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हज़रत मूसा अ.स. का असा वापस आ गया!!

आयतुल्लाह ख़ामेनई ने ट्रंप को ज़लील कर के सबको उसकी असली औक़ात दिखा दी और दुनिया वालों को बता दिया कि ट्रंप की ईरान के विरुद्ध गीदड़ भपकी के पीछे ईरान से निवेदन छिपा था।

विलायत पोर्टलः 13 जून की सुबह तेहरान में फ़िरऔन के दौर का इतिहास दोहराया गया, कुछ हज़ार साल पहले उस दिन जब फ़िरऔन ने हज़रत मूसा के मुक़ाबले में सारे जादूगरों को जमा कर लिया था, उस समय जादूगरों ने जितना जादू सीखा था सारा का सारा इस्तेमाल कर डाला था, एक तरफ़ फ़िरऔन अपने दरबारियों के साथ और दूसरी तरफ़ मिस्र की जनता लाइन में खड़े हो कर उस दिन होने वाली घटना को टकटकी बांध कर देखने के लिए तैयार थे, हज़रत मूसा ने कहा कि जो कुछ तुम्हारे थैलों में है उसे बाहर निकालो, जादूगरों ने अपने जीत के ख़्याल से पहले से उन जादू की हुई रस्सियों और लकड़ियों को ज़मीन पर फेक दिया, जो कुछ उन्होंने फेका था वह वहां मौजूद लोगों की निगाह में सांप बिच्छू..... की शक्ल में ज़ाहिर हुआ, जादूगर ख़ुशी से झूमने लगे और चिल्ला चिल्ला कर कहने लगे फ़िरऔन की इज़्ज़त की क़सम हम जीत गए, अब हज़रत मूसा की बारी थी ताकि अपनी रिसालत को ज़ाहिर करें, "और हमने मूसा की तरफ़ वही नाज़िल की कि अपना असा फेक दें, और फिर उस (असा) ने अचानक उनके बनाए हुए जादू को निगलना शुरू कर दिया"। (सूरए आराफ़, आयत 117)

सारे जादूगर सजदे में गिर पड़े और कहने लगे "हम आलमीन के रब पर ईमान लाए जो मूसा और हारून का रब है" (सूरए आराफ़, आयत 121-122)

अगर ट्रंप अपने दिमाग़ के किसी दूर के कोने में यह सोंच लेता कि ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत का दरवाज़ा खोलने के लिए इस्लामी इंक़ेलाब के लीडर आयतुल्लाह ख़ामेनई से निवेदन करने का नतीजा इग्नोर करने और मुंह तोड़ जवाब की शक्ल में मिलेगा कि "मैं ट्रंप को जवाब देने के लायक़ नहीं समझता और उसे न तो अभी जवाब दूंगा न बाद में" तो वह कभी जापान के प्रधानमंत्री को वार्तालाप का निवेदन पत्र लेकर नहीं भेजता।

ईरान के सुप्रीम लीडर का ट्रंप को यह जवाब इस हालत में है कि जब ट्रंप कुछ साल से और विशेष रूप से हालिया कुछ महीनों के दौरान बार बार घमंड के नशे में चूर रहा है कि पाबंदियों से पड़ने वाला दबाव ईरान को बातचीत करने पर मजबूर कर देगा।

आयतुल्लाह ख़ामेनई ने ट्रंप को ज़लील कर के सबको उसकी असली औक़ात दिखा दी और दुनिया वालों को बता दिया कि ट्रंप की ईरान के विरुद्ध गीदड़ भपकी के पीछे ईरान से निवेदन छिपा था।

ऐसा पहली बार नहीं हुआ कि जब हमारे मूसा के असा ने फ़िरऔनियों के जादू पर पानी फेरा हो और न यह आख़िरी बार है।

सुप्रीम लीडर ने ट्रंप की ईरान के विरुद्ध गीदड़ भपकियों का पर्दाफ़ाश कर के जो कुछ इमाम ख़ुमैनी र.अ. अमेरिका के बारे में फ़रमाया करते थे उसे साबित कर दिया है और इंटरनेशनल कोर्ट का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।

इमाम ख़ुमैनी र.अ. अमेरिका को बूढ़े शेर जैसा बताते हुए कहते थे कि एक ऐसा शेर है जिसके बस में कुछ नहीं होता, वह जब दुश्मन के मुक़ाबले आता है तो उसे डराने शोर मचाता है और उसी दौरान अपनी दुम भी हिला रहा होता है ताकि कोई बीच बचाव करने वाला उसे हलाकत के भंवर से बचा सके।

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