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शहीद सरदार क़ासिम सुलैमानी का इलाही सियासी वसीयत नामा - 2

जान लीजिए और सब मतभेदों को एक तरफ डाल दीजिए और कभी भी विलायते फ़क़ीह से मुंह मत मोड़ना इसी में इस्लाम की भलाई है।
यह ख़ैमा रसूल अल्लाह स.अ. का ख़ैमा है और इसी वजह से सारी दुनिया इस्लामी गणतंत्र ईरान की दुश्मन बनी हुई है। वह इसको  जलाकर वीरान कर देना चाहते हैं

विलायत पोर्टल :  ऐ खुदा खुदा मैं अपने दोस्तों के क़ाफ़िले से पीछे रह गया हूं।
ऐ मेरे क़ादिर और ख़ालिक़! एक मुद्दत हुई मैं उस काफिले से पीछे रह गया हूं जिसकी तरफ लगातार दूसरों को रवाना कर रहा हूं!
लेकिन मेरे अल्लाह तू तो जानता है कि मैंने उन्हें कभी नहीं भुलाया। यही नही कि मैं हमेशा उनकी याद में डूबा हुआ हूं बल्कि उनके नाम मेरे ज़हन में नक्श हैं उनके नाम उनकी यादें मेरे दिल और मेरी आंखों में अश्क और आहों के साथ मिली हुई हैं।
मेरे प्यारे अल्लाह मेरा जिस्म आहिस्ता आहिस्ता ज़ईफ और निढाल हो रहा है कैसे मुमकिन है कि जो 40 साल से लगातार तेरे दर पर खड़ा हुआ है तो उसे हाज़िरी की इजाजत ना दे?
मेरे ख़ालिक़, मेरे महबूब, मेरे माशूक़!
मैंने हमेशा दिल की गहराइयों से तुझसे सवाल किया है कि मेरे वुजूद को अपने इश्क की दौलत से मालामाल कर दे। मुझे अपने हिज्र में तड़पने की लज़्ज़त दे और मुझे इसी हिज्र में मौत से हम आग़ोश कर दे।
 मेरे अज़ीज़!
मैं क़ाफिला ए इश्क़ से पीछे रह जाने की रुस्वाई के कारण और इस काफ़िले से जा मिलने की बेक़रारी में जंगल और बयाबान की ख़ाक छान रहा हूं।
एक उम्मीद और एक आस पर इस शहर से उस शहर, इस सहरा से उस सहरा, सर्दी और गर्मियों से बेपरवाह सफर पर निकला हुआ हूं।
ऐ करीम, ऐहबीब मैं तेरे करम के आसरे पर हूं। तू खुद जानता है कि मैं तेरा आशिक हूं। तू बेहतर जानता है कि मैं तेरे सिवा किसी को नहीं चाहता। मुझे अपनी क़ुरबत से नवाज़ दे।
ख़ुदाया एक वहशत ने मेरे वजूद को अपने घेरे में ले लिया है। मैं अपने नफ्स को साधने की ताक़त नहीं रखता। परवरदिगारा मुझे रुसवा न होने देना।
जिन हस्तियों का एहतराम तूने लाज़िम किया तुझे उनका वास्ता, उन मुकद्दस लोगों के हरम की हुरमत और हिसार टूटने से पहले मुझे अपनी ओर आने वाले काफिले तक पहुंचा दें।
मेरे माबूद, मेरे इश्क़ और माशूक़ मैं तेरा आशिक़ हूं।
मैंने तुझे बार बार देखा है। तुझे महसूस किया है। मुझ में तुझसे अलग रहने का हौसला नहीं है। बहुत हो चुका.... बस अब मुझे कुबूल कर ले। मगर इस तरह कि मैं तुझसे मुलाकात के लायक हो सकूं।

अपने मुजाहिद बहन भाईयों से ख़िताब !
इस दुनिया में मेरे मुजाहिद बहन भाईयों ! ऐ वह लोगों जिन्होंने अपने सर ख़ुदा की राह में क़र्ज़ दे दिए और अपनी जान अपनी हथेलियों पर रखे बाज़ारे इश्क़ में चले आए हैं, जरा ध्यान दें !
इस्लामी गणतंत्र ईरान इस्लाम और शीयत का केंद्र है। इस वक्त इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की ख़ैमागाह ईरान है।
जान लीजिए की इस्लामी गणतंत्र ईरान एक हरम है अगर यह हरम महफ़ूज़ रहा तो बाकी हरम भी सुरक्षित रहेंगे। अगर दुश्मन इस हरम को तबाह करने में कामयाब हो जाएं तो कोई हरम महफूज़ नहीं बचेगा ना इब्राहिम अलैहिस्सलाम का हरम और न ही नबी ए इस्लाम का रौज़ा।  मेरे भाईयों और बहनों इस्लामी जगत को हमेशा से एक रहबर और लीडर की ज़रूरत है ऐसा रहबर जो शरई और फिक़्ही ऐतबार से मासूम की जानिब से मंसूब हो और उनसे जुड़ा हुआ हो।
आप अच्छी तरह जानते हैं कि दुनिया को झिंझोडने और इस्लाम को ताज़गी देने वाले, पाक़ीज़ा किरदार आलिमे दीन हमारे इमाम खुमैनी ने इस उम्मत की निजात का इकलौता रास्ता विलायते फ़क़ीह को करार दिया है।
आप आस्था के अनुसार इस बात को स्वीकार करने वाले शिया हों या अक़्ली दलील और सबूतों के आधार पर विलायते फ़क़ीह को कुबूल करने वाले अहले सुन्नत..!
जान लीजिए और सब मतभेदों को एक तरफ डाल दीजिए और कभी भी विलायते फ़क़ीह से मुंह मत मोड़ना इसी में इस्लाम की भलाई है।
यह ख़ैमा रसूल अल्लाह स.अ. का ख़ैमा है और इसी वजह से सारी दुनिया इस्लामी गणतंत्र ईरान की दुश्मन बनी हुई है। वह इसको  जलाकर वीरान कर देना चाहते हैं इसके चारों ओर तवाफ करते रहें।
ख़ुदा की क़सम! ख़ुदा की क़सम! ख़ुदा की क़सम!
अगर इस ख़ैमें को नुकसान पहुंचा तो अल्लाह का घर, रसूल इस्लाम स.अ. का हरम, मदीना, नजफ़, कर्बला काज़मैन, सामर्रा और मशहद भी बाकी ना रहेंगे। बल्कि क़ुरान को भी नुकसान पहुंचेगा।
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