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हज़रत ज़हरा स.अ. और विलायत की हिफ़ाज़त आयतुल्लाह ख़ामेनई की निगाह में

अहलेबैत अ.स. से दिली लगाव मुसलमानों की मुश्किलों को आसान बना देता है और ज़िंदगी में इज़्ज़त और तरक़्क़ी मिलती है।

विलायत पोर्टल : हज़रत ज़हरा स.अ. उस हस्ती का नाम है जिसकी ज़ात के लिए ताज़ीम और एहतेराम को हर शख़्स चाहे आज के दौर का हो चाहे कई सौ साल पहले का हो सभी ने वाजिब समझा है।
और हमारे दौर के आख़िरी इमाम ने तो उन्हें आइडियल कह कर याद करते हुए फ़रमाया: पैग़म्बर स.अ. की बेटी की सीरत हमारे लिए आइडियल है, ज़ाहिर है इमाम मासूम की ज़बान से निकले हुए यह लफ़्ज़ हर किसी के लिए नहीं हो सकते उसके लिए वजूद का पाक होना और हर तरह के कमाल का वजूद में होना ज़रूरी है।
आज 21वीं सदी में दुनिया के सभी देश इस बात को समझ पाए हैं कि बेटियां और औरतें भी मर्दों की तरह आगे बढ़ सकती हैं और नई नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकती हैं लेकिन यही बात क़ुरआन में अल्लाह ने औरतें भी मर्दों की तरह बराबर की भागीदार हैं इसे बयान कर दिया था और न केवल क़ुरआन ने बयान किया बल्कि अहलेबैत अ.स. ने उसे अपनी ज़िंदगी में कर के भी दिखाया।
याद कीजिए वह दौर जब बेटियों को बोझ समझा जाता था और पैदा होने के बाद ज़िंदा दफ़्न कर दिया जाता था उसी दौर में अल्लाह ने पैग़म्बर स.अ. को बेटी अता की और आपने उनकी इतनी इज़्ज़त और सम्मान किया कि अरब की सोंच बदल गई, आप उनके आने पर खड़े हो जाते थे अपने बराबर में बिठाते थे, यही नहीं शहज़ादी ने भी बेटी का फ़र्ज़ एक मां की तरह निभाया और पैग़म्बर स.अ. ने आपको बाप की मां का लक़ब दिया।
 आयतुल्लाह ख़ामेनई का कहना है कि अहलेबैत अ.स. से दिली लगाव मुसलमानों की मुश्किलों को आसान बना देता है और ज़िंदगी में इज़्ज़त और तरक़्क़ी मिलती है।
आपने हज़रत ज़हरा स.अ. की मुबारक ज़िंदगी पर रौशनी डालते हुए कहा कि उनकी ज़िंदगी एक हक़ीक़ी लीडर, एक बे मिसाल बीवी और मां की शक्ल में दुनिया के मुसलमान औरतों के लिए आइडियल हैं।
आपने हज़रत ज़हरा स.अ. की मानवी ज़िंदगी के बारे में फ़रमाया: आम इंसानों की अक़्लें और उनकी समझ उनकी मानवी ज़िंदगी तक नहीं पहुंच सकतीं, आपने कहा, शहज़ादी ने ऐसे वक़्त में इमाम अली अ.स. के हक़ के लिए आवाज़ उठाई जब कोई उनके हक़ के लिए बोलने की हिम्मत नहीं कर रहा था आप मस्जिद तशरीफ़ ले गईं और ख़ुतब ए ग़र्रा की सूरत में इमाम अली अ.स. और उनके हक़ की पूरी तरह हिफ़ाज़त की।
आयतुल्लाह ख़ामेनई ने हज़रत ज़हरा स.अ. की विलायत की हिफ़ाज़त की अहमियत बयान करते हुए कहा पैग़म्बर स.अ. की बेटी का विलायत का देफ़ा और उसकी हिफ़ाज़त करना इतिहास का अज़ीम हिस्सा है जिसके बारे में इमाम ख़ुमैनी र.ह. ने भी इस हक़ीक़त पर रौशनी डाली है।
आयतुल्लाह ख़ामेनई ने हज़रत ज़हरा स.अ. को एक मुकम्मल इस्लामी ख़ातून का नाम दिया और कहा कि हमारी मुसलमान औरतों को उनकी ज़िंदगी के अलग अलग पहलुओं से सीख हासिल करनी चाहिए।
सुप्रीम लीडर ने शहज़ादी को एक अच्छी बीवी और एक महान मां क़रार दिया और औरतों की घरेलू ज़िम्मेदारी की तरफ़ इशारा करते हुए फ़रमाया कि हज़रत ज़हरा स.अ. ने अपने मुबारक दामन में पाक हस्तियों को तरबियत की है।
उन्होंने पश्चिमी देशों में औरतों के ग़लत इस्तेमाल करते हुए कहा कि पश्चिमी देशों में औरतों को घरों में काम करने के हवाले से अपमानित किया जाता है जबकि औरतें ही समाज को ख़ूबसूरत बनाने वालों की घरों में तरबियत कर सकती हैं।
रहबर ने पश्चिमी देशों में औरतों को मर्दों के मुक़ाबले में समान हुक़ूक़ के हवाले से कहा कि कि इस्लाम के दृष्टिकोण से औरतों के मर्द के बराबर हुक़ूक़ का मतलब उनको अल्लाह की तरफ़ से दी गई सलाहियतों और क़ाबलियतों का समाज में सही इस्तेमाल करना है।

(19 मार्च 2017)  
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