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शबे 15 शाबान के आमाल

यह बहुत बरकत वाली रात है, इमाम जाफ़र सादिक़ अ.स. फ़रमाते हैं कि इमाम बाक़िर स.अ. से जब इस रात के बारे में पूछा गया तो आपने फ़रमाया कि यह रात शबे क़द्र के अलावा सारी रातों से अफ़ज़ल है इसलिए इस रात अल्लाह से क़रीब होने की कोशिश करनी चाहिए,

विलायत पोर्टलः 

** शबे 15 शाबान की फ़ज़ीलत- रोज़ी तक़सीम होने और उम्र तय होनी रात है।

** हज पर जाने वालों के नाम लिखे जाने की रात है।

** क़बील-ए- बनी कल्ब की बकरियों के बालो से ज़्यादा तादाद में गुनहगारों के माफ़ होने की रात है।

** फ़रिश्तों के ज़मीन पर नीज़िल होने की रात है। (पैग़म्बर स.अ. की हदीसों का मफ़हूम)

** यह बहुत बरकत वाली रात है, इमाम जाफ़र सादिक़ अ.स. फ़रमाते हैं कि इमाम बाक़िर स.अ. से जब इस रात के बारे में पूछा गया तो आपने फ़रमाया कि यह रात शबे क़द्र के अलावा सारी रातों से अफ़ज़ल है इसलिए इस रात अल्लाह से क़रीब होने की कोशिश करनी चाहिए, इस रात अल्लाह अपने बंदों पर फ़ज़्ल और करम फ़रमाता है और उनके गुनाह को माफ़ करता है, अल्लाह ने क़सम खाई है कि वह इस रात हराम और गुनाह से सिलसिले से किए जाने वाले सवाल के अलावा किसी भी हाथ फैलाने वाले को ख़ाली हाथ वापस नहीं लौटाएगा।

अल्लाह ने जिस तरह शबे क़द्र को पैग़म्बर स.अ. के लिए बनाया उसी तरह यह रात ख़ास कर हमारे लिए बनाई है इसलिए इस रात में ज़्यादा से ज़्यादा अल्लाह की हम्द और तारीफ़ करना चाहिए और दुआ और मुनाजात में समय गुज़ारना चाहिए।

** इस रात शब बेदारी की फ़ज़ीलत

नमाज़, दुआ और इस्तेग़फ़ार के लिए शब बेदारी करना बहुत सवाब रखता है जैसाकि इमाम सज्जाद अ.स. ने फ़रमाया जो शख़्स इस रात अल्लाह की इबादत के लिए बेदार रहे उसके दिल को उस दिन मौत नहीं आएगी जब सारे लोगों के दिल मुर्दा हो जाएंगे।

** इस रात की नमाज़

चार रकअत नमाज़ है जिसकी हर रकअत में सूरए हम्द के बाद सूरए तौहीद पढ़ा जाए और नमाज़ मुकम्मल होने के बाद एक दुआ पढ़ी जाए जिसे मफ़ातीहुल जेनान पेज न. 337 पर पढ़ा जा सकता है।

इस रात का सबसे बेहतरीन अमल इमाम हुसैन अ.स. की ज़ियारत है कि जिससे गुनाह माफ़ होते हैं, जो शख़्स यह चाहता है कि एक लाख चौबीस हज़ार नबी उससे मुसाफ़ेहा करें तो वह कभी इस ज़ियारत को पढ़ना न भूले।

** शबे 15 शाबान इमाम हुसैन अ.स. की ज़ियारत

मफ़ातीहुल जेनान पेज न. 875 पर मौजूद ज़ियारत पढ़ें इसी तरह ज़ियारते वारेसा के पढ़ने का भी बहुत सवाब है।

जो अहम दुआएं इस रात पढ़ने के लिए किताबों में मौजूद हैं उन्हें शैख़ अब्बास क़ुम्मी र.ह. ने मफ़ातीहुल जेनान में जमा किया है जिसे पेज 328, 329 और पेज न. 330 पर पढ़ा जा सकता है।

** इसी तरह अगर इस तसबीह: “सुब्हानल्लाहे वल हमदो लिल्लाहे वल्लाहो अकबर व ला इलाहा इल्लल्लाह” को पढ़ कर दुआ करे तो अल्लाह उसके पिछले गुनाहों को माफ़ कर देता है और दुनिया और आख़ेरत की हाजतों को पूरा करता है। 

इमाम जाफ़र सादिक़ अ.स. से पूछा गया कि इस रात के लिए बेहतरीन दुआ कौन सी है तो आपने फ़रमाया इस रात नमाज़े इशा के बाद दो रकअत नमाज़ पढ़े जिसमें पहली रकअत में सूरए हम्द के बाद सूरए काफ़ेरून और दूसरी रकअत में सूरए हम्द के बाद सूरए तौहीद पढ़े और सलाम के बाद 33 बार सुब्हानल्लाह 33 बार अलहम्दोलिल्लाह और 34 बार अल्लाहो अकबर पढ़े, इसके बाद एक दुआ जो मफ़ातीहुल जेनान पेज 331-334 पर है उसे पढ़े, फिर जब यह सारी नमाज़ और दुआ पूरी हो जाएं तो सजदे में जाकर 20 बार या रब, 7 बार या अल्लाह, 7 बार ला हौला व ला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाह, 10 बार माशा अल्लाह और 10 बार ला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाह पढ़े।

फिर पैग़म्बर स.अ. और उनकी आल अ.स. पर सलवात पढ़ कर अपनी हाजतें अल्लाह की बारगाह में बयान करे, इमाम अ.स. फ़रमाते हैं ख़ुदा की क़सम अगर किसी की हाजतें बारिश की बूंदों के बराबर भी हों तो अल्लाह अपने बे पनाह फ़ज़्ल और करम से इस अमल की बरकत के नतीजे में उसको पूरा करेगा।

इसके अलावा इस रात के आमाल में जिन चीज़ों की ज़िक्र किया गया है वह इस तरह हैं.....

** सदक़ा देना।

** रिश्तेदारों से अपनी ग़लतियों की माफ़ी मांगना।

** गुनाहों से तौबा करना।

** नमाज़े जाफ़रे तय्यार पढ़ना।

** दुआए नुदबा पढ़ना।

** दुआए कुमैल पढ़ना।

** किसी मोमिन की परेशानी दूर करना।

** ज़ियारते आले यासीन पढ़ना।

** इमाम ज़माना अ.स. से वादा करना कि अपने अख़लाक़ और किरदार में बहुत जल्द बदलाव लाएंगे।

** बार बार दुआए इमाम ज़माना अ.स. पढ़ना।

** दुआए फ़रज पढ़ना।

** नमाज़े इमाम ज़माना अ.स. पढ़ना।


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