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हसन नसरुल्लाह को हक़ है कि इस्राईल को मकड़ी के जाले की तरह कमज़ोर कहें : ज़ायोनी लेखक

यह वही समय था जब फिलिस्तीनी नेता यासिर अराफात ने कहा था कि अगर हसन नसरुल्लाह एक छोटे से संगठन का नेतृत्व करते हुए ज़ायोनी सेना को भागने पर मजबूर कर सकते हैं तो यह काम हम क्यों न करें ?

विलायत पोर्टल : प्राप्त जानकारी के अनुसार ज़ायोनी समाचार पत्र मआरीव ने हिज़्बुल्लाह लेबनन के मुक़ाबले ज़ायोनी सेना की नाकामी और कमज़ोरी पर आधरित एक लेख प्रकाशित करते हुए कहा कि हसन नसरुल्लाह को हक़ है कि वह अवैध राष्ट्र इस्राईल को मकड़ी के जाले से अधिक कमज़ोर कह सकें.
ज़ायोनी लेखक हायम मिसगाफ़ द्वारा लिखित इस लेख में  हिज़्बुल्लाह और हमास के मुक़ाबले पर  ज़ायोनी सेना की नाकामी का उल्लेख करते हुए कहा गया कि ज़ायोनी सेना 20 साल पहले दक्षिणी लेबनान से अपमानित होकर भाग आई और अपने बहुत से गोपनीय एवं आधुनिक हथियार वहीं छोड़ आई जिसका नतीजा हम आज तक भुगत रहे हैं.
यह वही समय था जब फिलिस्तीनी नेता यासिर अराफात ने कहा था कि अगर हसन नसरुल्लाह एक छोटे से संगठन का नेतृत्व करते हुए ज़ायोनी सेना को भागने पर मजबूर कर सकते हैं तो यह काम हम क्यों न करें ?
इसी के बाद दूसरा इंतेफ़ाज़ा शुरू हुआ और दसियों इस्राईली मारे गए, हसन नसरुल्लाह ने हमे मकड़ी के जले की भांति बताया था और वह अपनी बात में सच्चे भी हैं.

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