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इमाम सादिक़ अ.स. बुज़ुर्ग उलमा की निगाह में

ज़ैद इब्ने अली फ़रमाते हैं: हर ज़माने में हम अहलेबैत अ.स. में से कोई न कोई शख़्स ऐसा मौजूद रहता है जिसके द्वारा अल्लाह अपने बंदों पर हुज्जत तमाम करता है इस ज़माने की हुज्जत मेरे भतीजे जाफ़र इब्ने मोहम्मद हैं जो उनकी पैरवी करेगा गुमराह नहीं होगा और जो उनका विरोध करेगा और कहना नहीं मानेगा उसकी कभी हिदायत नहीं हो सकती।

विलायत पोर्टल : हज़रत इमाम सादिक़ अ.स. मशहूर क़ौल की बिना पर 17 रबीउल अव्वल सन् 83 हिजरी को मदीना शहर में पैदा हुआ, आपके वालिद इमाम मोहम्मद बाक़िर अ.स. और आपकी मां फ़ातिमा उम्मे फ़रवा बिनते क़ासिम इब्ने मोहम्मद थीं, आपके अलक़ाब सादिक़, फ़ाज़िल, ताहिर, क़ाएम, मुनजी और साबिर थे, आपकी कुन्नियत अबू अब्दिल्लाह, अबू इस्माईल और अबू मूसा थी, और 15 या 25 शव्वाल सन 148 हिजरी को 65 साल की उम्र में आपकी शहादत हुई और आपके पाक बदन को बक़ी के क़ब्रिस्तान में दफ़्न किया गया, आप 12 साल तक अपने दादा इमाम सज्जाद अ.स. के साथ रहे और 19 साल अपने वालिद इमाम बाक़िर अ.स. के साथ ज़िंदगी गुज़ारी, आपकी इमामत का ज़माना 34 साल था।
शख़्सियत और उसके बारे में उलमा के बयान
इमाम सादिक़ अ.स. हसब और नसब, इल्म और फिक़्ह, इबादत और इरफ़ान और अख़लाक़ी कमाल में अपने दौर की सबसे अज़ीम और मशहूर शख़्सियत थे जिसकी बहुत सारे बुज़ुर्ग उलमा ने गवाही दी है।
मदीने के फ़क़ीह मालिक इब्ने अनस ने आपके बारे में कहा है कि: मैं कभी कभी जाफ़र इब्ने मोहम्मद की ख़िदमत में हाज़िर होता था वह मेरा सम्मान करते थे मेरे लिए अपनी अबा बिछाते थे और फ़रमाते थे और फ़रमाते थे कि मालिक मैं तुम्हें दोस्त रखता हूं, मैं आपके इस अमल से ख़ुश होता था और अल्लाह का शुक्र अदा करता था, मैं आपको इन तीन हालतों के अलावा किसी और में नहीं देखता था, या रोज़े से होते थे या नमाज़ पढ़ रहे होते थे या अल्लाह का ज़िक्र किया करते थे, लोगों में सबसे ज़्यादा इबादत करने वाले, सबसे बड़े ज़ाहिद और सबसे ज़्यादा मेहरबान थे,, बहुत ज़्यादा हदीसें बयान करते थे, आपके साथ उठने बैठने में अच्छा लगता था और उसका हमें बहुत फ़ायदा होता था, जब आप पैग़म्बर स.अ. से कोई हदीस नक़्ल करते तो आपके चेहरे का रंग इतना ज़र्द (पीला) हो जाता था कि पहचानना मुश्किल हो जाता था, मुझे एक साल आपके साथ हज पर जाने का शरफ़ मिला जब आपने एहराम के लिए तलबिया (लब्बैक अल्लाहुम्मा लब्बैक) कहना चाहा आपकी आवाज़ हलक़ में घुट कर रह गई और आप तलबिया नहीं कह सके आपकी हालत ऐसी हो गई कि क़रीब था कि आप सवारी से नीचे गिर जाएं, मैंने कहा: ऐ पैग़म्बर स.अ. के बेटे तलबिया कहना ज़रूरी है, तो आपने फ़रमाया: ऐ इब्ने आमिर, तलबिया कहने की हिम्मत कैसे करूं जबकि मुझे डर है कि जवाब में अल्लाह ला लब्बैक ला सादैक न कह दे। (बिहारुल अनवार, जिल्द 47, पेज 16)
मालिक इब्ने अनस का बयान है कि: अल्लाह की क़सम मैंने ज़ोहद, फ़ज़्ल, इबादत और परहेज़गारी में जाफ़र इब्ने मोहम्मद से बेहतर किसी को नहीं देखा। (मनाक़िब आले अबी तालिब, जिल्द 4, पेज 297)
अम्र इब्ने अबिल मिक़दाम का बयान है कि: मैंने जब जाफ़र इब्ने मोहम्मद की तरफ़ देखा तुरंत समझ गया कि यह पैग़म्बर स.अ. की नस्ल से हैं। (तहज़ीबुत तहज़ीब, जिल्द 2, पेज 104)
ज़ैद इब्ने अली फ़रमाते हैं: हर ज़माने में हम अहलेबैत अ.स. में से कोई न कोई शख़्स ऐसा मौजूद रहता है जिसके द्वारा अल्लाह अपने बंदों पर हुज्जत तमाम करता है इस ज़माने की हुज्जत मेरे भतीजे जाफ़र इब्ने मोहम्मद हैं जो उनकी पैरवी करेगा गुमराह नहीं होगा और जो उनका विरोध करेगा और कहना नहीं मानेगा उसकी कभी हिदायत नहीं हो सकती। ( मनाक़िब इब्ने शहर आशोब, जिल्द 4, पेज 299)
इस्माइल इब्ने अली इब्ने अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास का बयान है कि मैं एक दिन अबू जाफ़र मंसूर के पास गया, देखा वह रो रहा है और उसकी दाढ़ी आंसुओं से तर है, उसने कहा क्या तुम्हें नहीं मालूम अहलेबैत पर कैसी मुसीबत पड़ी है..... मैंने कहा: क्या कोई घटना पेश आई? उसने कहा दुनिया के सैयद और सरदार, सालेहीन की यादगार अब इस दुनिया में नहीं रहे, मैंने सवाल किया: कौन? उसने जवाब दिया: जाफ़र इब्ने मोहम्मद, उसने कहा: जाफ़र उन लोगों में से थे जिनको अल्लाह ने चुना है और वह नेकियों की तरफ़ बढ़ने वाले थे। (तारीख़े याक़ूबी, जिल्द 2, पेज 383)
इब्ने हय्यान ने जाफ़र इब्ने मोहम्मद को भरोसेमंद लोगों में शुमार किया है और कहा है कि वह फ़िक़्ह, इल्म और फ़ज़्ल में अहलेबैत के बुज़ुर्गों और सरदारों में से थे उनकी हदीसों से दलीलें पेश की जाती हैं। (तहज़ीबुत तहज़ीब, जिल्द, 2, पेज 104)
शैख़ मुफ़ीद र.अ. ने आपके बारे में लिखा है कि: सादिक़ जाफ़र इब्ने मोहम्मद इब्ने अली इब्ने हुसैन अ.स. अपने भाइयों के बीच अपने वालिद के जानशीन और उनके बाद इमाम बने, आप फ़ज़ाएल में सबसे अफ़ज़ल थे, शिया और अहले सुन्नत दोनों ही की निगाह में सबसे ज़्यादा मशहूर और अज़मत और जलालत वाले थे, आपके उलूम सारे शहरों में फैले हुए थे, अहलेबैत अ.स. में किसी से भी इतनी ज़्यादा हदीस नक़्ल नहीं हुई हैं, हदीस के उलमा ने आपकी रिवायत नक़्ल करने वाले भरोसेमंद रावियों की तादाद 4000 बताई है। (अल इरशाद, जिल्द 2, पेज 179)

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