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सेंटकाम ख़तरनाक मुसीबत में फंस गया....

जो हालात हम पिछले 1 महीने से देख रहे हैं उसके अनुसार अगर हर दिन बढ़ती हुई यह तकरार और यह टकराव युद्ध तक पहुंच गया तो मध्य पूर्व से परमाणु शक्ति और यूरेनियम ऊर्जा का निकलना बंद हो सकता है, इसलिए ऐसी परिस्तिथि में केवल अमेरिका और उसके सहयोगी ही नहीं बल्कि पूरा विश्व इस संकट का सामना करने पर मजबूर होगा।

विलायत पोर्टलः 

Sputink Iran ने अपने एक लेख में लिखा:

अमेरिकी दावे के अनुसार ग्लोबल हॉक ड्रोन उसके आधुनिक तकनीक से बने विमानों में से एक है, यह ड्रोन हर तरह के राडार सिस्टम को पार करने की क्षमता रखता है, 65 हज़ार फ़ीट की ऊंचाई और तेज़ गति से उड़ने वाले इस ड्रोन को कभी ट्रैक नहीं किया जा सकता और न ही इसे रक्षा प्रणाली द्वारा मार गिराया जा सकता है, बड़ी आसानी से कहा जा सकता है कि इस ड्रोन को मार गिराने का मतलब है कि ईरान के पास ऐसी ऐसी मिसाइलें मौजूद हैं जो अमेरिका की डिफेंस टेक्नोलॉजी की पोल खोल देते हैं।

लेकिन इस सारी घटनाक्रम में जो बात ध्यान देने वाली है बल्कि ड्रोन मार गिराने से भी अधिक महत्व है वह यह है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम से बाहर होने से लेकर अब तक अमेरिका और उसके सहयोगी देश इलाक़े में युद्ध के हालात पैदा करने पर तुले हुए हैं जिसका प्रभाव पूरे विश्व पर पड़ रहा है, चाहे वह प्रभाव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापार पड़ रहा हो या किसी दो देशों के बीच आपसी सहमति और संबंध पर पड़ रहा हो, लेकिन युद्ध जैसे हालात से पूरा विश्व प्रभावित है।

जो हालात हम पिछले 1 महीने से देख रहे हैं उसके अनुसार अगर हर दिन बढ़ती हुई यह तकरार और यह टकराव युद्ध तक पहुंच गया तो मध्य पूर्व से परमाणु शक्ति और यूरेनियम ऊर्जा का निकलना बंद हो सकता है, इसलिए ऐसी परिस्तिथि में केवल अमेरिका और उसके सहयोगी ही नहीं बल्कि पूरा विश्व इस संकट का सामना करने पर मजबूर होगा।

शायद ईरानियों को भी नहीं पता था कि किस टेक्नोलॉजी से भरपूर ड्रोन उनकी सरहद में उड़ रहा है लेकिन वायरल होने वाली ख़बरों के अनुसार जिसमें से एक हाल ही में अभी इस्राइल के न्यूज़ पेपर में भी छापी है यह ख़्याल पैदा होता है कि अमेरिका ईरान पर सैन्य कार्रवाई कर के युद्ध का अभ्यास कर सकता है इसलिए ईरान में इस ख़बर की वजह से हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है कि अगर कोई चिड़िया भी उनकी सरहद में आ गई तो वह भी ईरानी सेना का निशाना बन जाएगी।

इसी तरह यह भी अनुमान लगाया जा रहा है कि इस ड्रोन का मक़सद हर संभावित हमले की सूरत में ईरान के रक्षा सिस्टम को चेक करना था, लेकिन यह भविष्यवाणी नहीं की गई थी कि ईरानियों के पास किस तरह के हथियार मौजूद हैं और वह अपनी रक्षा के लिए किस हद तक तैयार हैं।

दूसरी अहम बात जो इस सारी प्रतिक्रिया में ध्यान देने से समझ में आती है वह यह कि अगर ईरानी अमेरिका के इस आधुनिक तकनीक से बने ड्रोन को मार गिरा सकते हैं तो अब अगर यह न भी कहें कि सब के सब अमेरिकी सैन्य विमान मार सकते हैं तो फिर भी बहुत सारे अमेरिकी सैन्य विमान ईरान की सीमा में दाख़िल नहीं हो सकते, इसलिए यह बात तय है कि अमेरिका का वायु बल जो हर युद्ध में उसकी कामयाबी का हथियार है अगर युद्ध हुआ तो अमेरिका उससे वंचित रह जाएगा।

इसलिए कि जो इतने आधुनिक ड्रोन को मार सकता है वह पायलट विमान को भी मार गिराने में सक्षम है।

इसी तरह यह इशारा भी मिलता है कि ईरानी सेना के जनरल ने जो बात कही है कि उनके पास ऐसे गाइडेड मिसाइल मौजूद हैं जो अमेरिकन बेड़ों को नष्ट कर सकती हैं, हो सकता है कि यह मिसाइल उस मिसाइल की फोटो कॉपी न हो बल्कि हक़ीक़त में ईरान के पास ऐसी टेक्नोलॉजी वाले मिसाइल मौजूद हैं जो अमेरिकी युद्धपोत का नाम और निशान मिटा कर रख दें।

थोड़ा आसान शब्दों में कहने दीजिए:

यह सेंटकाम (ऐशिया और उत्तरी अफ़्रीक़ा में तैनात अमेरिकी सेंट्रल कमांडर) के लिए एक ख़तरनाक मुसीबत है।

अब वह ज़माना ख़त्म हो चुका जब अमेरिकी सेना ईरान को धमकाए अब ईरान है जिसने सेंटकाम के दिल में भय कूट कूट कर भर दिया है।

इलाक़े में जो अमेरिकी सेना का अड्डा बना कर बैठे हैं अब उन्हें आंखें खोल कर सो जाना चाहिए इसलिए कि कहीं ऐसा न हो वह ईरान की शक्तिशाली सेना का शिकार हो जाएं।

अमेरिकी यह बात अच्छी तरह जानते हैं कि अगर उनकी वायु और जल सेना मुक़ाबला करने में नाकाम रहती है तो उनकी थल सेना ईरानी थल सेना का उनकी अपनी ही सीमा में मुक़ाबला करने की बिल्कुल भी हिम्मत नहीं रखती क्योंकि ईरानी थल सेना की हिम्मत और उनका हौसला इतिहास में मौजूद है।

ईरान और इराक़ के युद्ध के दौरान जब इराक़ी सैनिक ईरानी सीमा में घुस कर जंग कर रहे थे और जब ईरानी सैनिकों ने इराक़ की सीमा में प्रवेश कर युद्ध लड़ा तो दोनों में बहुत अन्तर था।

इस समय देखना यह होगा क्या ट्रंप भी यही चाहता है? यानी वह एक युद्ध शुरू करना चाहता है और अपने सैनिकों का ताबूत घर ले जाना चाहता है?

क्या वह सच में इस काम के लिए तैयार है कि अमेरिकी सेना के ख़ून के बदले में फ़ारस की खाड़ी के अरब देशों से तेल का सौदा करे?

हालांकि सबको यह बात पता है कि आज हम इलाक़े में जिन हालात का सामना कर रहे हैं उन हालात को पैदा करने की केवल एक वजह है और वह है अमेरिका का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समझौते पर अमल न करना है।

अमेरिकीयों के राष्ट्रपति ने यह अनुमान लगा रखा था कि वह ज़्यादा सैन्य बल के मालिक हैं और ईरानियों को अपनी चौधराहट से डरा धमका सकते हैं लेकिन ज़ाहिर में इसका उल्टा हो चुका है, यह ईरानी हैं जो अब जिनसे अमेरिका और उसके सहयोगी कई बार मुंह की खा चुके हैं।

यह घटना केवल अमेरिका के लिए ही नहीं बल्कि खाड़ी में मौजूद उसके सहयोगियों के लिए भी एक संदेश है।

अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को 24 घंटे रेडी रहना चाहिए क्योंकि "शेर कभी भी मुस्कुराने के लिए दाँत नहीं दिखाता"

https://sptnkne.ws/mGGY

हुज्जतुल इस्लाम मौलाना मोहम्मद कुमैल शहीदी साहब


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