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बच्चों को डांटे नहीं!!

कुछ वालेदैन हमेशा बच्चों पर चिल्लाते हुए और डांटते हुए दिखाई देते हैं ऐसा लगता है जैसे बच्चे उनकी आवाज़ नहीं सुन पा रहे हैं, जब बच्चे शरारत करते हैं या आपस में लड़ते हैं या स्कूल और मदरसे से मिला हुआ होमवर्क नहीं करते तो वालेदैन उनको याद दिलाने के लिए ऐसा चिल्लाते हैं जैसे किसी ओपेरा शो में बैठे हों।

विलायत पोर्टलः आज के दौर में वालेदैन ने बच्चों की तरबियत के लिए मारना तो लगभग कम कर दिया है लेकिन उसकी जगह डांटना, चिल्लाना और अनाप शनाप शब्दों का इस्तेमाल शुरू किया है, जबकि वह यह बात नहीं जानते कि उनका यह चिल्लाना और उल्टे सीधे शब्दों के इस्तेमाल का नतीजा पिटाई से ज़्यादा भयानक हो सकता है।

थोड़े समय का हल लम्बी समस्या का कारण

कुछ वालेदैन हमेशा बच्चों पर चिल्लाते हुए और डांटते हुए दिखाई देते हैं ऐसा लगता है जैसे बच्चे उनकी आवाज़ नहीं सुन पा रहे हैं, जब बच्चे शरारत करते हैं या आपस में लड़ते हैं या स्कूल और मदरसे से मिला हुआ होमवर्क नहीं करते तो वालेदैन उनको याद दिलाने के लिए ऐसा चिल्लाते हैं जैसे किसी ओपेरा शो में बैठे हों।

कभी कभी वालेदैन की यह चीख़ पुकार इतनी ज़्यादा हो जाती है कि वह यह सोंचने पर मजबूर हो जाते हैं और उन्हें महसूस होने लगता है कि उनका बच्चा अब इसका आदी हो चुका है अब जब तक चिल्लाएंगे नहीं तब तक वह सुनेगा नहीं।

बच्चों पर न चिल्लाने की वजह

हालांकि वालेदैन को चिल्लाने के बाद बहुत बुरा महसूस होता है और हक़ीक़त में यह एहसास बिल्कुल उसी तरह का है जो एहसास उन वालेदैन को होता है जो बच्चों को मारते हैं, जैसे बच्चों को मारने के बाद वालेदैन को बहुत बुरा लगता है और वह बाद में ख़ुद अपने आप पर ग़ुस्सा होते हैं, डांटने चिल्लाने के बाद भी बिल्कुल यही एहसास रहता है।

और यह डांटना चिल्लाना भी उस मारने की तरह ही होता है, और डांट के समय इस्तेमाल किए जाने वाले ग़लत शब्द जितने ज़्यादा होंगे उतना ही उसका नकारात्मक प्रभाव बच्चे के ज़मीर और बातिन पर पड़ेगा और वह मानसिक पीड़ा का शिकार रहेगा, पूरे यक़ीन से कहा जा सकता है कि आज के दौर में अधिकतर परिवार में बच्चों पर चिल्लाना उन्हें डांटना एक सामान्य बात हो गई है, कहा जा सकता है कि बच्चों की तरबियत के लिए जो ख़तरनाक और हानिकारक चीज़ें हैं उनकी शुरूआत यही बच्चों पर चिल्लाना है क्योंकि इसी से ही बच्चों की प्रताड़ना का न रुकने वाला सिलसिला शुरू हो जाता है जिसको ख़ुद वालेदैन भी पसंद नहीं करते लेकिन धीरे धीरे इसी ग़ुस्से चिल्लाने और डांटने की वजह से बात बिगड़ती चली जाती है।

जब वालेदैन पूरे ग़ुस्से में बच्चों पर चिल्लाते हैं तो वह अपना आपा खो चुके होते हैं जिसकी वजह से वह ऐसी बातें भी बोल जाते हैं जिसे बोलना नहीं चाहते जिसकी वजह से बच्चे का बातिन और उसकी ज़मीर अपना अपमान महसूस करता है, हालांकि बहुत सख़्त है कि आप बीस बार एक ही बात के लिए अपने बच्चे से कहें जैसे यह कि तुम्हारी किताबें यहां क्यों पड़ी हैं, या यह कि कबसे यह किताबें यहां पड़ी हैं वग़ैरह...

लेकिन आपसे सवाल है कि.....

अगर आप को दुकान से कोई सामान ख़रीदते हुए पता चले कि इसकी पैकिंग सही नहीं हुई है तो क्या दुकानदार पर चिल्लाना शुरू कर देंगे कि तुमको इतनी भी तमीज़ नहीं कि कैसे पैकिंग होती है?

या जिस समय पता चले कि बच्चे की गणित की टीचर ने ठीक से नहीं पढ़ाया तो क्या आप उस पर चिल्लाना शुरू कर देंगे कि तुम्हारा दिमाग़ कहां है ऐसे ही पढ़ाया जाता है वग़ैरह?

ज़ाहिर है कि आपका जवाब नहीं में होगा, तो फिर कैसे आप ख़ुद को इस बात की अनुमति देते हैं कि अपने बच्चे पर चिल्लाएं और उसे डांटें!!!

जिस तरह समाज में आपके ऑफ़िस में किसी पर चीख़ना चिल्लाना बुरा है उसी तरह घर में चिल्लाना बच्चों पर चिल्लाना भी बेहद बुरा है।

कुछ वालेदैन ऐसे भी हैं जो इस समस्या को गंभीरता से समझ चुके हैं और वह अपनी आदत में बदलाव भी कर रहे हैं, वह इस बात को ध्यान में रखे हुए हैं कि अगर उनके बच्चे कभी भी ख़ास कर जवानी में उनसे नाराज़ हो कर उनपर चिल्लाए तब भी वह बच्चों पर नहीं चिल्लाएंगे ताकि अपने बच्चों के लिए वह एक आइडियल बन सकें।

मुमकिन है किसी के दिमाग़ में यह सवाल हो कि डांट के जब कहा जाता है तो उसका असर बच्चों में दिखाई देता है वह तुरंत काम को करते हैं, ऐसे लोगों को यह बात भी ध्यान में रखनी चाहिए कि ठीक है वह असर दिखता है लेकिन बच्चों की रूह और उनके मनोविज्ञान पर इसका नकारात्मक असर इतना ज़्यादा है कि हम और आप सोंच भी नहीं सकते।

अगर बच्चा अभी सही तरीक़े से खाना नहीं खा रहा या कपड़े नहीं पहन पा रहा तो उस पर चिल्ला कर उसकी शख़्सियत को ज़ख़्मी न कीजिए बल्कि वह आपसे हर चीज़ सीखता है आप के हर काम को देख कर उसी तरह करने की कोशिश करता है इसलिए आप अपने कामों को करते समय ध्यान रखें कि अगर आपका बच्चा मौजूद है तो उसको पूरी विनम्रता और सहजता के साथ करें ताकि आपका बच्चा आपसे सीख सके और धीरे धीरे उसी तरह करता जाए और आगे चल कर न डांटने की ज़रूरत पड़े न चिल्लाने की और न ही मारने की।



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