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मैं15 साल बाद इमाम ख़ुमैनी र.ह. को देखा रहा था

रात हो चुकी थी, क़रीब 9 से 10 के बीच का समय था, सभी लोग थक के अपना काम निपटा कर आराम करने जा चुके थे, मैं अपने कमरे में बैठा काम कर रहा था, अचानक बिल्डिंग के बाहर से कुछ आवाज़ सुनाई दी, जबकि वहां पर कभी किसी का आना जाना नहीं होता था, मुझे लगा जैसे कोई चल रहा है, मैं जब कमरे से निकल कर दरवाज़ा खोल कर बाहर आया तो देखा इमाम ख़ुमैनी र.ह. अकेले हमारी बिल्डिंग की ओर आ रहे हैं, मैं आपको देख कर बहुत भावुक हो रहा था, क्योंकि पिछले 15 साल से आप जिलावतन थे मैंने आपको नहीं देखा था,

विलायत पोर्टलः पुरानी यादों में से एक बहुत दिलचस्प यह है कि उस रात जब इमाम ख़ुमैनी र.ह. तेहरान पहुंचे, शायद आप लोगों को मालूम हो या सुना हो कि आप आने के बाद पहले बहिश्ते ज़हरा स.अ. (यह इमाम ख़ुमैनी र.ह. के मज़ार के पीछे एक क़ब्रिस्तान है जहां इंक़ेलाब के शहीद दफ़्न हैं) गए और वहां तक़रीर की, फिर वहां से हेलीकाप्टर द्वारा वापस चले गए।

कुछ घंटों तक किसी को पता तक नहीं था कि आप कहां गए हैं, उसका कारण यह था कि आप को किसी एकांत जगह जाना था, क्योंकि अगर किसी ऐसी जगह जाते जहां भीड़ होती तो लोग टूट पड़ते और आप को आराम भी न करने देते, क्योंकि सभी इतने दिनों बाद अपने मज़हबी रहनुमा को देखते।

हेलीकाप्टर तेहरान के पश्चिमी दिशा में गया, वहां से आप अपने बेटे आक़ा अहमद के साथ आक़ा नातिक़ नूरी की कार में बैठे, आपने वली-अस्र अ.स. रोड चलने को कहा, वहां आपके किसी रिश्तेदार का घर था, आपको वहां का सही पता मालूम नहीं था किसी तरह पूछते हुए वहां तक पहुंचे, आप पहले से बग़ैर बताए हुए अपने रिश्तेदार के घर पहुंच गए।

आप ने अभी तक नमाज़ भी नहीं पढ़ी थी, सुबह के आए हुए आपको दोपहर हो चुकी थी, 9 बज के कुछ मिनट पर आप बहिश्ते ज़हरा स.अ. पहुंचे थे, तब से अब तक आप ने न कुछ खाया था न आराम किया था, आप अपने रिश्तेदार के यहां गए ताकि पहले नमाज़ पढ़ें और कुछ खाना पीना खा कर थोड़ा आराम कर लें, वहां न आप किसी से कोई बात कर रहे थे और न ही आपके पास कोई जा रहा था, और यहां हम लोगों का जो हाल हो रहा था उसे बयान नहीं किया जा सकता।

कुछ घंटों तक इमाम ख़ुमैनी र.ह. की किसी को कोई ख़बर नहीं थी, फिर पता चला कि आप एक साहब के घर पर हैं और आप ख़ुद ही सबसे मिलने आएंगे वहां कोई नहीं जाएगा।

मैं रेफ़ाह नामी मदरसे में था जिस पर आपके स्वागत की ज़िम्मेदारी थी, यह वही मदरसा था जहां से हम कुछ लोग एक अख़बार निकालते थे, इमाम ख़ुमैनी र.ह. के आने से पहले आपके इंतेज़ार में हम लोगों ने 3-4 अख़ाबर निकाले थे, हम कुछ लोगों की मदद से और भी सामाजिक कामों को करते थे।

रात हो चुकी थी, क़रीब 9 से 10 के बीच का समय था, सभी लोग थक के अपना काम निपटा कर आराम करने जा चुके थे, मैं अपने कमरे में बैठा काम कर रहा था, अचानक बिल्डिंग के बाहर से कुछ आवाज़ सुनाई दी, जबकि वहां पर कभी किसी का आना जाना नहीं होता था, मुझे लगा जैसे कोई चल रहा है, मैं जब कमरे से निकल कर दरवाज़ा खोल कर बाहर आया तो देखा इमाम ख़ुमैनी र.ह. अकेले हमारी बिल्डिंग की ओर आ रहे हैं, मैं आपको देख कर बहुत भावुक हो रहा था, क्योंकि पिछले 15 साल से आप जिलावतन थे मैंने आपको नहीं देखा था, आप के आने की ख़बर आग की तरह फैल गई, एक के बाद एक कमरे से निकल कर लोगों की भीड़ लगने लगी, क़रीब 30 लोग उसी समय जमा हो गए थे, आप जैसे ही अंदर आए लोगों ने आपके हाथ चूमने शुरू कर दिए, कुछ लोग कह भी रहे थे कि आप के पास इतनी भीड़ मत लगाओ आप थके हुए हैं, लेकिन लोग अपने चहीते रहनुमा को 15 साल बाद देख रहे थे।

आपके रुकने के लिए दूसरे फ़्लोर पर कमरा तैय्यार किया गया था, जहां तक मुझे याद है अभी कुछ साल पहले तक वह कमरा उसी तरह ख़ाली आपकी याद के तौर पर मौजूद था, और आप के ईरान वापस आने की तारीख़ पर वहां प्रोग्राम होते हैं, आप ज़ीने से चढ़ कर ऊपर जाने ही वाले थे कि अचानक मुड़ कर हम लोगों की ओर देखने लगे हम सब भी ख़ुश हो कर आपकी ओर देख रहे थे तभी आप वहीं ज़ीने पर बैठ गए, ऐसा लग रहा था कि ख़ुद आपका दिल भी अभी अपने कमरे में जाने का नहीं है, क़रीब 5 मिनट आपने वहीं बैठ कर हम लोगों से बातें की, हमारे कामों की प्रशंसा की और भविष्य में एक अच्छे और मज़बूत सिस्टम की उम्मीद दिलाई फिर आप अपने कमरे की ओर चले गए। (3 फ़रवरी 1998 में कुछ जवानों के बीच आपका बयान)


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