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आयतुल्लाह हाशिमी रफ़संजानी और फ़िदक के इलाक़े का सफ़र + वीड़ियो

आयतुल्लाह रफ़संजानी पूछते हैं कि इस इलाक़े में और कौन सी जगह हज़रत ज़हरा स.अ. के नाम से जुड़ी हुई हैं?उसने बताया कि हज़रत ज़हरा स.अ. के नाम से 7 पानी के चश्मे, एक मस्जिद है, एक वादी है और कुछ बाग़ हैं।इसके बाद आयतुल्लाह हाशमी ने पूछा आख़िर इसका नाम बदल कर ....

विलायत पोर्टल : जून 2008 में ईरान के पूर्व राष्ट्रपति आयतुल्लाह हाशमी रफ़संजानी ने अपने सऊदी अरब के दस दिन के सफ़र पर फ़िदक जिसे पैग़म्बर स.अ. ने अपनी बेटी हज़रत ज़हरा स.अ. को तोहफ़े के तौर पर दिया था दिया था उस जगह का बहुत नज़दीक से जायज़ा लिया था और कुछ ऐसी सच्चाइयों से पर्दा उठाया था जिससे उस समय तक सारी दुनिया की निगाहों से छिपा कर रखा गया था।
आयतुल्लाह हाशमी रफ़संजानी ने मदीने से 260 किलोमीटर दूर हायल नामी राज्य में बसे अल-हायत नामी जगह का दौरा किया, जिस इलाक़े के बारे में मदीना शहर के रहबर आयतुल्लाह शैख़ मोहम्मद अली अल-अमरी का कहना है कि ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर वही फ़िदक है।
पूर्व राष्ट्रपति, ईरान के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ सऊदी सिक्योरिटी में जब उस इलाक़े में क़दम रखते हैं तो उस राज्य के गवर्नर समेत स्थानीय लोग भी उनका इस्तेक़बाल करने पहुंच जाते हैं,  हायल नामी राज्य के गवर्नर नाएफ़ आयतुल्लाह रफ़संजानी से कहते हैं कि यह फ़िदक है पुराने लोग इसे अभी तक फ़िदक ही कहते हैं और इस शहर में 35 हज़ार लोग रहते हैं।
उसके बाद उसी इलाक़े का रहने वाला मोहम्मद अब्दुल रहमान जाबिर नाम का बूढ़ा शख़्स जो पहले उस इलाक़े में अम्र बिल मारूफ़ कमेटी का चेयर मैन था वह ईरान के पूर्व राष्ट्रपति के साथ उस इलाक़े का दौरा कराता है और उनके सवालों का जवाब देता है।
ईरान के पूर्व राष्ट्रपति रफ़संजानी पूछते हैं कि इस इलाक़े को फ़िदक क्यों कहा जाता है?
वह फ़िदक कहे जाने के पीछे कारण को बताते हुए कहता है कि क्योंकि इसे पैग़म्बर स.अ. ने अपनी बेटी हज़रत ज़हरा स.अ. को तोहफ़े में दिया था।
इसके बाद पूर्व राष्ट्रपति ने पूछा कि इस इलाक़े को क्यों पैग़म्बर स.अ. ने हज़रत ज़हरा स.अ. को दिया था?
वह जवाब देता है कि हमारा मानना यह है कि क्योंकि यह इलाक़ा बिना किसी जंग के हासिल हुआ था और उस इलाक़े के रहने वालों ने ख़ुद पैग़म्बर स.अ. को तोहफ़े के तौर पर दिया था उसी के बाद पैग़म्बर स.अ. ने इसे हज़रत ज़हरा स.अ. को तोहफ़े के तौर पर दे दिया था।
फिर आयतुल्लाह रफ़संजानी पूछते हैं कि इस इलाक़े में और कौन सी जगह हज़रत ज़हरा स.अ. के नाम से जुड़ी हुई हैं?
उसने बताया कि हज़रत ज़हरा स.अ. के नाम से 7 पानी के चश्मे, एक मस्जिद है, एक वादी है और कुछ बाग़ हैं।
इसके बाद आयतुल्लाह हाशमी ने पूछा आख़िर इसका नाम बदल कर हायत क्यों रख दिया? (हायत, अरबी में दीवार को कहते हैं)
उसने बताया कि इस इलाक़े में इस इलाक़े में तीन ऊंची दीवारें हैं जिन्होंने उस जगह को तीन तरफ़ से घेर रखा है और उन दीवारों के अंदर हज़रत ज़हरा स.अ. के बाग़ हैं, यह मस्जिद जो दोबारा बनाई गई है पैग़म्बर स.अ. के ज़माने की है और हज़रत ज़हरा स.अ. के नाम से मशहूर है, और हम लोग आले जाबिर हैं जो सैंकड़ों साल से यहां बसे हैं और आले सऊद से पहले यहां पर हमारी हुकूमत थी।
फिर पूर्व राष्ट्रपति ने पूछा कि फ़िदक का इलाक़ा कितना है?
जाबिर ने बताया फ़िदक का कुल इलाक़ा 50 x 50 किलोमीटर है।


इसके बाद चश्मों के पानी के बारे में सवाल किया कि उनका पानी कैसा है?
उसने बताया यह चश्मे उयूने फ़ातिमा के नाम से मशहूर हैं और उन पर ध्यान न देने और ख़्याल न रखने की वजह से यह अब इस्तेमाल के क़ाबिल नहीं रहे बस खेती के काम में यह पानी इस्तेमाल किया जाता है।
आयतुल्लाह हाशमी रफ़संजानी ने कहा कि मैं इस चश्मे का पानी पीना चाहता हूं, जाबिर और वहां पर मौजूद लोगों ने पानी पीने से रोकने की कोशिश की और कहा कि पानी फ़िलहाल पीने के लायक़ नहीं है उसे मत पीजिए।
ईरान के पूर्व राष्ट्रपति की आंखों से आंसू जारी हो गए और कहा कि यह बद क़िस्मती और दुर्भाग्य होगा कि इंसान यहां तक आए और हज़रत ज़हरा स.अ. के पानी के चश्मे से पानी पिए बिना चला जाए।
वहां मौजूद लोगों का कहना है कि इस जुमले ने वहां मौजूद सभी लोगों की आंखें नम कर दी।

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