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ईरान के मुक़ाबले अमेरिका की फिर ऐतिहासिक हार

पिछले चालीस सालों से अमेरिका किस तरह एक के बाद एक कड़ी पाबंदियां लगा कर ईरान को कमज़ोर बनाने में लगा हुआ है, उसका केवल एकमात्र लक्ष्य रहा है कि किसी भी तरह ईरान को और वहां की जनता को दिमाग़ी तौर से उलझनों में रखा जाए जिससे वह शिक्षा, स्वास्थ, साइंस, टेक्नोलॉजी, उद्योग, व्यापार और इस जैसे अनेक क्षेत्रों में आगे न बढ़ सकें, लेकिन ईरान की जनता ने वहां की लीडरशिप के नेतृत्व में हर क्षेत्र और हर मैदान में ऊंचाइयों को छू कर इतिहास रचा है,

विलायत पोर्टल :
इस्लामी रिपब्लिक ईरान ने अमेरिकी धमकियों के बावजूद तेल के जहाज़ों को वेनेज़ोएला रवाना किया जो वेनेज़ोएला पहुंच गए हैं, ईरान ने अमेरिका की खोखली धमकियों को नज़र अंदाज़ कर के उसके मुंह पर झन्नाटेदार तमांचा जड़ दिया है।
लंदन से छपने वाले न्यूज़ पेपर रायुल यौम के चीफ़ एडिटर अब्दुल बारी अतवान ने अपने आर्टिकल में लिखा है कि इस्लामी रिपब्लिक ईरान और अमेरिका के बीच फ़र्क़ यह है कि ईरान ने अमेरिकी पाबंदियों के शिकार वेनेज़ोएला को कठिन और मुश्किल समय में तेल सप्लाई किया जबकि अमेरिका ने इस देश की जनता के विरुद्ध कड़ी पाबंदियां लगा रखी हैं, जिससे साबित होता है कि ईरान इंसान दोस्त देश है और जबकि अमेरिका इंसान और इंसानियत का दुश्मन है, अब्दुल बारी अतवान ने कहा कि ईरान ने बड़ी हिम्मत और बहादुरी के साथ अमेरिका द्वारा की गई वेनेज़ोएला की घेराबंदी तोड़ कर यहाँ की जनता की मदद की है जिसके बाद वेनेज़ोएला के राष्ट्रपति ने ईरान का दिल की गहराइयों से आभार प्रकट किया है।
अमेरिका ने वेनेज़ोएला की हुकूमत को गिराने के लिए अपने सैकड़ों एजेंट इस देश में रवाना किए जिन्हें हार का मुंह देखना पड़ा है जबकि ईरान ने वेनेज़ोएला की क़ानूनी हुकूमत का भरपूर समर्थन किया है, अमेरिका अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का घोर उल्लंघन कर रहा है जबकि ईरान अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का पालन कर रहा है।
अब्दुल बारी अपने आर्टिकल में लिखा कि ईरान, सीरिया और वेनेज़ोएला के विरुद्ध अमेरिकी पाबंदियां बुरी तरह नाकाम हो गई हैं, ईरान के तेल के जहाज़ों का वेनेज़ोएला के समंदर में दाख़िल होना अमेरिका की ऐतिहासिक शिकस्त की बेहतरीन मिसाल है।
पूरी दुनिया देख रही है कि पिछले चालीस सालों से अमेरिका किस तरह एक के बाद एक कड़ी पाबंदियां लगा कर ईरान को कमज़ोर बनाने में लगा हुआ है, उसका केवल एकमात्र लक्ष्य रहा है कि किसी भी तरह ईरान को और वहां की जनता को दिमाग़ी तौर से उलझनों में रखा जाए जिससे वह शिक्षा, स्वास्थ, साइंस, टेक्नोलॉजी, उद्योग, व्यापार और इस जैसे अनेक क्षेत्रों में आगे न बढ़ सकें, लेकिन ईरान की जनता ने वहां की लीडरशिप के नेतृत्व में हर क्षेत्र और हर मैदान में ऊंचाइयों को छू कर इतिहास रचा है, फिर चाहे वह ड्रोन बना कर हो या अमेरिकी ड्रोन उतार कर, नई नई बीमारियों के वैक्सीन और दवा बना कर हो या सैटेलाइट को फ़िज़ा में भेज कर, नए नए अविष्कार कर के हो या आत्मनिर्भर हो कर।
अब अमेरिका की हालत ऐसी हो चुकी है कि लगता है कि वह ख़ुद अपना दुश्मन हो चुका है, क्योंकि वह हर देश में घुस कर अपनी दादागिरी करते हुए वहां की अर्थव्यवस्था और व्यापार को चौपट करने पर तुला हुआ है।
और आश्चर्य उन देशों पर होता है जो चुपचाप अमेरिका की इस दादागिरी पर उसकी ग़ुलामी करते हुए उसके अपराध में शामिल हो जाते हैं जबकि अफ़ग़ानिस्तान, सीरिया, इराक़ में मज़लूमों की चीख़ों पर भी उनके कान अमेरिका के अपराध पर खड़े नहीं होते।
और कितने देश तो ऐसे हैं जहां अमेरिका ने इस्राईल की मदद से बर्बाद कर दिए इसी तरह उसके घिनौने जुर्म की पूरी दास्तान है।
और अब जबकि दुनिया देख रही है अमेरिका हो या इस्राईल इनकी उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है, एक के बाद एक क्षेत्र में हार का मुंह देखना पड़ रहा है उसके बावजूद कई देश उसकी ग़ुलामी से पीछे नहीं हट रहे हैं।
और अब वह दिन भी दूर नहीं जब अली का लाल ग़ैबत के पर्दे से आएगा और इन साम्राज्यवादी ताक़तों को जड़ से उखाड़ फेकेंगा।

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