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पत्नी का ध्यान आकर्षित करने के रास्ते हदीस की रौशनी में

हर शौहर की यही इच्छा होती है कि उसकी बीवी उससे अच्छे से पेश आए अच्छा व्यव्हार करे, इसके लिए ज़रूरी है कि शौहर उससे हमेशा नर्म और अच्छे तरीक़े से बात करे, अगर कोई यह सोंचता है कि तेज़ और ऊंची आवाज़ में बात कर के बीवी के ध्यान को अपनी ओर आकर्षित किया जा सकता है तो यह उसकी ग़लत सोंच है

विलायत पोर्टलः पति पत्नी का रिश्ता विश्वास और भावनाओं से जुड़ा हुआ होता है, लेकिन कभी कभी इंसान के जीवन में भावनाएं आहत हो जाती हैं और कुछ दूरियां और खटास सी हो जाती हैं, हम इस लेख में हदीसों द्वारा कुछ ऐसे रास्तों को आपके लिए बयान करेंगे जिन से भावनाओं के आहत होने या हंसती खेलती ज़िंदगी में यह खटास और दूरियां आएं ही न।

औरत की ग़लतियों को माफ़ करना इब्ने अम्मार ने इमाम सादिक़ अ.स. से पूछा कि मौला शौहर पर बीवी के क्या क्या हक़ होते हैं जिनको पूरा कर के वह नेक शौहर में शुमार किया जा सके? इमाम अ.स. ने फ़रमाया उसके खाने पीने का प्रबंध करे उसके कपड़ों का इंतेज़ाम करे और अगर उससे कोई ग़लती हो जाए तो उसको माफ़ कर दे, फिर आपने फ़रमाया मेरे वालिद की एक बीवी थी जो उनको बहुत तकलीफ़ देते थी लेकिन मेरे वालिद उसे माफ़ कर देते थे। (काफ़ी, शैख़ कुलैनी, जिल्द 5, पेज 511) 

इस हदीस के हिसाब से एक अच्छे शौहर की पहचान यह है कि वह अपनी बीवी की ग़लतियों को माफ़ कर देता हो।

ज़ाहिर है दिन भर घर काम बच्चों की देखभाल और कभी कभी तो सास ससुर का ख़्याल रखना इतने सारे कामों के बीच भूल चूक होना स्वभाविक है और बीवी को अपने शौहर से उम्मीद भी यही होती है कि वह उसकी ग़लतियों को माफ़ कर देगा लेकिन अगर शौहर उसकी हर ग़लती पर ग़ुस्सा करेगा तो दोनों के दिलों में दूरी होना तय है।

हमेशा हंस के बात करना पैग़म्बर स.अ. फ़रमाते हैं कि शौहर पर बीवी का हक़ यह है कि उसके खाने पीने का प्रबंध करे, उसके ग़लतियों को अनदेखा करे औक उससे कभी झिड़क कर बात न करे। (मीज़ानुल हिकमत, रय शहरी, जिल्द 4, पेज 284)

इस हदीस में औरत की ग़लती को छिपाने और अनदेखा करने के साथ साथ पैग़म्बर स.अ. ने जिस चीज़ पर ज़ोर दे कर बयान किया है वह बीवी से हंस कर बात करना है यानी उससे कभी झिड़क कर बात न करे और पैग़म्बर स.अ. के लिए यह विषय इतना अहम है कि इसको शौहर पर बीवी का हक़ बताया है।

हर परिस्थिति में सहनशीलता के साथ पेश आना इमाम अली अ.स. फ़रमाते हैं कि अगर ख़ुशहाल ज़िंदगी चाहते हो तो अपनी बीवी की बातों को सहन किया करो और उससे अच्छे से पेश आया करो। (बहिश्ते ख़ानवादे, मुस्तफ़वी, पेज 100)

हर इंसान ख़ुशहाल जीवन चाहता है और उसके लिए मेहनत से कमाया हुआ पैसा भी ख़र्च करने को हर समय तैय्यार रहता है लेकिन सोचिए अगर उसके घर ही में ख़ुशी न मिले तो घर के बाहर वह कैसे ख़ुश रह सकता है इसीलिए इमाम अली अ.स. फ़रमाते हैं कि अगर सुखी जीवन और ख़ुशहाल ज़िंदगी चाहते हो तो बीवी से अच्छे से पेश आओ अगर बीवी की कोई बात पसंद न भी हो तो सहन करो और सही समय पर उसको उसकी ग़लती पर ध्यान दिलाओ।

बीवी से अच्छा व्यावहार पाने के लिए आपका अच्छे से बात करना ज़रूरी इमाम अली अ.स. फ़रमाते हैं कि अपनी बीवी से अच्छे से बात करो ताकि वह तुम्हारे साथ अच्छा व्यव्हार करें। (बिहारुल अनवार, अल्लामा मजलिसी, जिल्द 103, पेज 223)

हर शौहर की यही इच्छा होती है कि उसकी बीवी उससे अच्छे से पेश आए अच्छा व्यव्हार करे, इसके लिए ज़रूरी है कि शौहर उससे हमेशा नर्म और अच्छे तरीक़े से बात करे, अगर कोई यह सोंचता है कि तेज़ और ऊंची आवाज़ में बात कर के बीवी के ध्यान को अपनी ओर आकर्षित किया जा सकता है तो यह उसकी ग़लत सोंच है।

हिंसक और अहंकारी स्वभाव से दूरी ज़रूरी पैग़म्बर स.अ. फ़रमाते हैं हमारी उम्मत के बेहतरीन लोग वह हैं जिनके स्वभाव में अपने बीवी बच्चों के लिए हिंसा और अहंकार न पाया जाता हो बल्कि हमेशा अपने परिवार के लिए मेहेरबान रहे उनपर कभी ज़ुल्म न करे। (हुक़ूक़े ख़ानवादे व मसाएले इज़देवाज, पेज 242)

इस हदीस के बाद कौन पैग़म्बर स.अ. की उम्मत में शामिल होना नहीं चाहेगा।

बीवी का सम्मान ज़रूरी इमाम बाक़िर अ.स. फ़रमाते हैं जिस ने शादी कर ली उसके लिए बीवी का सम्मान करना बेहद ज़रूरी है, क्योंकि वह अब बीवी है उसका हक़ है कि उससे मोहब्बत की जाए और उसका सम्मान किया जाए। (हुक़ूक़े ख़ानवादे व मसाएले इज़देवाज, पेज 208)

इमाम अ.स. की हदीस के अनुसार जिस किसी ने भी शादी के बाद अपनी बीवी से मोहब्बत और उसका सम्मान नहीं किया उसने उसका हक़ अदा नहीं किया और ज़ाहिर है जब इंसान किसी दूसरे इंसान का सम्मान करेगा तो बदले में उसका ध्यान अपनी ओर आकर्षित करेगा और दोनों के बीच मोहब्बत भी बढ़ेगी।


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