×
×
×

शहीद सरदार क़ासिम सुलैमानी का इलाही सियासी वसीयत नामा - 1

मेरी झोली तेरे फ़ज़्लो करम की उम्मीद से भरी हुई है। मैं अपने साथ दो बंद आंखें लाया हूं , तमाम तरह की नापाकियों के बावजूद एक अज़ीम सरमाया लेकर आया हूं और वह सरमाया है ग़में हुसैन के आंसू! अहलेबैत की मुसीबत पर अश्कों की दौलत!
मजलूम की रक्षा और हिमायत में बहे आंसू!

विलायत पोर्टल :  मैं उसूले दीन की गवाही देता हूं
اشهد أن  لا اله الا الله و اشهد أنّ محمداً  رسول الله و اشهد أنّ امیرالمؤمنین علی‌بن ابی‌طالب و اولاده المعصومین اثنی‌عشر ائمّتنا و معصومیننا حجج الله.
मैं गवाही देता हूं कि अल्लाह के अलावा कोई माबूद नहीं है!
मैं गवाही देता हूं कि मोहम्मद अल्लाह के रसूल हैं।
मैं गवाही देता हूं कि अमीरुल मोमिनीन अली इब्ने अबी तालिब और उनकी मासूम औलाद 12 इमाम और खुदा की हुज्जत हैं।
मैं गवाही देता हूं कि कयामत हक़ है।
क़ुरान हक़ है जन्नत और जहन्नम हक़ है, क़ब्र और आख़िरत के सवाल और जवाब हक़ हैं।
कयामत का दिन, अद्ल,  नबूवत और इमामत हक़ है।
खुदाया तेरी नेमतों पर मैं तेरा शुक्रगुजार हूं।
परवरदिगार तेरा शुक्र है कि तूने मुझे एक से दूसरे सुल्ब,  एक सदी से दूसरी सदी और एक रहम से दूसरे रहम में क़रार दिया यहां तक कि एक ऐसे ज़माने में मेरे वजूद को ज़ाहिर किया कि मेरे लिए यह मुमकिन हो सका कि तेरे बर हक़ औलिया में जो मासूमीन अलैहिमुस्सलाम से सबसे ज्यादा करीब हैं यानी तेरे नेक बंदे इमाम खुमैनी र.ह. को पा सकूं और उनके शाना बा शाना  उनका एक सिपाही बन सकूं। अगर मैं रसूले खुदा स.अ. का सहाबी बनने की तौफ़ीक़ से महरूम रहा, अगर मैं  इमाम अली अ.स. और उनकी  मासूम औलाद की मज़लूमियत के ज़माने को न पा सका तो तूने मुझे इस दूरी के बावजूद उन्हीं के रास्ते का राही बनाया जिस पर कायनात और इस हस्ती की रूहो जान उन पाकीज़ा हस्तियों ने अपनी जान क़ुर्बान कर दी।
 ऐ माबूद मैं तेरा शुक्रगुजार हूं कि तूने अपने नेक बंदे इमाम खुमैनी के बाद मुझे अपने एक और नेक और सालेह बंदे के साथ कर दिया जिसकी मज़लूमियत उसकी नेकनामी और नेकी पर छाई हुई है। यानी ईरान की इस्लामी क्रांति के सुप्रीम लीडर हजरत आयतुल्लाह ख़ामेनई,  ऐसा मर्द जो इस ज़माने में इस्लाम, शीयत,  ईरान और इस्लामी और सियासी दुनिया का हकीम है।
परवरदिगार तेरा शुक्र है कि तूने मुझे अपने नेक बंदों  के दरमियान क़रार दिया और मुझे उनके जन्नती रुखसार पर बोसा देने और मुजाहेदीने  इस्लाम  की इलाही खुश्बू  को महसूस करने की तौफीक दी।
 परवरदिगार ऐ क़ादिरो अज़ीज़ ऐ राज़िको रहमान! मैं अपनी शर्मसार पेशानी को तेरी बारगाहे नाज़  में शुकराने के तौर पर ख़म करता हूं कि तूने मुझे शीयत और सच्चे इस्लाम के इत्र यानी सय्यदा फातिमा और उनकी औलाद के रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दी।  तूने मुझे हज़रत अली और सय्यदा फातिमा की औलाद पर आँसू बहाने की तौफ़ीक़ दी। यह तेरी कितनी अज़ीम नेमत है जो सबसे अनमोल और अज़मतों वाली है।
यह ऐसी नेमत है जिसमें नूर है, मानवियत है, ऐसी बेक़रारी जिसके अंदर सुकून पाया जाता है। यह ऐसा ग़म है  जिसमे सुकून और मानवियत पाई जाती है
ख़ुदाया तेरा शुक्र कि तूने मुझे ग़रीब मगर दीनदार और अहले बैत अलैहिमुस्सलाम के इश्क में डूबे वालेदैन अता किए जो हमेशा पाक़ीज़ा रास्ते पर चले। मैं तुझसे आजिज़ी के कमाल के साथ दुआ करता हूं कि उन दोनों को जन्नत में अपने औलिया का जवार नसीब फरमा । मुझे आख़िरत में उनकी नज़दीकी का शरफ अता कर।
परवरदिगार मैं तेरी बख्शिश और माफी का तलबगार हूं!
ऐ मेरे अज़ीज़ अल्लाह ऐ बे मिस्ल हकीम और ख़ालिक़
 मैं ख़ाली हाथ हूं, मेरी झोली ख़ाली हूं, मैं तही दस्त सिर्फ तेरी बख्शिश ओ मग़फेरत के भरोसे पर तेरी बारगाह में हाज़िरी दे रहा हूं।
मैंने इस दुनिया से कुछ नहीं लिया क्योंकि फक़ीर शाहों के पास जाएं तो ज़ादे राह की क्या ज़रूरत?
मेरी झोली तेरे फ़ज़्लो करम की उम्मीद से भरी हुई है। मैं अपने साथ दो बंद आंखें लाया हूं , तमाम तरह की नापाकियों के बावजूद एक अज़ीम सरमाया लेकर आया हूं और वह सरमाया है ग़में हुसैन के आंसू! अहलेबैत की मुसीबत पर अश्कों की दौलत!
मजलूम की रक्षा और हिमायत में बहे आंसू!
यतीमों मज़लूमों और ज़ालिमों की घेराबंदी में कैद बेबसों पर बहने वाले आंसू। परवरदिगार मेरे हाथों में कुछ भी नहीं है, ना मेरे पास तेरी बारगाह में पेश करने के लायक कुछ है, ना अपनी रक्षा में कुछ बयान करने की कुदरत।
हां मेरे पास कुछ ज़ख़ीरा है और मैं उसी पर भरोसा किए हुए हूं।
वह यह कि मैं लगातार तेरी ओर बढ़ता रहा हूं। मैंने जब इन्हें तेरी बारगाह में बुलंद किया जब तेरी मर्ज़ी की ख़ातिर। इन्हें ज़मीन और ज़ानू पर रखा। जब तेरे दीन की हिफाज़त की ख़ातिर इन हाथों में हथियार उठाए, वह लम्हात मेरा ज़ख़ीरा मेरी दौलत है। मुझे उम्मीद है कि यह सरमाया तेरी बारगाह में क़ुबूल होगा।
परवरदिगारा मेरे पांव सुस्त हैं...इनमें जान बाक़ी नहीं इनमें पुले सिरात को पार करने की ताक़त नहीं है।
आम पुलों पर मेरे पांव लरज़ने लगते हैं हाय पुले सिरात जो बाल से ज़्यादा बारीक और तलवार से ज़्यादा तेज़ है!
लेकिन एक उम्मीद है जो मुझे हौसला देती है कि शायद मैं पुले सिरात से गुज़रते वक्त लरज़िश से बचा रहूं मुमकिन है निजात पा जाऊं
मैं इन पांवों से तेरे हर में दाख़िल हुआ हूं, तेरे घर का तवाफ किया है, इन्हीं पांव के सहारे तेरे वलियों के दरबार, कर्बला बैनल हरमैन तेरे हुसैन और अब्बास के रोज़ों के दरमियान नंगे पांव चलता रहा।
मैं अपने पैरों के सहारे लंबी अवधि तक चलने वाली जंगो के बीच तेरे दीन की हिफाज़त की खातिर दौड़ता रहा, बंकरो में समेटता रहा, कभी इन्हीं पांव पर चलता रहा, कभी रेंगता रहा, तेरे दीन की हिफाज़त की ख़ातिर हंसता-हंसाता और रोता- रुलाता रहा!
कभी गिर गया तो कभी उठ खड़ा हुआ! खुदाया मैं उम्मीदवार हूं तेरे दीन की हिफाज़त में में मेरी वह कोशिशें, कभी रेंगना तो कभी झपट कर बढ़ना, अपने वलियों के दरबार में हाज़िरी के सदक़े इन पैरों पर रहम फरमा और इन्हें बख़्श दे।
खुदाया मेरा सर, मेरी अक्ल, मेरे होंठ, मेरी नाक, मेरे कान, मेरा दिल, मेरे बदन का एक एक हिस्सा तेरे फज़्लो करम की आस लगाए हुए है। ऐ सबसे ज्यादा रहम  करने वाले मेरे अल्लाह! मुझे कुबूल कर ले! मुझे पाक़ीज़ा बनाकर कुबूल कर ले  इस तरह से मुझे अपना बना ले कि तेरे दीदार के क़ाबिल हो जाऊं।
मैं तेरे दीदार के अलावा कुछ नहीं चाहता मेरी जन्नत तेरी क़ुरबत का साया है।

.............



लाइक कीजिए
2
फॉलो अस
नवीनतम