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वहाबियों के काले कारनामे (3)

सिपाहे सहाबा के यह जल्लाद पालतू एजेंट हर दिन इमाम हुसैन अ.स. के चाहने वालों को शहीद करते हैं, और विशेष रूप से विशेष व्यक्तियों को चुन चुन कर निशाना बना रहे हैं, और और ऐसे जवान टारगेट किलिंग का शिकार हो रहे हैं कि जो भविष्य में शिया समुदाय के काम आ सकते हैं।

विलायत पोर्टलः
अफ़ग़ानिस्तान में अत्याचार
1994 ईस्वी के अंतिम महीनों में तालिबान नाम के एक शख़्स ने अफ़ग़ानिस्तान में घुस कर फ़ितना और आतंकी गतिविधि फैलाना शुरू कर दी जिस को पाकिस्तान, सऊदी अरब और हर बुराई की जड़ अमरीका की ओर से इसको हर तरह की सपोर्ट मिल रहा था, इसी तरह धीरे धीरे इन साम्राज्यवादी ताक़तों ने उसे मज़बूत किया कि 3 साल बाद 1997 में अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल पर हमला कर के उस पर क़ब्ज़ा कर लेता है, उसके बाद शिया और सुन्नी मुसलमानों के क़त्ले आम की तैय्यारी शुरू करता है, लाखों मुसलमानों के ख़ून से होली खेलता है, इसी मौत के खेल के चलते अफ़ग़ानिस्तान कई दहाई पीछे चला जाता है, आप सभी के लिए उसके मौत के खेल के कुछ मिसाले पेश कर रहे हैं।
1999 ईस्वी में पेशावर की एक कांफ़्रेंस में 1 लाख 60 हज़ार कुछ कट्टर सुन्नी और वहाबियों ने जमा हो कर एकमत हो कर फ़तवा जारी किया कि शिया मर्दों में जो भी 7 साल से अधिक उम्र का है उसका क़त्ल वाजिब है और उनकी औरतों लड़कियों और 7 साल से कम के लड़कों को क़ैद कर लो, इन बिके हुए जाहिल वहाबी मुफ़्तियों के फ़तवे के बाद तालिबान द्वारा शियों बड़ी क्रूरता से क़त्ले आम जारी हो गया।
1999 ही में मज़ार शरीफ़ में इन्हीं वहाबियों ने ख़ुद छतों पर चढ़ कर और आम नागरिगों को नीचे खड़ा कर के गोली मार दी, और उसके बाद अस्पतालों में जा कर शिया ज़ख़्मियों को गोली मार कर शहीद कर दिया, और फिर 2 दिन के बाद सभी शिया लाशों का ऐसे ही ढ़ेर लगा दिया जिसे जंगली जानवरों तक ने नोचा।
इसी प्रकार इन वहाबियों ने मेमना में शियों के महल्ले में घुस कर बहुत सारे मर्दों, औरतों और बच्चों को एक जगह क़ैद कर के उन पर तेल डाल कर आग लगाई।
पाकिस्तान में अत्याचार
पाकिस्तान में 1979 से सौर पाहे सहाबा के गठन के बाद से आज तक हज़ारों क्या लाखों के क़रीब पैग़म्बर की आल और उनके घराने से मोहब्बत रखने वालों और उनके हक़ को ज़ाहिर करने वालों को इन्हीं आतंकी संगठन सिपाहे सहाबा और लश्करे झंगवी ने पाकिस्तान के अलग अलग इलाक़ों में बड़ी बेरहमी और क्रूरता से क़त्ल कर रहे हैं।
सिपाहे सहाबा के यह जल्लाद पालतू एजेंट हर दिन इमाम हुसैन अ.स. के चाहने वालों को शहीद करते हैं, और विशेष रूप से विशेष व्यक्तियों को चुन चुन कर निशाना बना रहे हैं, और और ऐसे जवान टारगेट किलिंग का शिकार हो रहे हैं कि जो भविष्य में शिया समुदाय के काम आ सकते हैं।
इन वहाबियों ने इंसानियत को क़त्ल करने के साथ साथ बहुत सारी ऐतिहासिक और धार्मिक इमारतों को भी नष्ट किया जिन से बहुत सारे मुसलमानों की आस्था और अक़ीदत जुड़ी हुई है, जिन में से कुछ को हम यहां ज़िक्र कर रहे हैं।
1.ओहद में हज़रत हमज़ा की मज़ार और उनके नाम से बनाई गई मस्जिद।
2.उम्मुल मोमेनीन हज़रत ख़दीजा की मज़ार।
3.पैग़मबरे इस्लाम स.अ. की मां के मज़ार को।
4.इमाम अली अ.स. के वालिद हज़रत अबू तालिब के मज़ार को।
5.पैग़मबर और इमाम अली अ.स. के दादा जनाब अब्दुल मुत्तलिब के मज़ार को।
6.जद्दा में हज़रत हव्वा के मज़ार को।
7.बैजुल-अहज़ान को (जिस में हज़रत ज़हरा स.अ. अपने वालिद को याद करके रोतीं थीं)
8.मदीना में सलमान नामी मस्जिद को।
9.मक्का में हज़रत ज़हरा स.अ. के घर को।
10.मदीने में पैग़म्बर के उस घर को जिस में हिजरत के समय आ कर रुको थे।
11.मुसलमानों द्वारा जंगे ख़ंदक़ में खोदी गई ख़ंदक़ को।
12.यसा नबी के मज़ार को।
13.अल-हासा में उस मस्जिद को जिसमें मस्जिदुन-नबी के बाद सबसे पहले जुमा पढ़ा गया।
14.अल-हासा ही के एक गांव के इलाक़े में अब्बास इब्ने अली अ.स. के नाम की मस्जिद को।
15.पैग़म्बरे इस्लाम स.अ. के पैदा होने वाली जगह के।
16.उम्मुल मोमेनीन हज़रत ख़दीजा के मक्के वाले घर को।
17.मदीना में मस्जिदुश- शम्स को, जहां पैग़म्बर ने मोजिज़ा दिखाया था।
18.पैग़म्बर के चचा हज़रत हमज़ा के घर को।
19.अरक़म के घऱ को, जहां बेसत के बाद पैग़म्बर अपने असहाब के साथ बैठते थे।
20.बद्र की जंग के शहीदों के मज़ार को, और उस जगह को जो उस जंग में पैग़म्बर के लिए विशेष रूप से बनाया गया था।
21.इमाम अली अ.स. के उस घर को जिसमें इमाम हसन अ.स. और इमाम हुसैन अ.स. पैदा हुए थे।
22.मदीना शहर के आस पास की दीवार को।
23.मदीना में इमाम जाफ़र सादिक़ अ.स. के घर को।
24.मदीना में बनी हाशिम के पूरे महल्ले को।
25.मक्का में अल-मोअल्ला नामी क़ब्रिस्तान जिस में पैग़म्बरे इस्लाम स.अ. और अहले बैत अ.स. के बहुत से असहाब दफ़्न थे।
26.कई बार जन्नतुल बक़ी के क़ब्रिस्तान को।
27.जन्नतुल बक़ी में दफ़्न हुए इमामों के मज़ार को।
ध्यान देने वाली बात यह है कि एक ओर से इस्लामी ऐतिहासिक और धार्मिक जगहों को यह वहाबी नष्ट कर रहें हैं और उन्हें ढ़हा रहे हैं, दूसरी ओर यही ज़ायोनी के पालतू मदीना में यहूदियों की ऐतिहासिक जगहों और चीज़ों को धमकी से भरे साइन बोर्ड लगा कर बचा रहे हैं।



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