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सत्तर मील की दूरी और सात सवाल

वह कौन सी चीज़ है जो समंदर से ज़्यादा बे नियाज़ है?आपने जवाब में फ़रमाया: क़नाअत करने वाला समंदर से ज़्यादा बे नियाज़ है।

विलायत पोर्टल :  आज के दौर में जब कि सवाल पूछना इतना आसान है कि अपनी जगह पर बैठ कर वेबसाइट और सोशल मीडिया के माध्यम से किसी से भी कहीं से भी सवाल पूछ सकते हैं और इसके लिए ज़्यादा कुछ ख़र्च करने की भी ज़रूरत नहीं पड़ती, लेकिन फिर भी देखा यही जाता है कि बहुत सारे लोग अभी भी दीनी अहकाम हों या अक़ीदे के मसाएल, तारीख़ी जानकारी हो या करंट अफ़ेयरस और भी इन जैसे बहुत से मामलात में सुनी सुनाई जानकारी पर यक़ीन कर लेते हैं, जबकि इस्लाम में तर्क साक्ष्य और तथ्य के बिना किसी चीज़ की कोई जगह नहीं है, हम अल्लाह के वुजूद और उसकी तौहीद को भी बिना दलील और तर्क के नहीं मानते और इसका आदेश हमें ख़ुद इस्लाम ने दिया है।
और यही वजह है कि आज भी इस सदी में बहुत से लोग अंध विश्वास का शिकार हैं और बहुत से लोग अजीब तरह के अक़ीदे बनाए बैठे हैं, और दीनी मामलात और शरई अहकाम की तो बात ही मत कीजिए......
जबकि मस्जिदें आबाद हैं उसमें आलिमे दीन भी मौजूद रहते हैं लेकिन लोग उनसे भी पूछने को तैयार नहीं होते, ग़लत मालूमात पर अमल कर लेते हैं लेकिन जानकारी हासिल करने की कोशिश नहीं करते, और पूछने पर जवाब यह होता है कि शर्म आती है या इस तरह की कोई और बात.....
हम आपके सामने उस दौर की मिसाल पेश कर रहे हैं जब न तेज़ सवारी के साधन थे न टेक्नोलॉजी और न ही आज के जैसे सोर्सेज़, लेकिन उसके बावजूद लोग सैकड़ों किलोमीटर का सफ़र तय कर के मसाएल का इल्म हासिल करने आते थे, जैसाकि इमाम अली अ.स. के दौर में एक शख़्स आपकी ख़िदमत में हाज़िर हुआ और कहने लगा मौला मैं सत्तर मील दूर से आया हूं ताकि आपसे सात सवालों के जवाब मालूम कर सकूं।
इमाम अली अ.स. ने फ़रमाया: बिल्कुल पूछो।
उसने पहला सवाल पूछा: वह कौन सी चीज़ है जो आसमान से बड़ी है?
आपने जवाब में फ़रमाया: तोहमत (वह बुराई जो किसी में नहीं हो उसे उसकी बुराई बना कर किसी दूसरे से बताना) आसमान से बड़ी चीज़ है।
उसने दूसरा सवाल पूछा: वह कौन सी चीज़ है जो ज़मीन से ज़्यादा फैली हुई है?
आपने जवाब में फ़रमाया: हक़, ज़मीन से ज़्यादा फैला हुआ है।
उसने तीसरा सवाल पूछा: वह कौन सी चीज़ है जो यतीम बच्चे से भी ज़्यादा कमज़ोर है?
आपने जवाब में फ़रमाया: एक दूसरे की बुराई करने वाला यतीम बच्चे से ज़्यादा कमज़ोर है।
उसने चौथा सवाल पूछा: वह कौन सी चीज़ है जो आग से ज़्यादा गर्म है?
आपने जवाब में फ़रमाया: लालच आग से भी ज़्यादा गर्म है।
उसने पांचवां सवाल पूछा: वह कौन सी चीज़ है जो ज़महरीर से भी ज़्यादा ठंडी है?
आपने जवाब में फ़रमाया: कंजूस के पास अपनी ज़रूरत लेकर जाना ज़महरीर से भी ज़्यादा ठंडा है।
उसने छठा सवाल पूछा: वह कौन सी चीज़ है जो समंदर से ज़्यादा बे नियाज़ है?
आपने जवाब में फ़रमाया: क़नाअत करने वाला समंदर से ज़्यादा बे नियाज़ है।
उसने सातवां सवाल पूछा: वह कौन सी चीज़ है जो पत्थर से ज़्यादा कठोर है?
आपने जवाब में फ़रमाया: काफ़िर का दिल पत्थर से ज़्यादा कठोर है। (जामेउल अख़बार, फ़ज़ाएलो अमीरिल मोमेनीन)

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