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सऊदी अरब ने यमन युद्ध में सब कुछ खोया, पाया कुछ नहीं, अर्थव्यवस्था डूबी

26 मार्च 2015 में यमन के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने के बाद अब तक 500 बड़ी सऊदी कंपनियों का दीवालिया निकल चुका है, बड़े बड़े कारोबरी और उद्योगपति सऊदी अरब छोड़ कर जा चुके हैं वहीँ आले सऊद पर विदेशी क़र्ज़ 91 अरब डॉलर से बढ़कर 149 अरब डॉलर हो गया है ।

विलायत पोर्टल : प्राप्त जानकारी के अनुसार यमन युद्ध में आले सऊद की खस्ता हालत पर प्रकाश डालते हुए
लेबनान के वरिष्ठ लेखक एवं विश्लेषक अली हिजाज़ी का कहना है कि सऊदी अरब सैन्य शक्ति के मामले में ईरान के मुक़ाबले कहीं नहीं ठहरता उसे यमन के जनआंदोलन और हौसी जवानों से लड़ते हुए पांच साल होने वाले हैं, लेकिन इस युद्ध में खोने के अलावा उसने कुछ पाया नहीं , वह मध्यपूर्व के सबसे ग़रीब देश को नहीं हरा सका जिसके पास एक व्यवस्थित सेना तक नहीं है।
अल-जज़ीरा टीवी चैनल से बात करते हुए हिजाज़ी ने कहा, सऊदी अरब को यमन युद्ध में अब तक कम से कम 800 अरब डॉलर का नुक़सान हो चुका है।
उन्होंने कहा, 2014 में सऊदी अरब के पास विदेशी मुद्रा भंडार के रूप में 787 अरब डॉलर थे, जो 2017 में घटकर सिर्फ़ 487 अरब डॉलर रह गए। इसी तरह से 2019 की पहली छमाही में व्यापार सरप्लस भी 4।9 प्रतिशत घटकर 4 अरब डॉलर रह गया।
हिजाज़ी का कहना था 26 मार्च 2015 में यमन के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने के बाद अब तक 500 बड़ी सऊदी कंपनियों का दीवालिया निकल चुका है, बड़े बड़े कारोबरी और उद्योगपति सऊदी अरब छोड़ कर जा चुके हैं वहीँ आले सऊद पर विदेशी क़र्ज़ 91 अरब डॉलर से बढ़कर 149 अरब डॉलर हो गया है ।
जहां सऊदी अरब ने यमन के आधारभूत ढांचे को नष्ट करने और 1 लाख 25 हज़ार बच्चों समेत लाखों लोगों का जनसंहार करने और उन्हें भूखा मारने पर अरबों डॉलर ख़र्च किए तो वहीं यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन ने केवल कुछ हज़ार डॉलर ही ख़र्च किए हैं।
सऊदी अरब और उसके सहयोगियों ने यमन की घेराबंदी कर रखी है, जिसके कारण इस देश में लाखों लोग भुखमरी का शिकार हुए और एक ऐसी त्रासदी ने जन्म लिया जिसे संयुक्त राष्ट्र संघ ने इतिहास की सबसे भयानक त्रासदी क़रार दिया है।
सऊदी अरब ने अमेरिका और पश्चिमी देशों से ख़रीदे गए अरबों डॉलर के बम यमनी जनता पर बरसाए हैं, जिससे इन देशों को तो अरबो डॉलर मिले लेकिन सऊदी अरब का ख़ज़ाना ख़ाली हो गया।
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