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ईरान -रूस और चीन हिन्द महासहगर में करेंगे युद्धाभ्यास, अमेरिका की दादागिरी का अंत शुरू

रिपोर्ट के अनुसार इस अभ्यास से अमेरिकी दादागिरी और बहरैन में तैनात उसके पांचवे बेड़े का भ्रम भी टूट जाएगा रूस चीन और ईरान का यह अभ्यास क्षेत्र में विदेशी शक्तियों से निपटने और उनके हस्तक्षेप पर लगाम लगाने के उद्देश्यों के साथ हो रहा है ।

विलायत पोर्टल :  प्राप्त जानकारी के अनुसार इस साल 27 दिसम्बर से हिन्द महासागर में होने वाले ईरान, रूस और चीन के संयुक्त युद्धाभ्यास पर विशेष रिपोर्ट प्रकाशित करते हुए रायुल यौम ने कहा कि यह अभ्यास हिन्द महासागर , हुर्मुज़ जलडमरू और फारस की खाड़ी के इतिहास में अभूतपूर्व होगा तथा इस क्षेत्र के भविष्य को रेखांकित करने में भी महत्वपूर्ण होगा।
रिपोर्ट के अनुसार इस अभ्यास से अमेरिकी दादागिरी और बहरैन में तैनात उसके पांचवे बेड़े का भ्रम भी टूट जाएगा रूस चीन और ईरान का यह अभ्यास क्षेत्र में विदेशी शक्तियों से निपटने और उनके हस्तक्षेप पर लगाम लगाने के उद्देश्यों के साथ हो रहा है ।
यह अभ्यास इस लिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि अमेरिका कई सालों के प्रयास के बाद भी ईरान के खिलाफ समुद्री गठबंधन के गठन में विफल रहा है और सऊदी अरब, बहरैन , अवैध राष्ट्र इस्राईल और ऑस्ट्रेलिया के अलावा किसी और ने भी ईरान के खिलाफ जाने में रुचि नहीं दिखाई है, यही नहीं अमेरिका को बहरैन में तैनात अपने पांचवे बेड़े की सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं होने लगी हैं जजों अब पहले जैसे आज़ादी के साथ अपनी आवाजाही नहीं बाक़ी नहीं रख पायेगा ।

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