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बहरैन, इस्राईल के साथ संबंधों के विरोध में 17 राजनैतिक दलों एवं धार्मिक संगठनों ने कमर कसी

इन दलों ने बयान जारी करते हुए कहा कि कुछ अरब देशों ने पहले भी अवैध राष्ट्र से समझौते किए हैं लेकिन उन से फिलिस्तीन को कभी कोई फायदा नहीं पहुंचा। बहरैन की जनता इस समझौते को स्वीकार नहीं करती हमारे पूर्वज हमेशा फिलिस्तीन के वफादार रहे हैं हम फिलिस्तीन के साथ इस विश्वासघात को स्वीकार नहीं करेंगे।

विलायत पोर्टल :  अरब देशों के शासकों में जहाँ इस्राईल से अपनी निकटता एवं मधुरता साबित करने की हुड से मची है वहीं अरब जनता में आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है जो किसी भी समय अरब देशों की स्थिति को बदल सकता है।
 संयुक्त अरब अमीरात के बाद अब बहरैन में भी 17 से अधिक राजनैतिक दलों एवं धार्मिक तथा सामाजिक संगठनों ने आले खलीफा तानाशाही के विरोध के लिए कमर कस ली है।
इन दलों ने बयान जारी करते हुए कहा कि कुछ अरब देशों ने पहले भी अवैध राष्ट्र से समझौते किए हैं लेकिन उन से फिलिस्तीन को कभी कोई फायदा नहीं पहुंचा। बहरैन की जनता इस समझौते को स्वीकार नहीं करती हमारे पूर्वज हमेशा फिलिस्तीन के वफादार रहे हैं हम फिलिस्तीन के साथ इस विश्वासघात को स्वीकार नहीं करेंगे।
आले खलीफा की अवैध राष्ट्र इस्राईल से सांठगांठ फिलिस्तीन के लिए बहरैनी जनता की वफादारी और समर्थन को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकती।

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