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माहे रमज़ान में हर रोज़ पढ़ी जाने वाली दुआ-1 (वीडियो - हिन्दी सब्टाइटिल के साथ)

یا عَلِىُّ، یا عَظیمُ، یا غَفُورُ، یا رَحیمُ، اَنْتَ الرَّبُّ الْعَظیمُ، الَّذى لَیْسَ کَمِثْلِهِ شَىءٌ ،وَهُوَ السَّمیعُ الْبَصیرُ، وَهذا شَهْرٌ عَظَّمْتَه، ُوَکَرَّمْتَهُ، وَشَرَّفْتَهُ، وَفَضَّلْتَهُ  عَلَى الشُّهُور،ِ وَهُوَ الشَّهْرُ الَّذى فَرَضْتَ صِیامَهُ عَلَىَّ،وَهُوَ شَهْرُرَمَضانَ، الَّذى اَنْزَلْتَ فیهِ الْقُرْآن، َهُدىً لِلنّاسِ، وَبَیِّنات، مِنَ الْهُدىوَالْفُرْقانِ، وَجَعَلْتَ فیهِ لَیْلَةَ الْقَدْر،ِوَجَعَلْتَها خَیْراً مِنْ اَلْفِ شَهْر،ٍفَیاذَالْمَنِّ، وَلا یُمَنُّ عَلَیْکَ، مُنَّ عَلَىَّ بِفَکاکِ رَقَبَتى مِنَ النّارِ، فیمَنْ تَمُنُّ عَلَیْهِ ، وَاَدْخِلْنِى الْجَنَّةَ، بِرَحْمَتِکَ یا اَرْحَمَ الرّاحِمینَ

ऐ बुलंदी और अज़मत वाले, ऐ माफ़ करने और रहम करने वाले, तू ही अज़मत वाला परवरदिगार है कि जिसके जैसा कोई नही है और वह सुनने वाला और देखने वाला है और यह वह महीना है जिसे तूने दूसरे सारे महीनों पर अज़मत, सम्मान, फ़ज़ीलत दी, यह वह महीना है जिसके रोज़े तूने वाजिब किए हैं और वह मुबारक महीना रमज़ान है जिसमें तूने कुर्आन नाज़िल किया जो लोगों के लिए हिदायत का स्रोत है इसमें हिदायत की दलीलें और हक़ और बातिल को जुदा करने का हुनर है, तूने इस महीने में शबे क़द्र रखी और उसे हज़ार महीनों से बेहतर क़रार दिया, ऐ एहसान करने वाले तुझ पर एहसान नही किया जा सकता, तू मेरी गर्दन को आग से छुड़ा कर अपनी रहमत के सदक़े में मुझ पर एहसान फ़रमा, जिन पर तूने एहसान किया है उन लोगों के साथ मुझे जन्नत में दाख़िल फ़रमा। ऐ सबसे ज़्यादा रहम करने वाले।

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