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लब्बैक या हुसैन अ.स. यानी दुनिया के सारे ज़ालिमों से जंग का ऐलान

पूरी दुनिया में कहीं भी इतनी बड़ी तादाद में लोग जमा नहीं होते यह केवल इमाम हुसैन अ.स. और उनके साथियों का बलिदान है जिसमें इतनी सच्चाई और गहराई थी जिसके चलते पूरे विश्व से न केवल लोग जमा होना शुरू हो गए बल्कि कोई 80 कोई 100 कोई 200 यहां तक कि 500 किलोमीटर तक का पैदल सफ़र तय कर के लब्बैक या हुसैन अ.स. का नारा लगा कर ज़ालिम के ख़िलाफ़ जंग अभी भी जारी है इस बात का ऐलान करते हैं।

विलायत पोर्टलः अक़्ल और इश्क़ के सफ़र की शुरूआत हो चुकी है, पूरी दुनिया से इंसानियत का दर्द रखने वाले ज़ुल्म की जड़ें उखाड़ कर इंसानयित को बचाने वाले पैग़म्बर स.अ. के नवासे इमाम हुसैन अ.स. की बारगाह में हाज़िरी देकर एक बार फिर से ज़ुल्म के ख़िलाफ़ ख़ामोश न बैठने का वादा करने के लिए पहुंच रहे हैं।

पूरी दुनिया में कहीं भी इतनी बड़ी तादाद में लोग जमा नहीं होते यह केवल इमाम हुसैन अ.स. और उनके साथियों का बलिदान है जिसमें इतनी सच्चाई और गहराई थी जिसके चलते पूरे विश्व से न केवल लोग जमा होना शुरू हो गए बल्कि कोई 80 कोई 100 कोई 200 यहां तक कि 500 किलोमीटर तक का पैदल सफ़र तय कर के लब्बैक या हुसैन अ.स. का नारा लगा कर ज़ालिम के ख़िलाफ़ जंग अभी भी जारी है इस बात का ऐलान करते हैं।

इसी बात की तरफ़ आसतानए क़ुद्से रज़वी के प्रबंधक हुज्जतुल इस्लाम इब्राहीम रईसी ने अरबईन के मौक़े पर पैदल चल कर जाने वाले ज़ायरीन के ख़ादिमों की ख़ुदा हाफ़िज़ी के प्रोग्राम में लब्बैक या हुसैन अ.स. के मतलब को समझाते हुए कहा कि लब्बैक या हुसैन अ.स. यानी दुनिया के सारे ज़ालिमों और उनके ज़ुल्म और अत्याचार के ख़िलाफ़ हमेशा रहने वाली जंग, उन्होंने कहा लब्बैक या हुसैन अ.स. की आवाज़ इमाम हुसैन अ.स. के आंदोलन और हर ज़ुल्म के ख़िलाफ़ जंग और अपमान और गुनाह से दूरी का नाम है।

इमाम रज़ा अ.स. के हरम से कर्बला इमाम हुसैन अ.स. के ज़ायरीन की ख़िदमत के लिए जाने वाले लोगों के बीच होने वाले प्रोग्राम में हुज्जतुल इस्लाम सैयद रईसी ने अरबईन के मौक़े पर पैदल जाने वाले ज़ायरीन के अहलेबैत अ.स. से इश्क़ और मोहब्बत की तरफ़ इशारा करते हुए कहा कि लोगों का ऐसा जुनून केवल पैग़म्बर स.अ. के ख़ानदान से उनका इश्क़ और मोहब्बत के अलावा कुछ और नहीं है और उन्होंने इसे उन ज़ायरीन के ईमान की मज़बूती बताते हुए कहा कि मुसलमानों में जो भी इमाम हुसैन अ.स. से इश्क़ और सच्ची मोहब्बत रखते हैं वह दुनिया के सबसे फ़ज़ीलत वाले लोग हैं, यह वह लोग हैं जो हुसैनी मिशन की पैरवी करते हुए आज़ादी चाहते हैं और ज़ुल्म के ख़िलाफ़ ख़तरों से भरे रास्ते को तय करते हैं और बेशक यह दुनिया के सबसे इज़्ज़त वाले लोग हैं।

ईरान के बड़े राज्य ख़ुरासान के हौज़-ए-इल्मिया के अहम रुक्न ने इस बात पर ज़ोर देते हुए कहा कि इस मानवी सफ़र पर जितने लोग भी जा रहे हैं उन लोगों में जो एक सामान्य बात है वह मासूमीन अ.स. से इश्क़ और मोहब्बत है।

उन्होंने ज़ियारते अरबईन के मक़सद को इंसानों की इस दुनियावी ज़िंदगी का आशूर और इमाम हुसैन अ.स. के साथ आख़ेरत की ज़िंदगी से संबंध बताते हुए कहा कि आशूरा के साथ संबंध हक़ीक़त में इंसानी अच्छाईयों के साथ संबंध है और हुसैनी मिशन के साथ इस संबंध को बचाए रखना बिल्कुल वैसा है जैसे अल्लाह की तालीमात और इंसानियत के हर दौर में और हर नस्ल के साथ किस तरह ज़िंदगी गुज़ारना है इस संबंध को बाक़ी रखना।

इमाम रज़ा अ.स. के रौज़े के प्रबंधक ने अरबईन के मौक़े पर पैदल चलने वालों के सफ़र को इंसानियत का सबसे शानदार सफ़र जाना है और इस सफ़र और दूसरे सफ़र में फ़र्क़ बताते हुए कहा कि यह सफ़र इस वजह से दुनिया में सबसे अलग है चूंकि यह सफ़र अल्लाह उसके रसूल स.अ. और अहलेबैत अ.स. से इश्क़ और मोहब्बत का नतीजा है, और इस ज़मीन पर इमाम हुसैन अ.स. के चेहेल्लुम से ज़्यादा अज़ीम और शानदार ऐसा कोई प्रोग्राम नहीं होता जिसमें इतनी तादाद में लोग जमा होते हों।

हुज्जतुल इस्लाम सैयद इब्राहीम रईसी ने ईरान के इस्लामी इंक़ेलाब को हुसैनी मिशन की बरकत बताते हुए कहा कि इस इस्लामी इंक़ेलाब से इस देश में हुसैनी मिशन ज़ाहिर हुआ है और ईरानी अवाम की पैरवी करते हुए बहुत सारी क़ौमों और देशों में बेदारी आई और उन्होंने इमाम हुसैन अ.स. के रास्ते को अपनाया, लेबनान, फ़िलिस्तीन, बहरैन, यमन...... के लोगों ने यह सीखा कि हमेशा ज़ुल्म के मुक़ाबले आवाज़ उठाने और डट जाने से ही आज़ादी और सम्मान मिलता है।

उन्होंने कुछ साल पहले सामर्रा में किए गए आतंकी हमले की ओर इशारा किया जिसमें कई ईरानी और भी कई देशों के ज़ायरीन शहीद हुए थे, और कहा कि आतंकवादी और ज़ालिम और साम्राज्यवाद जो इन आतंकियों को ऐसा करने के लिए पैसे देते हैं इनका सोंचना यह है कि हम इन धमाकों और आतंकी हमलों से इमाम हुसैन अ.स. के चेहेल्लुम की रौनक़ को कम कर सकते हैं, हालांकि वह भी जानते हैं कि इतिहास गवाह है कि ऐसे कायराना हमलों से हुसैनियों के इरादों में और ज़्यादा मज़बूती आई है, और मुझे यक़ीन है कि इमाम हुसैन अ.स. का चेहेल्लुम का मंज़र हर साल की तरह इस साल भी अज़ीम और देखने के क़ाबिल होगा।

इमाम रज़ा अ.स. के रौज़े के प्रबंधक ने आख़िर में कहा कि जैसाकि पहले भी यज़ीदियों की यही कोशिश रही है कि इमाम हुसैन अ.स. का नाम मिट जाए, आज भी तकफ़ीरी, दाएशी और दुनिया का साम्राज्यवाद यही चाहता है कि अरबईन का यह शानदार मंज़र ख़त्म हो जाए, क्योंकि वह जानते हैं कि अरबईन का यह मजमा ज़ुल्म और साम्राज्यवाद के ख़िलाफ़ सबसे बड़ा मजमा है।

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