रोल निर्यात करने लगा।
अमेरिका ने ईरान को पेट्रोल बेचने पर प्रतिबंध लगा कर इस देश को कमज़ोर करना चाहा था आज ईरान ने पेट्रोल बना कर उसकी नाक के के नीचे लैटिन अमेरिका में उसके सब से बड़े विरोधी देश वेनेज़ोएला को करोड़ों लीटर पैट्रोल भेज दिया, और शायद यह चोट सबसे ज़्यादा गहरी है।
........

लाइक कीजिए
3
फॉलो अस
नवीनतम