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पिछले एक हफ्ते में डोनल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान के सिलसिले से दिए गए बयानों पर एक नज़र, जाने आख़िर क्या है अमरीका के इस असमंजस का रहस्य

ईरान को लेकर वॉशिंगटन की अस्पष्ट और हाई-ड्रामा "अधिकतम दबाव" की नीति का कोई वास्तविक अंत नहीं है, हां दुनिया को और अधिक अस्थिर बनाने के लिए ज़रूर अच्छी है।

विलायत पोर्टलः मंगलवार को अमरीकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने दावा किया कि "शांति की खोज" में मध्यपूर्व में अमरीकी राजनयिक कड़ा प्रयास कर रहे हैं, लेकिन उन्हें ईरान की बहरा कर देने वाली ख़ामोशी का सामना करना पड़ रहा है।

लेकिन पिछले एक हफ्ते के दौरान व्हाइट हाउस की ढुलमुल नीति और विरोधाभासी बयानों को देखते हुए, बोल्टन की कोई बात विश्वास योग्य नहीं है।

हम यहां पिछले गुरुवार से व्हाइट हाउस से दिए गए बयानों पर एक नज़र डाल रहे हैं, जिस दिन ईरान ने फ़ार्स खाड़ी में अमरीका के आधुनिकतम ड्रोन विमान को मार गिराया था।

गुरुवारः डोनल्ड ट्रम्प ने ईरान की इस कार्यवाही को एक बड़ी ग़लती बताते हुए ईरान पर हमले की धमकी दे डाली।

शुक्रवारः ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने 150 ईरानियों की जान की ख़ातिर एक बड़े हमले के आदेश को केवल 10 मिनट पहले वापस ले लिया, लेकिन इसी के साथ बल दिया कि अमरीकी सेना हमले के लिए हर समय तैयार है।

रविवारः ट्रम्प ने धमकी देते हुए कहा, अगर ईरान ने अपना परमाणु कार्यक्रम बंद नहीं किया तो उसे ऐसे विनाश का सामना करना पड़ेगा कि इससे पहले कभी नहीं हुआ होगा। इसी के साथ बोल्टन ने कहा कि ईरान अमरीका की समझदारी को उसकी कमज़ोरी न समझे।  

सोमवारः ट्रम्प ने ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता के ख़िलाफ़ प्रतिबंधों पर हस्ताक्षर कर दिए और विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ पर भी इसी हफ़्ते प्रतिबंध लगाने की बात कही।

मंगलवारः बोल्टन ने कहा, तेहरान के साथ वास्तविक वार्ता के लिए वाशिंगटन का दरवाज़ा खुला हुआ है और ईरान को इस अवसर का लाभ उठाना चाहिए।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह का असमंजस और अनिश्चितता एक अराजक प्रशासन की निशानी है, जहां ट्रम्प के हर पल बदलते विचारों को बाज़ और कबूतर अपनी अपनी ओर खींच रहे हैं।

इसका एक और उदाहरण ईरान में सत्ता परिवर्तन की बोल्टन की काफ़ी पुरानी इच्छा है, जिसका वह हमेशा ही खुलकर इज़हार करते रहे हैं। ईरान के ख़िलाफ़ अधिकतम दबाव की नीति का मूल उद्देश्य भी यही है। लेकिन इसके विपरीत ट्रम्प ने ईरान के साथ बिना किसी पूर्व शर्त के वार्ता की इच्छा जताई और अमरीका की 40 वर्ष पुरानी ईरान में इस्लामी व्यवस्था पलटने की नीति से पीछे हटते हुए घोषणा कर दी कि वह ईरान में सत्ता परिवर्तन नहीं करना चाहते हैं और वर्तमान ईरानी अधिकारियों के साथ ही समस्याओं का समाधान निकालना चाहते हैं।

ईरान अमरीकी अधिकारियों की इन चालों और उनके रवैये से अच्छी तरह से परिचित है, इसीलिए वह जानता है कि वाशिंगटन बोल्टन की धमकियों और ट्रम्प के प्रतिबंधों से आगे बढ़कर उससे सीधे रूप से टकराने का साहस नहीं रखता है।

अमरीका की ईरान नीति पर व्हाइट हाउस के एक पूर्व अधिकारी ने काफ़ी अच्छी टिप्पणी की है। इस अमरीकी अधिकारी का कहना है कि अमरीका की ईरान नीति रणनीति से मुक्त क्षेत्र बन गई है, जिसके कारण वाशिंगटन ने ख़ुद को ही अलग थलग कर लिया है।

पारस टुडे

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