×
×
×

आईएसआईएस का ख़ात्मा तो हो गया लेकिन वह नाबूद होने के लिए नही उठे थे!!

NSA के एडवर्ड स्नोडन ने अधिकारिक तौर पर स्वीकार किया था कि ISIS पश्चिमी ख़ुफ़िया एजेंसियों में शहद की मक्खियों के नाम से मशहूर था, हिलेरी क्लिंटन ने अपनी कठिन विकल्प नामी किताब में ख़ुद अधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि ISIS को हमने तैयार किया, और उसको अधिकारिक दर्जा देने के लिए मैंने 120 देशों की यात्रा की, ट्रंप ने अधिकारिक तौर पर ऐलान किया कि ISIS को बाराक ओबामा ने बनाया था।

विलायत पोर्टल : आतंकी संगठन ISIS को एक दो या दस साल के लिए तैयार नहीं किया गया था, बल्कि उसको लंबे समय तक आतंक फैलाने के लिए संगठित किया गया था, उसकी ट्रेनिंग से लेकर हथियार देने और फंडिंग करने तक हर छोटी बड़ी बात पर विशेष ध्यान रखा गया था ताकि काफ़ी लंबे समय तक टिक कर इस्लामी देशों का सत्यानाश करे।
और यह ऐसी सच्चाई है जिसको ख़ुद अमेरिका ने स्वीकारा है यह और बात है ख़ुद का दामन बचाने के लिए और इस आतंकी संगठन का ख़ात्मा करने का बहाना लेकर उसने सीरिया और इराक़ पर हमले किए हैं।
आतंकी संगठन ISIS का सरगना इस्राईल  के तलअवीव में मोसाद की निगरानी मे ट्रेंड किया जाता है उसको सत्ता चलाने और कैसे पूरे विश्व के लोगों को गुमराह करना है इसका हुनर वहीं पर सिखाया जाता है, वह हुकूमत करने के लिए उभर कर सामने आया था।
उसने नाम भी इस्लामिक स्टेट ऑफ़ इराक़ एंड सीरिया रखा, यह बात सबसे ज़्यादा ध्यान देने के लायक़ है कि यह आतंकी संगठन हुकूमत करने के इरादे से बनाया गया था, इस आतंकी संगठन को बनाने के पीछे की मंशा साफ़ थी कि किस तरह से भोली भाली जनता का ब्रेन वॉश कर के विशेष धर्म को बदनाम करने की साज़िश रचते हुए लोगों को इस संगठन से जोड़ कर आस पास के इलाक़ों में भय का माहौल पैदा किया जाए और लोग अपने काम काज को अपने घरों को छोड़ कर भाग जाएं और उस जगह को उनके लिए ख़ाली कर दें।
यह बात तो हर कोई जानता है कि किसी भी सत्ता को चलाने के लिए एक राजनीतिक, सैन्य और सुरक्षा सिस्टम और एक विचारधारा की आवश्यकता होती है, अब हमें यह देखना होगा इन सारी चीज़ों को जोड़ने और इकट्ठा करने के लिए किस किस ने इनका साथ दिया और इस आतंकी संगठन को कैसे मज़बूती मिली.....
अब जब किआईएसआईएस  के पीछे मज़बूत हाथों और उसे बढ़ावा देने वालों के चेहरे को पूरी दुनिया ही जान चुकी है फिर भी जो अभी तक किसी भ्रम में जी रहे हैं उनके लिए एक बार फिर से बयान कर दूं, जिन देशों ने आतंकी संगठन ISIS को मज़बूत बनाने में बुनियादी रोल निभाया है उनमें सऊदी का नाम सबसे पहले लेना चाहूंगा कि एक तरफ़ तो आले सऊद इस्लामी जगत का ठेकेदार बनने की दावेदारी करते हैं दूसरी तरफ़ इस्लाम को बदनाम करने के लिए इसी आतंकी संगठन को  बिलियनों डॉलर कैश देते है, इसी तरह ISIS को मज़बूती और आतंक फैलाने में मदद करते हुए संयुक्त अरब अमीरात ने भी पचासों बिलियन डॉलर की फंडिंग की, कुवैत, क़तर और बहरैन  ने भी डट कर आर्थिक  योगदान किया, साथ ही दुनिया के सबसे बड़े जासूसी गुट मोसाद इस्राईल, इंग्लैंड की MI6, तथा  अमेरिका की सीआईए ने इस आतंकी संगठन के खाने पीने और इसे ख़ुफ़िया जानकारी देने और इनकी सुरक्षा करने का ज़िम्मा उठाया, जार्डन ने इस संगठन को ट्रेंड करने के लिए अपनी ज़मीन दी तो जापान ने अपना सहयोग देते हुए कई हज़ार टोयोटा गाड़ी दी, फ्रांस ऑटोमैटिक हथियार दे रहा था तो तुर्की डिवाइसेज़ और ट्रांसपोर्ट का बंदोबस्त करने और लोगों को ISIS से जोड़ने का रोल अदा करता रहा, अमेरिका सीधे हथियारों की आपूर्ति कर रहा था और सबसे ख़तरनाक सैन्य विमान उनके इस्तेमाल में दे रखे थे, साथ ही ऐसी मिसाइलें दे रखी थीं कि उनकी क़ीमत उन टैंकों से भी अधिक थी जिन्हें वह इस्तेमाल करते हैं, मैदान में कमांडर के तौर पर उतारने के लिए चेचन्या के लाल दाढ़ी वाले मुस्टंडे रखे गए थे।
NSA के एडवर्ड स्नोडन ने अधिकारिक तौर पर स्वीकार किया था कि ISIS पश्चिमी ख़ुफ़िया एजेंसियों में शहद की मक्खियों के नाम से मशहूर था, हिलेरी क्लिंटन ने अपनी कठिन विकल्प नामी किताब में ख़ुद अधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि ISIS को हमने तैयार किया, और उसको अधिकारिक दर्जा देने के लिए मैंने 120 देशों की यात्रा की, ट्रंप ने अधिकारिक तौर पर ऐलान किया कि ISIS को बाराक ओबामा ने बनाया था।
तो यह था आईएसआईएस.....
यह थी आईएसआईएस की ताक़त.....
यह थे आईएसआईएस के पीछे मौजूद चेहरे.....
यह थी साम्राज्यवाद की सच्चाई.....
जिसने एक ऐसा आतंकी संगठन तैयार किया जिसने न केवल इंसानियत को शर्मसार किया बल्कि इस्लाम और मुसलमानों का ऐसा बदनाम किया कि आज पूरी दुनिया में कहीं भी कट्टरता दिखाई देती है तो सीधे मुसलमानों पर उंगली उठाई जाती है जबकि अधिकतर लोग आईएसआईएस की सच्चाई जानते हुए केवल इस्लाम और मुसलमानों को बदनाम करने के लिए ऐसा करते हैं।
कहा जा सकता है कि सारे साम्राज्यवाद ने हाथ से हाथ मिला लिया था और सर से सर जोड़ लिया था........ लेकिन सवाल यह है कि साम्राज्यवाद ने आईएसआईएस को किस लिए तैयार किया था?
अमेरिका और इस्राईल और उसके सहयोगियों की ऐसी क्या मजबूरी थी जिसके चलते ऐसे भयानक आतंकी संगठन को तैयार किया?
इस सवाल के जवाब के लिए आईएसआईएस की गतिविधियों और उन्होंने किसकी हत्याएं की और किसको आर्थिक नुक़सान पहुंचाया और किसको बर्बाद किया और कीन्हे उजाड़ने की कोशिश की इन बातों का जानना ज़रूरी है।
इसके अलावा इन सवालों के जवाब जानने के लिए अमेरिका, इस्राईल  और उसके सहयोगियों और भागीदारों का ईरान, क़ुद्स ब्रिगेड, हिज़्बुल्लाह, हश्दुश शअबी, हौसी, हमास और न जाने कितने इसी आतंकी टोले आईएसआईएस से लड़ने, उन्हें अपनी ज़मीनों से खदेड़ने, उनकी कमर तोड़ने और उनको नाबूद करने वाले गुटों पर आतंकवाद का आरोप देख लीजिए, आपको सवालों का जवाब मालूम हो जाएगा।
इस विश्लेषण के बाद जिस दिल में भी सच्चाई, ईमानदारी, निष्पक्षता और इंसानियत से प्यार होगा वह यही कहेगा कि आईएसआईएस को खड़ा करने में अमेरिका, इस्राईल  और उसके सहयोगियों का ही हाथ है और इस भयानक और इंसानियत के दुश्मन आतंकी संगठन आईएसआईएस को तैयार करने का मक़सद इस्लामी देशों को नुक़सान पहुंचाना और मुसलमानों को बदनाम करने के अलावा कोई और मक़सद नहीं था।
अब अगर लेफ्टिनेंट जनरल क़ासिम सुलैमानी पर आतंकवाद के आरोप की बात की जाए तो देखना पड़ेगा कि क़ासिम सुलैमानी, आईएसआईएस के साथ मिलकर इलाक़े में भय का माहौल पैदा करते हुए लोगों की बे रहमी से हत्याएं कर रहे थे या अमेरिका, इस्राईल और ISIS के आतंकवाद को दफ़्न करने के लिए पिछले 30 सालों से जी जान से लगे हुए थे?
क़ासिम सुलैमानी, आईएसआईएस के साथ मिलकर (मआज़ अल्लाह) औरतों की इज़्ज़त लूट रहे थे या दूसरे देशों की औरतों (जैसे भारत की 40 से ज़्यादा नर्सों) को आईएसआईएस के चंगुल से आज़ाद करा कर उनके देश पूरे सम्मान के साथ वापस भेज रहे थे?
क़ासिम सुलैमानी, आईएसआईएस से मिलकर दूसरे देशों में घुसकर उनकी ज़मीनों पर क़ब्ज़ा करने की कोशिश कर रहे थे या फ़िलिस्तीन, लेबनान, सीरिया और इराक़ जैसे देशों को अमेरिका, इस्राईल और उसके सहयोगियों के क़ब्ज़े से छुड़ाने के लिए अपनी जान क़ुर्बान कर दी?
क़ासिम सुलैमानी,आईएसआईएस के साथ मिलकर दूसरे देशों में मौजूद तेल के कुओं पर क़ब्ज़ा किया या इराक़ और आसपास में मौजूद तेल के कुओं पर लगी अमेरिका की निगाहों को अंधा कर दिया?
जिस किसी के भी पास थोड़ा सा भी सेंस होगा और अक़्ल मौजूद होगी वह यही कहेगा इन आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने वाला और उसका मुक़ाबला कर के नर्सों को छुड़ाने वाला, तेल के कुओं से उनके क़ब्ज़े को वापस छीनने वाला, महिलाओं को उनके चंगुल को आज़ाद कराने वाला, ज़मीनों को उनके अवैध क़ब्ज़े से निजात दिलाने वाला और बे गुनाह और मासूम लोगों की हत्याओं की भयंकर साज़िश को नाकाम करने वाला यह दोनों एक नहीं हो सकते, तो फिर अब आप भी समझ गए होंगे कि शहीद  जनरल क़ासिम सुलैमानी और उनके जैसे, आईएसआईएस की कमर तोड़ने और उनको मिडिल ईस्ट से भगाने वालों पर आतंकवाद का आरोप कौन और क्यों लगा रहा है......।
इस लेख में आईएसआईएस के पीछे मौजूद देशों और उनका आर्थिक, सैन्य और दूसरे सपोर्ट करने वालों को देख कर अंदाज़ा हो गया होगा कि आईएसआईएस नाबूद होने नहीं बल्कि नाबूद करने और धर्म विशेष को बदनाम करने की नाकाम साज़िश लेकर बनाया गया था और काफ़ी हद तक वह अपने मक़सद में कामयाब भी हुए जिसका सीधा और साफ़ कारण आले सऊद और उसके कुछ पिछलग्गू देश और उस जैसी मानसिकता रखने वाले लोग थे।
लेकिन अल्लाह का शुक्र है कि शहीद  जनरल क़ासिम सुलैमानी और उन जैसे जियालों ने ख़ुद को फ़ना कर के न केवल इस आतंकी संगठन का सर्वनाश किया बल्कि उसके पीछे छिपे अमेरिका, इस्राईल उसके सहयोगी देश और आले सऊद को बे नक़ाब करते हुए इस्लाम और मुसलमानों के नाम से आतंकवाद को जोड़ने वालों को भी करारा जवाब दिया।
..............

लाइक कीजिए
0
फॉलो अस
नवीनतम