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बच्चों को कैसे अच्छे संस्कार दें

अगर आप चाहते हैं आप के बच्चे आप का अपमान न करें तो आप भी उनका अपमान न करें, अफ़सोस की बात यह है कि कुछ वालेदैन इस अहम बात की ओर ध्यान नहीं रखते और वह ख़ुद बच्चों को कभी सम्मान नहीं देते, उसके दोस्तों और साथियों के सामने उसका अपमान करते हैं और उनसे हमेशा अपने लिए सम्मान चाहते हैं, याद रहे हम जो उसे देंगे वही हमें वापिस मिलेगा।

विलायत पोर्टलः अधिकतर वालेदैन यह सवाल पूछते हैं कि बच्चों से कैसा व्यव्हार करें कि वह अच्छे संस्कार की ओर ही बढ़ें, हम इस लेख में मासूमीन अ.स. की हदीसों और कुछ मनोचिकित्सक द्वारा बताए गए समाधान पेश करेंगे, जिस से हम सभी अपने बच्चों की सही दिशा में तरबियत करके अच्छे संसकार दे सकें।

सम्मान देना

सबसे बुनियादी और बच्चों की तरबियत में प्रभाव डालने और आत्मविश्वास को बढ़ाने वाली चीज़ बच्चे को सम्मान देना है, बच्चा जन्म लेने के बाद सब से पहले अपने परिवार वालों के पास ही रहता है और धीरे धीरे अपने वालेदैन और भाई बहन को पहचानता है।

अगर बच्चा शुरू से अपने परिवार में छोटों को सम्मान पाता हुआ देखता है, बड़ों को छोटों और छोटों को बड़ों का सम्मान करते हुए देखता है, तो वह ख़ुद को सम्मानित महसूस करते हुए दूसरों को भी हमेशा सम्मान देगा।

अगर आप चाहते हैं आप के बच्चे आप का अपमान न करें तो आप भी उनका अपमान न करें, अफ़सोस की बात यह है कि कुछ वालेदैन इस अहम बात की ओर ध्यान नहीं रखते और वह ख़ुद बच्चों को कभी सम्मान नहीं देते, उसके दोस्तों और साथियों के सामने उसका अपमान करते हैं और उनसे हमेशा अपने लिए सम्मान चाहते हैं, याद रहे हम जो उसे देंगे वही हमें वापिस मिलेगा।

छोटे छोटे कामों को उनके हवाले करना

बच्चों को भी बड़ों की तरह घर और उसके बाहर ज़िम्मेदारी का एहसास दिलाना चाहिए, क्योंकि उसे कुछ न कुछ करते रहने की आदत होती है, इसीलिए घर में उसे भी छोटे छोटे काम देना चाहिए, जिस से वह अपने महत्व को समझे और अपने को बेकार न समझे।

इसलिए माँ बाप को घर में बच्चों की आयु को देखते हुए उनको काम बताते रहना चाहिए जिस से उनके अंदर ज़िम्मेदारी का एहसास पैदा हो, बेशक यह काम बच्चों में ख़ुद का महत्व समझने और उनको ज़िम्मेदारी का एहसास दिलाने में मदद करेगा, जिस से वह अपने जीवन के बड़े बड़े कामों को अनुभव और पूरी लगन और ज़िम्मेदारी के साथ करेगा।

अदब का ख़्याल

बच्चों से बात करते समय अदब का ख़्याल रखें चाहे वह अभी छोटा ही क्यों न हो, क्योंकि यह चीज़ भी उनके संस्कारी बनाने में अहम किरदार निभाती है, अफ़सोस कि कुछ वालेदैन इस बात को अहमियत नहीं देते, ख़ास कर बच्चों से बात करते समय अदब का ख़्याल नहीं करते हैं।

वह वालेदैन जिन्हें मान सम्मान चाहिए उनसे मेरा निवेदन है कि, वह अपने बच्चे से एक सम्मानित और सच्चा दोस्त समझ कर बात करें, उनसे अदब से बात करें, जब उनकी ग़लतियों की ओर इशारा करना हो तो बहुत नर्मी और प्यार से बात करें, क्योंकि इस प्रकार आप की बात का प्रभाव अधिक होगा, उनको कभी दोसरों के सामने न डाँटें, क्योंकि इस से उन्हें मानसिक तकलीफ़ होगी, डाँटते समय कभी बुरे शब्दों का प्रयोग न करें, क्योंकि इस से न केवल आपका सम्मान ख़त्म होगा बल्कि बच्चे पर भी बहुत बुरा प्रभाव पड़ेगा और वह भी वही शब्द प्रयोग करेगा।

सही कपड़ों का चयन

बच्चों को संस्कारी बनाने में एक और चीज़ जो अहम प्रभाव डालती है वह उसको अच्छे और साफ़ सुथरे कपड़े पहनाना है, बच्चे बड़ों के अच्छे और साफ़ सुथरे कपड़ों को देख कर चाहता है कि वह भी इसी प्रकार कपड़े पहने, इसीलिए जैसे ही वह नए कपड़े या नए जूते पहनता अपने साथियों को दिखाता है, अगर बच्चा अच्छे और साफ़ सुथरे कपड़े पहनेगा अपने दोस्तों और साथियों को बीच वह सम्मान का एहसास करेगा जिस से वह अपना महत्व समझेगा, और यह काम उसके संस्कार को बढ़ाने में महत्वपूर्ण किरदार रखता, वालेदैन हमेशा अपने बच्चों के कपड़े ख़रीदते समय उनकी पसंद का ध्यान रखें और उसकी आयु के बच्चे किस प्रकार के कपड़ों का चयन करते हैं वैसे ही कपड़े उसके लिए खरीदें।

मशविरा लेना

बच्चे और जवान भी बड़ों की तरह चाहते हैं कि उनसे संबंधित कामों में उनसे मशविरा लिया जाए और वह अपनी भी सलाह दें, और इस काम से उनका महत्व भी बढ़ता है, वालेदैन इस बात का भी ध्यान रखें, यहाँ तक कि ख़ुद पहल करते हुए बच्चों से सलाह माँगे, ताकि वह अपने महत्व को भी समझे और वालेदैन का एहतेराम भी उनकी निगाह में बढ़े, और कोशिश करें उनकी दी गई सलाह पर अमल भी करें, और अगर उसने ग़लत सलाह दी हो तो प्यार से समझाते हुए उसको उसकी सलाह न मानने का कारण बताते हुए संतुष्ट करें, ध्यान रहे उसके मशविरे और उसकी सलाह को बिन दलील के रद न करें क्योंकि इस से वह अपमानित महसूस करेगा, और यह उसकी तरबियत के लिए हानिकारक है।

अदालत का ख़्याल

बच्चों में अदालत और इंसाफ़ की आदत डालें, और ख़ुद भी बच्चों के बीच अदालत और इंसाफ़ का ध्यान रखें किसी प्रकार का भेदभाव न करें, उसको एहसास दिलाएं कि समाज के लिए अदालत कितना महत्व रखती है और छोटे से छोटे काम में भी अदालत का ख़्याल रखना ज़रूरी है।

वादों का पूरा करना

क्योंकि बच्चा अपनी हर चाहत को अपने वालेदैन द्वारा पूरा होते हुए देखता है जिस के कारण उन पर पूरी तरह विश्वास करता है, एक कारण जिस से यह विश्वास हमेशा के लिए बाक़ी रह सकता है वह यह है कि उस से किए गए वादों को पूरा करें, और कभी किसी चीज़ का वादा कर के उसे न तोड़ें।

कठिन दिनों से परिचित कराना

इमाम मूसा काज़िम अ.स. फ़रमाते हैं कि, बच्चों को बचपन में ही कठिन दिनों और समस्याओं से परिचित कराएं ताकि वह बचपन से ही धैर्य और विनम्रता के रास्ते को समझ सकें और कठिन परिस्तिथियों में डटे रहें।

इस्लामी दुनिया के मशहूर आलिम ख़्वाजा नसीरुद्दीन तूसी लिखते हैं, बच्चों में कठिन परिस्तिथियों का सामना करने की आदत डालें, क्योंकि जीवन में आने वाली परेशानियाँ और कठिनाइयाँ उनकी सोंच में निखार लाती हैं, और फिर कठिन परिस्तिथि और मुश्किल को हल कर के जो सुकून और शांति मिलती है उसका अलग ही आनंद है।

प्यार करना

बच्चों को प्यार करना और उनको चूमना, बच्चे से अपनी मोहब्बत का इज़हार करना है, वह वालेदैन के प्यार करने से उनके मन में कितना प्यार है इस बात को समझते हैं, और यह काम वालेदैन की मोहब्बत को उनके दिल में और अधिक बढ़ाएगा।

बच्चों जैसा व्यव्हार

बच्चों से बच्चों जैसा व्यव्हार करना और उन्ही की तरह बातें करना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि बच्चा बच्चों और बच्चे जैसों से बहुत जल्द क़रीब होता है।

सलाम करना

बच्चा बच्चा होने के साथ साथ बड़ों के सम्मान के बारे में सोंचता है, और उसे सलाम करने वालों को सम्मानजनक निगाहों से देखता है, पैग़म्बर फ़रमाते हैं, 5 चीज़े हैं जिन्हें मैं अपनी मौत तक नहीं छोड़ सकता, उनमें से एक बच्चों को सलाम करना है, मैं हमेशा सलाम करता हूँ ताकि मेरे बाद मुसलमानों में यह सुन्नत हमेशा के लिए बाक़ी रहे और सब उस पर अमल करे।

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