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लगातार गिरते मनोबल को बढाने की कोशिश कर रहा है इस्राईल

इन दिनों अगर आप इस्राईली मीडिया पर नज़र डालें तो आपको जांच रिपोर्टें और समीक्षाएं बड़ी संख्या में नज़र आएंगी जिनमें इस्राईली ख़ुफ़िया एजेंसी मोसाद की ख़ूब तारीफ़ें की गई हैं ताकि इस्राईल के लगातार गिरते मनोबल को दोबारा से बढ़ाया जा सके

विलायत पोर्टल: क्या वजह है कि अचानक मोसाद और उसकी ख़ूबसूरत क़ातिल महिलाओं की ख़बरें मीडिया में आने लगी हैं? क्या योजनाएं लगातार नाकाम होने से ध्वस्त मनोबल को बढाने की कोशिश कर रहा है इस्राईल?

इन दिनों अगर आप इस्राईली मीडिया पर नज़र डालें तो आपको जांच रिपोर्टें और समीक्षाएं बड़ी संख्या में नज़र आएंगी जिनमें इस्राईली ख़ुफ़िया एजेंसी मोसाद की ख़ूब तारीफ़ें की गई हैं और बड़े इस्लामी और अरब नेताओं की हत्या की उसकी ख़ुफ़िया योजनाओं के बारे में बताया गया है।

इन नेताओं में हमास के संस्थापक शैख़ अहमद यासीन से लेकर हिज़्बुल्लाह के महासचिव शहीद अब्बास मूसवी तक शामिल हैं। हद तो यह हो गई कि मोसाद के प्रमुख यूसी कोहीन ने भी जासूसी संस्था की परम्परा को तोड़ते हुए कट्टरपंथी यहूदियों के मुखपत्र समझे जाने वाले अख़बार को इंटरव्यू दिया और कहा कि ईरान की क्रान्ति गार्ड फ़ोर्स आईआरजीसी की विदेशी सेवा की युनिट अलक़ुद्स फ़ोर्स के कमांडर जनरल क़ासिम सुलैमानी की टार्गेट किलिंग की योजना भी बनाई जा सकती है अलबत्ता अभी वह मोसाद की हिट लिस्ट पर नहीं हैं।

कोहीन ने कहा कि हालिया वर्षों में मोसाद के एजेंटों ने हमास के कई नेताओं को विदेशों में विशेष रूप से दुबई और मलेशिया में क़त्ल किया लेकिन हमास ने इन हत्याओं के लिए मोसाद को आरोपी नहीं ठहराया।

इस समय इस बड़े पैमाने पर इस प्रोपैगंड के कई लक्ष्य हो सकते हैं।

सबसे पहला लक्ष्य तो यह है कि यह प्रोपैगंडा करके मोसाद को लगातार मिलने वाली विफलताओं पर पर्दा डाला जाए। मोसाद ने जनरल क़ासिम सुलैमानी और हिज़्बुल्लाह के महासचिव सैयद हसन नसरुल्लाह को क़त्ल करने के लिए बड़ी जटिल योजनाएं बनाई थीं वह नाकाम रहीं, इस्राईल ने दक्षिणी लेबनान में दो ड्रोन विमान भेजकर हिज़्बुल्लाह के बैलिस्टिक मिसाइलों के भंडार को निशाना बनाना चाहा मगर वह दोनों ड्रोन ध्वस्त हो गए। हालिया दिनों लेबनान में कई इस्राईली एजेंटों को पकड़ कर जासूसी के तंत्र को ध्वस्त कर दिया गया।

दूसरा लक्ष्य यह है कि किसी तरह ईरान के नेतृत्व में बनने वाले व्यापक इस्लामी मोर्चे के कमांडरों और नेताओं को डराया जाए जिन्होंने इंटेलीजेन्स के स्तर पर बहुत बड़ी कामयाबियां हासिल की हैं और जासूसी के मैदान में इस्लामी प्रतिरोध मोर्चे का पलड़ा भारी हो गया है। इन दक्ष कमांडरों ने हाल ही में जनरल क़ासिम सुलैमानी की हत्या की योजना को नाकाम बनाया। छह तेल टैंकरों पर इस तरह हमला किया कि अपना कोई सुराग़ नहीं छोड़ा, सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों पर पैनी नज़र रखी और उसकी रक्षा पर तैनात मिसाइल डिफेन्स सिस्टम में बड़ी सफलता से सेंध लगाई।

तीसरा लक्ष्य यह हो सकता है कि मोसाद नए सिरे से टारगेट किलिंग की कार्यवाही शुरू करना चाहती है। न्यूयार्क टाइम्ज़ और यदीऊत अहारोनोत में इंटेलीजेन्स मामलों पर लिखने वाले रोनेन बर्गमैन ने बताया कि टारगेट किलिंग की योजनाएं मौजूद हैं और आने वाले दिनों में इन पर काम शुरू हो सकता है।

इस समय मोसाद के बारे में जो भी प्रोपैगंडा हो रहा है वह इस्लामी प्रतिरोध मोर्चे के नेताओं को डराने की मनोवैज्ञानिक लड़ाई है लेकिन हक़ीक़त यह है कि इस्राईल मनोवैज्ञानिक लड़ाई कई मोर्चों पर हार चुका है। इस्राईल ने दुबई में हमास के महमूद मबहूह को और दमिश्क़ में हिज़्बुल्लाह कि एमाद मुग़निया को क़त्ल किया लेकिन उसके बाद मोसाद बड़े फ़िलिस्तीनी, लेबनानी और ईरानी नेताओं और अफ़सरों में से किसी की भी टारगेट किलिंग नहीं कर सकी।

मोसाद ने समय समय पर कुछ नेताओं और अफ़सरों की हत्या करके अपनी खौफ़नाक और अविश्वसनीय तसवीर बना ली थी वह भी उस समय जब कुछ अरब देशों की सुरक्षा और इंटैलीजेन्स एजेंसियां टूट फूट का शिकार थीं। मगर अब तसवीर बदल चुकी है, इस्लामी प्रतिरोध मोर्चे का उदय हो चुका है और इस मोर्चे से जुड़े संगठन कई जगहों पर सक्रिय हो चुके हैं जबकि इस्राईल से जुड़े अनेक ख़ुफ़िया नेटवर्कों और गुटों को समाप्त किया जा चुका है।

अब वह ज़माना नहीं रहा जब मोसाद अपनी ख़ूबसूरत एजेंटों को जिनमें ज़िपी लिवनी सबसे ज़्यादा मशहूर हैं, भेजकर अरब व इस्लामी देशों के नेताओं को जाल में फंसाती थी और यह महिलाएं उनकी हत्या को आसान बना देती थीं।

मोसाद ने अक़्ल को हैरान कर देने वाले मिशन उस समय पूरे किए जब अरब व इस्लामी देशों में सुरक्षा और इंटेलीजेन्स एजेंसियां इस स्थिति में नहीं थीं कि उसका रास्ता रोकतीं मगर अब इस संस्था पर बुढ़ापा आ गया है। इस्राईली एजेंटों के बयानों से इस्लामी और अरब देशों की एजेंसियों को इस बात का क़ानूनी और नैतिक आधार भी मिल जाता है कि वह जहां भी इस्राईली ख़ुफ़िया एजेंसी के एजेंटों और अफ़सरों को देखें वहीं उन्हें ढेर कर दें।

पारस टुडे

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