Code : 845 13 Hit

त्याग व क्षमा

इस्लाम ने मुसलमानों पर जिन अधिकारों के पालन करने की ताकीद की है उनमें से एक यह भी है कि अगर किसी से कोई ग़ल्ती हो जाए जैसे अगर कोई किसी का अपमान करे या बुरे व्यवहार से पेश आए तो उसकी ग़ल्ती को क्षमा कर दिया जाए और उसके किये की अनदेखी की जाए ना यह कि उसी की तरह दुर्व्यहवार या अपमानजनक शैली अपनी जाए.....

विलायत पोर्टलः इस्लाम ने मुसलमानों पर जिन अधिकारों के पालन करने की ताकीद की है उनमें से एक यह भी है कि अगर किसी से कोई ग़ल्ती हो जाए जैसे अगर कोई किसी का अपमान करे या बुरे व्यवहार से पेश आए तो उसकी ग़ल्ती को क्षमा कर दिया जाए और उसके किये की अनदेखी की जाए ना यह कि उसी की तरह दुर्व्यहवार या अपमानजनक शैली अपनी जाए। 

यह त्याग व क्षमा कर देने की भावना नबियों, इमामों और वलियों की विशेषताओं में से जिसके पालन की समस्त मुसलमानों को ताकीद की गई है।

अमीरूल मोमिनीन हज़रत अली अ. फ़रमाते हैः

شَرُّ النّاسِ مَنْ لایَعفُو عَنِ الزَّلَّهِ وَ لا یَسْتُرُ الْعَوْرَهَ.

सबसे बुरा इंसान वह है जो दूसरों की ग़ल्तियों को क्षमा नहीं करता और दूसरों की कमियों पर पर्दा नहीं डालता।

कुछ लोग सोचते हैं कि बदला लेने और प्रतिशोध की ताक़त होने के बाद अगर किसी की ग़ल्तियों को क्षमा कर दिया जाए या उसकी बुराईयों की अनदेखी की जाए तो उनका अपमान होगा लेकिन वास्तव में यह सोच शैतानी सोच है जिसका लक्ष्य लोगों में नफ़रत व दुश्मनी को बढ़ावा देना है। दूसरों का क्षमा कर देना और उसकी बुराईयों की अनदेखी करने से न केवल इंसान का अपमान नहीं होता बल्कि लोगों में उसका सम्मान बढ़ जाता है और यह उसके अच्छे चरित्र व व्यक्तित्व की निशानी है।

पैग़म्बरे इस्लाम स.अ फ़रमाते हैः

عَلَیْکُمْ بِالْعَفْوِ فَإِنَّ الْعَفْوَ لایَزِیدُ الْعَبْدَ إِلاّ عِزّا فَتَعافُوا یُعِزُّکُمُ اللّه .ُ

तुम पर ज़रूरी है कि त्याग देने व क्षमा करने को अपनी आदत बनाओ चूंकि ऐसा करने वाले का सम्मान बढ़ता है अतः एक दूसरे की ग़ल्तियों को माफ़ कर दो ताकि अल्लाह के पसंदीदा और प्रिय बंदे बन जाओ।

इसलिए त्याग और दूसरों की ग़ल्तियों की अनदेखी न केवल यह कि किसी को छोटा नहीं करती, उसके सम्मान और आदर में वृद्धि का कारण बनती है। इसके अलावा जो भी इस दुनिया में दूसरों की ग़ल्तियों की अनदेखी करता है अल्लाह तआला भी क़यामत के दिन उसकी ग़ल्तियों की अनदेखी करते हुए उसके गुनाहों को माफ़ कर देगा। अल्लाह तआला क़ुरआने करीम में लोगों को क्षमा करने को इंसान के क्षमा किए जाने की भूमिका बयान किया है। 

وَلیَعْفُوا وَلْیَصْفَحُوا أَلا تُحِبُّونَ أَنْ یَغْفِرَ اللّه لَکُمْ وَ اللّه غَفُورٌ رَحیمٌ

एक दूसरे को क्षमा करदो क्या तुम्हें पसंद नहीं कि अल्लाह तुम्हारी ग़ल्तियों को माफ़ कर दे? अल्लाह तआला मेहरबान और अत्यन्त क्षमाशील है।

पस हमारी कोशिश यही होनी चाहिए कि आफ़िस में, दोस्तों के बीच, अपने घर में और बाहर भी लोगों की ग़ल्तियों की अनदेखी करें और उन्हें माफ़ कर दें ताकि दोस्ती और मुहब्बत का माहौल बने।


0
शेयर कीजिए
सम्बंधित लेख
फॉलो अस
नवीनतम