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क़ुर्आन में बाल जैसे मैसेज इस्राईली प्रयोगशाला का प्रॉडक्ट, इस्लाम से नहीं कोई संबंध

ज़ायोनी ख़ुफ़िया एजेंसी मोसाद ने ‘‘साइक्लोजिकल ऑपरेशंस‘‘ के नाम से जो प्रोजेक्ट हमें सौंपे थे उनमें से एक प्रोजेक्ट लोगों के धार्मिक विश्वास को कमज़ोर करने के लिए था। और यह वह वक़्त था जब ईरान में इस्लामी क्रांति का बिगुल फूंका जा चुका था

विलायत पोर्टल : हाल ही में सोशल मीडिया में एक क्लिप बहुत ज़ोरो शोर से वायरल हो रही है जिस में एक मौलवी साहेब ईरान के किसी आलिमे दीन के ख्वाब का हवाला दे कर अपनी बात पेश करने के बाद दावा कर रहे हैं कि इस घटना के बाद से ईरान में कोरोना वायरस का कोई मामला सामने नहीं आया है जबकि सच्चाई यह है कि ईरान में न इस प्रकार के किसी ख्वाब का ज़िक्र है न इस प्रकार के अंधविश्वास की कोई भनक।
रही बात कोरोना वायरस की तो कल भी ईरान में 880 से अधिक कोरोना वायरस के मामले सामने आए हैं।
वीडियो में नज़र आ रहे मौलाना साहेब ने न ईरानी आलिम का नाम बताया न कोई और सुबूत, बस एक सोशा छोड़ा और लोग बिना सोच विचार किए उसी डगर पर चल पड़े जिधर मौलाना हांकना चाहते थे जबकि इस्लामी इतिहास से अलग भी धर्म के नाम पर झूटी शोहरत और पाखंड फ़ैलाने वालो की कमी है न अंध्विश्वास की आड़ में लोगों की आस्था से खेलने वालों और धर्म तथा आस्था पर चोट करने वाले।
 अतीत में ऐसे कई उदाहरण सामने रहे हैं जब लोग धर्म की आड़ में आए लोगों से धोखा खाते रहे हैं चाहे वो ब्रिटिश आयतुल्लाह जैकाक का विख्यात मामला रहा हो या ईरान राजशाही के समय इस्राईली ख़ुफ़िया एजेंसी मोसाद और सावाक की मिली भगत से धर्म पर चोट करने की साम्राज्यवादी साज़िश।

आप ईरानी शाह के सुरक्षा सलाहकार और ख़ुफ़िया एजेंसी "सावाक" के प्रमुख ‘‘हसन सना‘‘ का वीडियो के रूप में यह क़बूलनामा देखें तो बहुत से बातें स्पष्ट हो जाएँगी, जिसका हिंदी अनुवाद पेश है।

ज़ायोनी ख़ुफ़िया एजेंसी मोसाद ने  ‘‘साइक्लोजिकल ऑपरेशंस‘‘ के नाम से जो प्रोजेक्ट हमें सौंपे थे उनमें से एक प्रोजेक्ट लोगों के धार्मिक विश्वास को कमज़ोर करने के लिए था। और यह वह वक़्त था जब ईरान में इस्लामी क्रांति का बिगुल फूंका जा चुका था

सावाक ने इस प्रोजेक्ट को ‘‘माहान प्रोजेक्ट‘‘ के नाम से लोगों के धार्मिक विश्वास को कमज़ोर करने के लिए लांच किया।
इस्राईली ख़ुफ़िया एजेंसी मोसाद से हमारे निकट संबंध थे ।

माहान ऐसा प्रोजेक्ट था कि जो धर्म से मुंह मोड़ने और धार्मिक विश्वास और धर्म की जड़ों को कमज़ोर करने के लिए बनाया गया था ताकि लोग अंधविश्वास को मान्यता देने लगें और अंधविश्वास को क़बूल करने लगें, इस तरह अंधविश्वास को समाज के अलग अलग हिस्सों में फ़ैलाया जा सके और लोगों के धार्मिक विश्वास को इसी तरह कमज़ोर करके अस्वीकार्य बनाया जा सकता है ।

यह प्रोजेक्ट प्रधानमंत्री अंसारी के ज़माने में अंजाम पाया, सरकार ने 2 करोड़ का बजट पास करके सावाक को दिया, इस 2 करोड़ तूमान का बड़ा हिस्सा कठमुल्लों को दिया गया ताकि इस प्रोजेक्ट का प्रचार प्रसार करें, यहाँ तक कि इस तरह के केस सामने आने लगे जिनमें से एक ख़्वाब में बशारतें भी थीं।

1- एक कठमुल्ला ने इमाम रज़ा अ.स. को ख़्वाब में देखा कि इमाम रज़ा अ स उसे ताकीद फ़रमा रहे हैं कि शाह की सुरक्षा करो और उसकी बहुत ज़्यादा मदद करो उसे ईरान में बाक़ी रहना चाहिए।

2- या यह किः क़ुर्आन में बाल होना! सूरा ए बक़रह में बाल होना! कि जो भी दोपहर के बाद 3 बजे क़ुर्आन को खोलेगा ख़ासकर रोज़े की हालत में! तो सूरा ए बक़रह में बाल मिलेगा।

3- या चाँद में इमाम  अ.स. का फ़ोटो दिखाई देना।

इस तरह के यह प्रोजेक्ट तेहरान बल्कि पूरे ईरान में लांच किए गए।

 

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