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आले सऊद की इस्लाम दुश्मनी का एक और नमूना, क़ुर्आने मजीद में की ज़ायोनी लॉबी की ख़ुशी के लिए तहरीफ़

आले सऊद ने यहूदी लॉबी को खुश करने के लिए इस आयत " وَلِیَدْخُلُواْ الْمَسْجِدَ کَمَا دَخَلُوهُ أَوَّلَ مَرَّةٍ" मस्जिदे अक़्सा की जगह पर हैकल लिखा है, यहूदी लॉबी के अनुसार हैकल जनाबे सुलेमान अ.स. से जुडी एक वस्तु है और उस के ऊपर मस्जिदे अक़्सा बनाई गई है और इसी आधार पर ज़ायोनी लॉबी मस्जिदे अक़्सा पर मुसलमानो का कोई हक़ न मान कर अपना बताती है।

विलायत पोर्टल : प्राप्त जानकारी के अनुसर आले सऊद ने ज़ायोनी लॉबी और इस्राईल की खुशी के लिए अतीत की अपनी सारी ज़लालतों को पीछे छोड़ते हुए  क़ुर्आने मजीद में भी तहरीफ़ कर डाली ।
रिपोर्ट के अनुसार आले सऊद ने हाल ही में हिब्रू भाषा में क़ुर्आने मजीद छापा है जिस में कई आयतों को यहूदी और इस्राईली दृष्टिकोण के अनुसार बयान किया है ।
किंग फहद काम्प्लेक्स फॉर द प्रिंटिं ऑफ़ द हौली क़ुरान से छापे गए इस क़ुर्आने मजीद में कम से कम 300 स्थानों पर बदलाव किया गया है ।
 जिओनिस्ट मामलों  के विशेषज्ञ अलाउद्दीन अहमद की रिपोर्ट के अनुसर आले सऊद ने संस्कृति और मार्गदर्शन मंत्री  की देखरेख में छपे इस क़ुरेआन को अपनी वेबसाइट से हटा दिया है ।
अलाउद्दीन अहमद के अनुसर आले सऊद ने यहूदी लॉबी को खुश करने के लिए इस आयत " وَلِیَدْخُلُواْ الْمَسْجِدَ کَمَا دَخَلُوهُ أَوَّلَ مَرَّةٍ" मस्जिदे अक़्सा की जगह पर हैकल लिखा है, यहूदी लॉबी के अनुसार हैकल जनाबे सुलेमान अ.स. से जुडी एक वस्तु है और उस के ऊपर मस्जिदे अक़्सा बनाई गई है और इसी आधार पर ज़ायोनी लॉबी मस्जिदे अक़्सा पर मुसलमानो का कोई हक़ न मान कर अपना बताती है।
वहीँ इस क़ुर्आन मजीद के नुस्खे में जहाँ अंतिम में अंबिया ए इलाही के नाम गिनाए गए हैं वहां पैग़ंबरे इस्लाम स.अ. के नाम का उल्लेख ही नहीं किया गया है ।
वहीँ एक अन्य आयत में अल्लाह के नबी जनाबे इस्माईल अ.स. का नाम ही मिटा दिया गया है क्योंकि ज़ायोनी जनाबे इस्माईल अ.स. को नबी ही नहीं मानते और कहते हैं कि जनाबे इब्राहिम अ.स. के के दो बेटे नहीं थे बल्कि सिर्फ एक बेटे जनाबे इस्हाक़ अ.स. थे ।
अलाउद्दीन अहमद के अनुसार आले सऊद ने इस नुस्खे में जगह जगह तर्जुमे में भी जम कर गड़बड़ी की है ताकि ज़ायोनी लॉबी विशेष कर इस्राईल को खुश किया जा सके ।

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