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बरज़ख़ में इंसान की हालत

बरज़ख़ में इंसान की जगह और उसकी हालत उसके आमाल के हिसाब से तय होगी, अल्लाह के नेक बंदे और शहीद जन्नत जैसी ज़िंदगी गुज़ारेंगे, जैसाकि क़ुर्आन ने शहीदों के बारे में फ़रमाया है कि जो लोग अल्लाह की राह में क़त्ल कर दिए गए उनको मुर्दा मत समझो, वह लोग ज़िंदा हैं और अल्लाह के पास से रोज़ी हासिल कर रहे हैं।

विलायत पोर्टलः इंसान की मौत से ले कर क़यामत के बीच के फ़ासले को बरज़ख़ कहा जाता है, इसको बरज़ख़ इसलिए कहा जाता है क्योंकि बरज़ख़ की ज़िंदगी द्वारा दो अलग ज़िंदगी के बीच का फ़ासला किया जाता है, जिनमें से एक ज़िंदगी इसी दुनिया की ज़िंदगी है जिसके बारे में हम सभी जानते हैं और एक ज़िंदगी आख़ेरत की है, जिसके बारे में क़ुर्आन का कहना है कि वहां की ज़िंदगी में जिस्म यहां जैसे नहीं होंगे बल्कि उसी तरह बदल जाएंगे जिस तरह ज़मीम औप आसमान बदल जाएंगे।

बरज़ख़ में इंसान की जगह और उसकी हालत उसके आमाल के हिसाब से तय होगी, अल्लाह के नेक बंदे और शहीद जन्नत जैसी ज़िंदगी गुज़ारेंगे, जैसाकि क़ुर्आन ने शहीदों के बारे में फ़रमाया है कि जो लोग अल्लाह की राह में क़त्ल कर दिए गए उनको मुर्दा मत समझो, वह लोग ज़िंदा हैं और अल्लाह के पास से रोज़ी हासिल कर रहे हैं। (सूरए निसा, आयत 69)

इसी तरह अल्लाह ने गुनहगारों की हालत को भी बयान किया है कि ऐसे लोग बरज़ख़ के अज़ाब का मज़ा चखेंगे, और यह अज़ाब क़यामत के अज़ाब से अलग होगा क्योंकि इन लोगों पर क़यामत का अज़ाब बरज़ख़ से भी सख़्त होगा, जैसाकि अल्लाह ने क़ुर्आन में फ़रमाया कि बरज़ख़ में अल्लाह इनसे कहेगा कि अपने गुनाहों की वजह से तुम लोग जहन्नम में दाख़िल हो जाओ। (सूरए नूह, आयत 25) 

क़ुर्आन ने फ़िरऔन की हालत को इस प्रकार बयान किया है कि अभी तक हर सुबह हर शाम उस पर बरज़ख़ में अज़ाब नाज़िल होता है।

कहने का मतलब यह है कि इंसान मरने के बाद एक नई दुनिया में जाएगा जिसे बरज़ख़ कहते हैं, इंसान उस दुनिया में क़यामत तक रहेगा और अगर इस दुनिया में आमाल अच्छे हुए तो जन्नत जैसी नेमतें उसे मिलेंगी और अगर उसकी ज़िंदगी गुनाहों में डूबी हुई होगी तो बरज़ख़ में जहन्नम के अज़ाब जैसा मज़ा चखना पड़ेगा।

सबसे अहम बात बरज़ख़ के बारे में यह है कि वहां पर इंसान का आमाल नामा खुला रहता है, जिसका मतलब यह हुआ कि अगर उसने इस दुनिया में नेक और अच्छे काम किए होंगे तो उसको फ़ायदा उसे वहां मिलेगा, उसके नेक आमाल की वजह से उसके अज़ाब में कमी होगी, अगर उसने नेक औलाद तरबियत की होंगी तो उनके नेक कामों का सवाब भी उसे वहां मिलेगा, इसी तरह अगर इस दुनिया में गुनाह किए होंगे या कोई ऐसा बुरा काम किया होगा जिसका असर लंबे समय तर बाक़ी रहे तो उसका गुनाह बरज़ख़ में उसके आमाल नामे में लिखा जाता रहेगा, इसीलिए कहा जाता है कि नेक कामों और बुरे कामों दोनों का असर बरज़ख़ की ज़िंदगी पर पड़ता है।

इसी लिए हम सबके लिए ज़रूरी है कि इस ज़िंदगी में कुछ नेक काम (जैसे नेक औलाद की तरबियत, मदरसे और मस्जिद की तामीर और दूसरे वह काम जिससे आम लोगों का फ़ायदा पहुंचता रहे) अंजाम दें जिनका फ़ायदा हमें बरज़ख़ में पहुंचता रहे।


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