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ज़िंदगी सिसक रही है, नफ़रत से नफ़रत करें

यह हक़ीक़त है कि इंसान का एक दूसरे पर भरोसा और एक दूसरे से मोहब्बत ख़त्म हो चुकी है, रह गया है जो केवल एक दूसरे पर आरोप लगाना और एक दूसरे से नफ़रत करना, जबकि नफ़रत से पहले यह जान लेना ज़रूरी है कि यह नफ़रत इंसान को कहां ले जाकर खड़ी करती और कैसे भँवर और मजधार में ढकेलती है।

विलायत पोर्टल: मौजूदा दौर कहने को तो चांद पर जाने और साइंस और टेक्नोलॉजी की तरक़्क़ी का दौर है मगर हक़ीक़त में इंसान के अख़लाक़ और नैतिक वैल्यूज़ के इम्तेहान का भी दौर है, यह इंसान की बद क़िस्मती नहीं तो और क्या है कि इंसान एक दूसरे की तरफ़ पीठ किए खड़ा है, मोहब्बतें, नेकी, भाईचारा, विनम्रता, मेल मिलाप और एक दूसरे की मदद करना यह सब ख़्वाब बन कर रह गया है, जिसकी बुनियादी वजह नैतिक मूल्यों और आपसी प्रेम का ख़त्म हो जाना है, दुनियावी उलझनों में उलझ कर इंसान ने ख़ुद को इतना गिरा लिया कि ख़ुद के ज़मीर ही का गला घोंट दिया, इंसान ने अपने ज़मीर और बातिन से आने वाली पाक आवाज़ को न केवल सुनना बंद कर दिया बल्कि उस ताक़तवर आवाज़ से बचने के लिए मिट जाने वाली दुनिया के शोर शराबे में इस तरह खो दिया कि आपसी मोहब्बत और ख़ुद को सुधारने और समाज में सुधार लाने के अमल को भूल गया।

यह हक़ीक़त है कि इंसान का एक दूसरे पर भरोसा और एक दूसरे से मोहब्बत ख़त्म हो चुकी है, रह गया है जो केवल एक दूसरे पर आरोप लगाना और एक दूसरे से नफ़रत करना, जबकि नफ़रत से पहले यह जान लेना ज़रूरी है कि यह नफ़रत इंसान को कहां ले जाकर खड़ी करती और कैसे भँवर और मजधार में ढकेलती है।

** नफ़रत एक बीमार जज़्बा है जो इंसान को भी बीमार बना देता है। 

** नफ़रत इंसान के दिल से अच्छे जज़्बों और ख़ूबसूरतियों का गला घोंट देती है बल्कि इंसान के दिल को ही मार देती है।

** नफ़रत दिलों के तोड़ने का काम करती है, और किसी के दिल को तोड़ने को बहुत बड़ा गुनाह कहा गया है। 

** किसी से नफ़रत न करना इंसानियत की जीत है और किसी की नफ़रत से बच निकलना सबसे बड़ी बहादुरी है। 

** नफ़रत करने से इंसान बहुत जल्दी ही बूढ़ा हो जाता है। 

** नफ़रत से हमेशा नफ़रत करें क्योंकि नफ़रत किसी नतीजे तक नहीं पहुंचाती उल्टा इंसान को यह अधूरा कर देती है। 

** हक़ीक़त तो यह है कि इंसान जिससे नफ़रत कर रहा होता है उससे डर रहा होता है। 

** नफ़रत कमज़ोर इंसानों का कमज़ोर जज़्बा है और नफ़रत करने वाला यही जज़्बा लेकर दूसरों को दबाने और नीचा दिखाने की नाकाम कोशिश करता है। 

** नफ़रत करके इंसान अपनी कमज़ोरी का ऐलान करता है। 

** नफ़रत एक ऐसा कारोबार है जिसकी आड़ में नफ़रत करने वाला हक़ और सच को छिपाता है। 

** ऐसे दिमाग़ी मरीज़ों को पहचानिए जो मोहब्बत की आड़ में नफ़रत की ख़ुशी हासिल कर रहे हों क्योंकि वह झूठी मोहब्बत करते ही उसी से हैं जिनसे नफ़रत करना हो। 

** इंसान कभी नफ़रत बो कर मोहब्बत नहीं काट सकता। 

** नफ़रत अहंकार से निकल कर आती है और अहंकार हीन भावना का नतीजा होता है। 

** किसी दूसरे में कमी उसी वक़्त नज़र आती हैं जब आप उससे नफ़रत कर रहे हों। 

** दुनिया में नफ़रत से ज़्यादा नफ़रत करने वाली कोई दूसरी चीज़ नहीं है और ना ही नफ़रत से ज़्यादा कोई बेवक़ूफ़ी वाली चीज़ है। 

इसीलिए नफ़रत से नफ़रत करें, और इस नफ़रत की आग में सिसकती हुई इंसानियत को बचाइए, आपसी भाईचारे, मेल मिलाप और मोहब्बत का कल्चर जो हमारे पूर्वजों की विरासत है उसे बचा के रखिए, और समाज के उन शरारती तत्वों को ख़ुद भी पहचानिए और दूसरों को भी पहचान कराइए जो इस विरासत को हमसे छीन कर हमारे नैतिक मूल्यों को बर्बाद करना चाहते हैं।

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