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लंदन कोर्ट ने सुनाया फ़ैसला, कहा सऊदी अरब को हथियार बेचना ग़ैर क़ानूनी

ब्रिटेन की एक अदालत ने देश में निर्मित हथियार सऊदी अरब को बेचे जाने के ख़िलाफ़ फ़ैसला सुनाया है, इसलिए कि सऊदी अरब इन हथियारों का इस्तेमाल यमन युद्ध में कर रहा है।

विलायत पोर्टलः गुरुवार को लंदन की अदालत का यह फ़ैसला यमन युद्ध में एक अहम मोड़ साबित हो सकता है और इससे निश्चित रूप से आक्रमणकारी सऊदी गठबंधन को एक बड़ा झटका लगेगा।

ब्रिटेन में बड़ी संख्या में लोगों ने यमन में आम नागरिकों के ख़िलाफ़ इस्तेमाल किए जा रहे ब्रिटिश हथियारों के विरुद्ध अभियान शुरू किया था और आदलत से सऊदी अरब को हथियारों की बिक्री पर रोक की मांग की थी।

सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात मार्च 2015 से यमन के ख़िलाफ़ व्यापक हवाई हमले कर रहे हैं।

अमरीका और पश्चिमी देश इस अवसर का लाभ उठाकर इन अरब देशों को अरबों डॉलर के हथियार बेच चुके हैं, जिसके कारण यमन युद्ध में 1 लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।

कैंपेन अगेंस्ट आर्म्स ट्रेड सीएएटी के एक कार्यकर्ता सैम पेर्लो-फ़्रीमैन ने अदालत के इस फ़ैसले को बहुत महत्वपूर्ण बताया है।

उन्हेंने कहा, लंदन अदालत के इस फ़ैसले के बाद अब हम देखेंगे कि अमरीका और यूरोप में भी सऊदी अरब को हथियार बेचे जाने को चुनौती दी जाएगी।

ब्रिटेन, अमरीका के बाद सऊदी अरब को हथियार बेचने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है।

जब से सऊदी अरब ने यमन के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ा है, ब्रिटेन सऊदी अरब को 6 अरब डॉलर के हथियार बेच चुका है।

ब्रिटेन के निर्यात होने वाले कुल हथियारों का 43 प्रतिशत केवल सऊदी अरब को निर्यात हो रहा है, इसलिए अगर लंदन रियाज़ को हथियारों की आपूर्ति बंद कर देता है तो यह सऊदी अरब के लिए एक बड़ा झटका होगा।

पारस टुडे

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