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बाग़े रिसालत का पहला फूल

आपकी सारी उम्र इस्लाम की तबलीग़ और इंसानों की ख़िदमत में गुज़री, और आख़िरकार जोदा बिन्ते मोहम्मद अशअस ने माविया के बहकावे में आ कर आपके ज़हर दे कर शहीद कर दिया, आपका मज़ार जन्नतुल बक़ी के वीरान क़ब्रिस्तान में है जो आज वहाबियों के ज़ुल्म और अत्याचार की निशानी बना हुआ है।

विलायत पोर्टलः 15 रमज़ानुल मुबारक इमाम हसन मुजतबा अ.स. की विलादत की तारीख़ है, इमाम हमन अ.स. पैग़म्बर स.अ. बड़े नवासे और इमाम अली अ.स. और हज़रत फ़ातिमा ज़हरा स.अ. के बड़े बेटे थे, आपके वुजूद में पैग़म्बर स.अ. की बहुत सी नैतिक अच्छाईयां और उनका नेक अख़लाक़ पाया जाता था जैसे सख़ावत, बख़शिश, करम, हैबत (रोब), अज़मत वग़ैरह आपकी मशहूर अख़लाक़ी आदतें थीं।

मदीने या मदीने के बाहर का कोई ग़रीब और फ़क़ीर आपके दरवाज़े से ख़ाली हाथ वापस नहीं जाता, करम और बख़शिश में आपका हाथ इस हद तक खुले हुए थे कि एक बार एक शख़्स मदीने की मस्जिद में आया लोगों के सामने हाथ फैलाया लेकिन उसके ज़रूरत पूरी नहीं हुई, पास ही में हज़रत उसमान बैठे थे उनसे भी अपनी ज़रूरत बताई लेकिन उसकी मुश्किल हल न हो सकी फिर उस फ़क़ीर ने कहा मुझे किसी ऐसे का पता बताईए जो मेरी सारी ज़रूरत पूरी कर सके, उसमान ने इशारा कर के कहा कि वह बुज़ुर्ग हस्ती जो अल्लाह की इबादत कर रही है उनके पास चले जाओ और वह इमाम हसन अ.स. थे।

आपकी सारी उम्र इस्लाम की तबलीग़ और इंसानों की ख़िदमत में गुज़री, और आख़िरकार जोदा बिन्ते अशअस ने माविया के बहकावे में आ कर आपके ज़हर दे कर शहीद कर दिया, आपका मज़ार जन्नतुल बक़ी के वीरान क़ब्रिस्तान में है जो आज वहाबियों के ज़ुल्म और अत्याचार की निशानी बना हुआ है।

अल्लाह की बारगाह में इस मुबारक महीने के सदक़े में दुआ है कि हम सभी को उनकी सीरत पर चलने की तौफ़ीक़ दे.... आमीन

हुज्जतुल इस्लाम आलीजनाब मौलाना मुशाहिद आलम रिज़वी (तंज़ानिया)



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