Code : 968 76 Hit

वहाबी आंदोलन की संरचना

वहाबी उलेमा लोग अपनी क्लासों द्वारा लोगों को अपने विचारों अनुसार दीनी अहकाम और दूसरी मालूमात देते हैं, इस श्रेणी के लोगों को क़तर, कुवैत और सऊदी जैसे देशों से वेतन मिलता है, केवल यही नहीं बल्कि इनको मस्जिद, मदरसा, दूसरे दीनी इदारे बनाने, मैगज़ीन छापने और उसको लोगों तक पहुंचाने के लिए इन देशों से रक़म मिलती है

विलायत पोर्टलः वैसे तो वहाबियों का सार्वजनिक कोई भी देश नहीं है लेकिन वहाबियों के मुफ़्तियों और उलमा द्वारा लगातार छिप छिप कर पूरी दुनिया में तबलीग़ जारी है और उन सबके सऊदी से गुप्त संबंध हैं जहां से उन्हें विशेष सुविधाएं मिलती हैं।

इस टोले में 5 तरह की श्रेणी के लोग पाए जाते हैं जिनको इस लेख में बयान किया जा रहा है।

  1. सबसे निचले क्रम में स्वयंसेवक हैं जो वहाबियों की मस्जिदों में जा कर मुफ़्तियों और अपमें जा कर मुफकिया जा रहा है।ते बैंने आलिमों की तक़रीर को सुनते हैं, आमतौर पर इस गिरोह के लोग अधिक पढ़े लिखे नहीं होते इनकी मिसाल जानवर की पूछ जैसी है, इस से अधिक इनका कोई रोल नहीं है।
  2. उसके ऊपर स्थानीय कार्यक्रता हैं, जो पिछले गिरोह को देखते हुए पढ़े लिखे होते हैं जो किसी भी तरह के प्रदर्शन की व्यवस्था और किताबों और मैगज़ीन को बांटने का काम करते हैं, इसी तरह एक और इनका अहम काम चंदा जमा करके उसका हिसाब अपने से ऊपर वालों को पहुंचाना होता है।
  3. इसके बाद वहाबी आलिमों का नंबर आता है, यह लोग अधिकारी की हैसियत रखते हैं, यह लोग मस्जिदों में जुमे का ख़ुत्बा देते और पांच वक़्त की नमाज़ पढ़ाते और साथ ही पास पड़ोस के मदरसे और दीनी इदारों में लोगों को पढ़ाते हैं, यह लोग अपनी क्लासों द्वारा लोगों को अपने विचारों अनुसार दीनी अहकाम और दूसरी मालूमात देते हैं, इस श्रेणी के लोगों को क़तर, कुवैत और सऊदी जैसे देशों से वेतन मिलता है, केवल यही नहीं बल्कि इनको मस्जिद, मदरसा, दूसरे दीनी इदारे बनाने, मैगज़ीन छापने और उसको लोगों तक पहुंचाने के लिए इन देशों से रक़म मिलती है, और इस अधिकारिक पद पर वही लोग लाए जाते हैं जो इन्हीं देशों की यूनिवर्सिटी के पढ़े होते हैं, हालांकि इस श्रेणी के लोगों में कट्टरता नहीं पाई जाती है लेकिन कभी कभी इनमें से भी कुछ लोग और ऊंचा पद पाने के लिए कट्टरता दिखा देते हैं।
  4. इसके ऊपर की श्रेणी में सऊदी के रियाद शहर में एक संगठन है जिसका नाम इदारतो हयअतिल बुहूस वल-दावतो वल-इरशाद कि जिसको आमतौर पर हयअतुद-दावा कहा जाता है, जिसकी एक शाखा कुवैत में जमिय्यतो एहयाईत-तोरास और मक्के में राबिततुल आलमिल इस्लामी नाम से है, वहाबियत के सभी उच्च अधिकारी इस संगठन में शामिल हैं, और यह वहाबियों का सबसे बड़ा और अहम संगठन है जिसका काम अपने से नीचे क्रम में काम करने वालों की माली मदद करना, सभी वहाबी यूनिवर्सिटी की गतिविधियों पर नज़र रखना, उनकी हर ज़रूरत को पूरा करना, बड़े बड़े मदरसों में पढ़ने आने वाले लोगों से मिलना और उनको अपने विचारों अनुसार उनकी ज़िम्मेदारी का एहसास दिलाना है, और सबसे अहम यह बात की पूरी दुनिया में वहाबियों के जितने चैनल और मैगज़ीन हैं उन सबको यही संगठन संभालता और उस पर कड़ी निगरानी रखता है, ताकि कब किस तरह का फ़तवा और कैसे छापना और चैनल से ऐलान करना है इन लोगों को बता सके, इस संगठन की सऊदी हुकूमत और बड़े बड़े वहाबी व्यापारी फ़ंडिंग करते हैं, यह और बात है इतनी कड़ी निगरानी और इतने बड़े बजट देने के बावजूद आले सऊद जिस तरह से काम चाहते हैं उस तरह से काम करने में अब तक यह संगठन नाकाम रहा है।
  5. सबसे उच्च श्रेणी में आले शैख़ यानी मोहम्मद इब्ने अब्दुल वहाब की औलाद हैं, आले शैख़ और आले सऊद की सांठ गांठ किसी से ढ़की छिपी नहीं है, यही कारण है कि सऊदी में आले शैख़ के बाद आले सऊद ही को सबसे अधिक सम्मान दिया जाता है, सऊदी में क़ानून मंत्री, सर्वोच्च मुफ़्ती और अल-दावा नामी वहाबियत के मुख्यालय का अध्यक्ष आले शैख़ के ख़ानदान ही का होता है और इस ख़ानदान से केवल उसी को चुना जाता है जो आले सऊद का वफ़ादार हो, इसी तरह आलवे सऊद का भी हर वह तानाशाह जो सत्ता में आता है उसका आले शैख़ का वफ़ादार होना ज़रूरी है।

वहाबियों की इन पांच श्रेणी में से किसी भी का भी हो उसकी मुख्य ज़िम्मेदारी अपने लोगों को शिया अक़ीदों और उनके विचारों से बचाना है, यानी इस पूरे संगठन की निगाह में हर चीज़ से अधिक इनके लिए शिया और उनके विचार ख़तरा हैं।

आश्चर्य इस बात पर है कि इस संगठन को शिया फ़िर्क़े के अक़ीदों का डर इस हद तक है कि वह शिया दुश्मनी में पूरे इस्लामी जगत के सबसे बड़े दुश्मनों से हाथ मिलाए हुए उनके बराबर में खड़े हैं।

1
शेयर कीजिए
फॉलो अस
नवीनतम