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लेबनान और इराक में फिर ज़लील हुए आले सऊद और संयुक्त अरब अमीरात

इराक में प्रदर्शनकारियों को भड़काने में अल-अरबिया और हदीस की भी अहम भूमिका थी। इस वजह से, इराकी सरकार ने इराक में अल-अरबिया और हदीस की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया, और इस तरह लेबनानी और इराकी सरकार ने सऊदी अरब और यूएई की साजिशों को नाकाम कर दिया।

विलायत पोर्टल : प्राप्त जानकारी के अनुसार लेबनान के प्रतिरोधी दल हिज़्बुल्लाह और इराक के शक्तिशाली स्वंयसेवी दल हश्दुश शअबी को टार्गेट कर इन दोनों देशों में जारी सुधारवादी प्रदर्शनों को पथभ्रमित अपने एजेंटों द्वारा हिंसक बनाने के प्रयास और इन देशों में असंती एवं आरजकता फैला कर  जनाक्रोश को हिज़्बुल्लाह और हश्दुश शअबी के विरुद्ध मोड़ने की साज़िश में मुंह की खानी पड़ी है
अंतर्राष्ट्रीय मामलों की एक रिपोर्ट के अनुसार, इराक और लेबनान में सार्वजनिक प्रदर्शनों की समीक्षा करने के बाद,पता चला है कि इराक और लेबनान के खिलाफ सऊदी अरब और यूएई में गहरी और गहन साजिशें चल रही हैं। इराक और लेबनान में सार्वजनिक प्रदर्शनों की निगेटिव रिपोर्टिंग में यह दोनों देश महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
 इराक और लेबनान में सार्वजनिक प्रदर्शनों की शुरुआत से ही इराक और लेबनान में राजनीतिक दल एवं  अधिकारी शांति और सुरक्षा के साथ सुधार पक्षधर थे, और इन  प्रदर्शनों को जनता का अधिकार मानते हैं और सार्वजनिक मांगों को पूरा करने के लिए, दोनों देशों के अधिकारियों ने महत्वपूर्ण कदम उठाने का फैसला किया।
 विरोध प्रदर्शन के दौरान, सऊदी अरब मीडिया, विशेष रूप से अल-अरबिया और हदीस ने विरोध प्रदर्शनों को अलग रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की कोशिश की, और यह दिखाने की कोशिश की कि हिज़्बुल्लाह, लेबनान और हशदुश् शअबी के लोगों ने आम लोगों जैसे कपड़े पहने हुए थे तथा वह प्रदर्शनकारियों पर हमला कर रहे हैं
आले सऊद और उसके घटक देशों के अधीनस्थ मिडिया ने इन प्रदर्शनों को हिज़्बुल्लाह विरोधी प्रदर्शनों  में बदलने की हर संभव कोशिश की
जबकि हिज़्बुल्लाह और हश्दुश शअबी ने आरम्भ में ही इन प्रदर्शनों और प्रदर्शनकारियों की मांगों का समर्थन किया और उन्हें वैध बताते हुए सऊदी अरब और संयुक्त राज्य अमेरिका की साज़िशों पर पानी फेरते हुए जनाक्रोश को हिज़्बुल्लाह या हश्दुश शअबी के विरुद्ध भुनाने के प्रयासों को विफल कर दिया।
इराक में प्रदर्शनकारियों को भड़काने में अल-अरबिया और हदीस की भी अहम भूमिका थी। इस वजह से, इराकी सरकार ने इराक में अल-अरबिया और हदीस की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया, और इस तरह लेबनानी और इराकी सरकार ने सऊदी अरब और यूएई की साजिशों को नाकाम कर दिया।
सूत्रों के अनुसार, सऊदी अरब ने प्रदर्शनकारियों को इराक और लेबनान में बड़े पैमाने पर वित्तीय सहायता प्रदान की तथा अपने एजेंटों के माध्यम से हिंसा फ़ैलाने की कोशिशे भी की
बगदाद और बैरूत में स्थित सऊदी दूतावास ने इस संबंध में  नकारत्मक भूमिका निभाई, जबकि अमेरिकी दूतावास ने भी इस संबंध में सऊदी अरब और यूएई को पर्याप्त सहायता प्रदान की। कुछ स्रोतों के अनुसार, सऊदी अरब पडोसी देश पाकिस्तान में मुल्ला फज़लुर रहमान द्वारा चलाये जा रहे स्वतंत्रता मार्च की फंडिंग कर रहा है तथा वहां भी बड़ी मात्रा में वित्तीय सहायता  प्रदान कर रहा है और पाकिस्तान में अस्थिरता पैदा करने के लिए अपने प्रयासों को जारी रखे हुए है।
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