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ईरान में बाढ़ से भारी तबाही और इस्लामी देशों की ख़ामोशी

यही सैलाब और बाढ़ की तबाही इजराइल या किसी इस्लाम दुश्मन देश में आती तो सारा अरब मदद के लिए पहुंच जाता सारा यूरोप उनके साथ खड़ा होता और उन सारे लोगों की दलील यही होती कि "क्या हुआ मुसलमान नहीं हैं इंसान तो हैं" ज़ाहिर है ऐसे लोगों की निगाह में ईरानी कौन सा इंसान हैं जो उनकी मदद के लिए आगे आएं!!! अजीब दुनिया है

विलायत पोर्टलः ख़ातूने जन्नत की छठी सालाना कान्फ्रे़ंस की तैयारियों में व्यस्त होने की वजह से विश्व स्तर की ख़बर की जानकारी हासिल करने का समय नहीं मिल सका, आज लाहौर के एक क़रीबी दोस्त अल्लामा मोहम्मद नईम नूरी के कहने पर पास में रखे अख़बार को देखा कि कहीं ईरान में बाढ़ और सैलाब से तबाही की कोई ख़बर हो लेकिन मुझे कोई ख़बर पढ़ने को न मिल सकी, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर भी कोई ख़बर रिलीज़ नहीं हुई जिससे इस बड़े हादसे की ख़बर मिल सकती।
पिछले 2 हफ़्तों से ईरान में भारी बारिश के कारण तबाही का सिलसिला जारी है जिसके नतीजे में नदी नहर नाले डैम और समुद्र में तूफ़ान मचा हुआ है, इस भारी बारिश के कारण ईरान के 31 राज्यों में से 15 तबाही का शिकार हैं, यानी आधा ईरान लगभग डूब चुका है, इस बाढ़ से फ़ार्स, गुलिस्तान, ख़ूज़िस्तान, हमदान, लोरिस्तान, किरमान शाह, बुवैर अहमद और चहार महाल बख़्तियारी ज़्यादा प्रभावित हैं, समुद्रों, नदियों, नालों और डैमों से निकलने वाले पानी ने अभी तक मिलने वाली जानकारी के अनुसार 100 से अधिक लोगों की जानें ले ली हैं, हज़ारों की तादाद में लोग ज़ख़्मी और बे घर हो चुके हैं, लोरिस्तान के 77 गांव बहुत बुरे हाल में हैं, कुछ गांवों का ज़मीनी रास्ता तक बंद हो चुका है, जिन जगहों पर सैलाब ने भारी तबाही मचाई है वह गुलिस्तान राज्य का शहर आक़ क़ुला है, खुज़िस्तान राज्य के शहर ख़ुर्रमाबाद का क़रीबी कस्बा दिलफ़ान है, इसी तरह लोरिस्तान राज्य के भी एक शहर का बहुत बुरी तरह तबाह हुआ है, फ़ार्स राज्य के मशहूर ऐतिहासिक शहर शीराज़ में भी भारी तबाही हुई है यहां 19 लोग सैलाब में मारे गए हैं, क़ुम राज्य एक बहुत बड़ा इल्मी और रूहानी मरकज़ जहां इमाम अली रज़ा अ.स. की बहन हज़रत फ़ातिमा मासूमा स.अ. का मज़ार है उसी के क़रीब से गुज़रने वाला एक छोटा दरिया भी उफ़ान पर है, 1 अप्रैल को यज़्द और नाएन में भी तूफ़ान ने बहुत तबाही मचाई थी।
इस बड़ी प्राकृतिक आपदा और चैलेंज से निपटने के लिए ईरान अकेला है, उसे इस्लामी जगत और इस्लामी देशों से कोई मदद हासिल नहीं है, जर्मन और इराक़ के कुछ निजी इदारों के अलावा बाक़ी कोई उनकी मदद के लिए नहीं आया, इस्लामी देश और पूरी इस्लामी दुनिया तो वैसे भी ईरान को एक शिया देश और शिया हुकूमत समझती है और उनके लिए शिया काफ़िर हैं! ईरानी इंसान ही कहां हैं कि कोई उनके दुखों पर कोई आंसू बहाए! ईरान कौन सा इस्लामी देश है जो इस्लामी उम्मत उसकी मदद करे!
यही सैलाब और बाढ़ की तबाही इजराइल या किसी इस्लाम दुश्मन देश में आती तो सारा अरब मदद के लिए पहुंच जाता सारा यूरोप उनके साथ खड़ा होता और उन सारे लोगों की दलील यही होती कि "क्या हुआ मुसलमान नहीं हैं इंसान तो हैं" ज़ाहिर है ऐसे लोगों की निगाह में ईरानी कौन सा इंसान हैं जो उनकी मदद के लिए आगे आएं!!! अजीब दुनिया है
जो अमेरिका का विरोधी हो वह मुसलमान रहता है इंसान नहीं, उसकी कोई किस बुनियाद पर मदद करे, बेहद अफ़सोस की बात है!!! ईरान बहुत बुरे हालात से गुज़र रहा है और इस पागल हाथी (अमेरिका) ने ऐलान किया है कि हम ईरान पर पाबंदियां और ज़्यादा बढ़ाने की सोच रहे हैं, यह कितना बड़ा ज़ुल्म है कि अमेरिका ने ईरानी रेड क्रॉस के अकाउंटस भी बंद कर दिए हैं ताकि कोई बाहर से मदद न कर सके, इस बड़े ज़ुल्‍म पर सभी को आवाज़ उठानी चाहिए, इंसानी हुक़ुक़ की बात का ढिंढोरा पीटने वाले क्यों चुप हैं??!!
ताज़ा जानकारी के अनुसार 5000 घर पूरी तरह तबाह हो चुके हैं और 25000 घर प्रभावित हैं, हज़ारों एकड़ तैयार फ़सलें तबाह हो चुकी हैं।
केवल जर्मन ने मदद का ऐलान किया है, ईरान में जर्मन के ऐंबेसडर ने ईरानी रेड क्रॉस को 40 नाव और दूसरा सामान देने का ऐलान किया है, इराक़ी हुकूमत ने सरकारी तौर पर तो नहीं लेकिन कुछ प्राइवेट इदारों ने अपने ईरानी भाइयों की मदद का ऐलान किया है, इन इदारों ने कहा जब इराक़ आग और ख़ून में डूबा हुआ था तो ईरान ने हमारी मदद की आज ईरान पानी में डूबा हुआ है हमारा फ़र्ज़ बनता है कि हम उसकी मदद करते हैं "जब हम आग में जल रहे थे तो आपने हमारी मदद की आज तुम पानी में डूबे हुए हो तो अब हमारी बारी है कि हम तुम्हारी मदद करें" बहुत ख़ूबसूरत पैग़ाम, यही वह एहसास है जो ज़िंदा रहना चाहिए, यह पैग़ाम, इस्लामी भाईचारे का की बेहतरीन मिसाल है और इस बात की अलामत है कि इराक़ मुश्किल समय से उभर चुका है और यह बहुत अच्छी ख़बर है, ऐसे पैग़ाम पाकिस्तानी अवाम की तरफ़ से भी ईरानी जनता के लिए जाना चाहिए, ईरान ने हर कठिन समय पर पाकिस्तान का साथ दिया है, 2010 में पाकिस्तान में जो सैलाब आया वह पाकिस्तानी इतिहास का सबसे बड़ा सैलाब था, इस सैलाब में 1600 लोग मरे थे और लगभग 2 करोड़ लोग प्रभावित हुए, सैलाब के चौथे दिन पाकिस्तान ने इस्लामी उम्मत से मदद की अपील की ईरान की रेड क्रॉस टीम पांचवें दिन पूरे सामान के साथ पाकिस्तान की मदद के लिए पहुंच गई थी, ईरान ने उस समय अलग अलग खेपों में 20 करोड़ की लागत का 330 टन सामान प्रभावित इलाक़ों में बांटा था, यह टीमें कई महीनों तक प्रभावित इलाक़ों में लोगों की मदद करती रहीं, इस बहुत बड़ी मदद के लिए पाकिस्तान ने एक नहीं कई मर्तबा अपने पड़ोसी इस्लामी देश का सरकारी तौर पर शुक्रिया अदा किया, उस दौरान जिन देशों ने पाकिस्तान की मदद की उनमें ईरान तीसरे नंबर पर था, यह मैं अपनी तरफ़ से नहीं कह रहा हूं बल्कि संयुक्त राष्ट्र संघ की रिपोर्ट के आधार पर कह रहा हूं, इसी तरह 2005 के ज़लज़ले में भी ईरान ने हमारी खुल कर मदद की थी।
आज ईरान मुश्किल में है तो हम सबको उनकी मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाना होगा, अगर हुकूमतों के आगे मजबूरियां हैं तो हम सबको अपने हिसाब से मदद के लिए आगे आना होगा और ऐसे मौक़े पर किसी मजबूरी का बहाना भी नहीं बनाना चाहिए, मैं ईरानी अवाम और ईरानी हुकूमत को सलाम पेश करता हूं जिन्होंने इस कठिन समय में भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस्लामी देशों से किसी मदद की अपील नहीं की, ईरान एक इज़्ज़तदार और बहादुर देश है वह जानता है कि अगर उसने मदद की अपील की तो इस्लामी समाज का सबसे बड़ा दुश्मन उसे कमज़ोर समझेगा, ट्रंप ने सऊदी के लिए तो यह कहा था कि सऊदी हमारी मदद के बिना एक हफ़्ता भी आगे नहीं चल सकता लेकिन उसकी हिम्मत नहीं है कि वह ईरान के लिए ऐसे अपमान जनक शब्दों को कह सके, क्योंकि ईरान पिछले 40 सालों से बिना उसकी मदद, बल्कि उसकी हर तरह की पाबंदियों और विरोध के बावजूद पूरी इज़्ज़त के साथ आगे बढ़ रहा है, किसी भी समाज और क़ौम के लिए इज़्ज़त और ग़ैरत बहुत बड़ी बात होती है उसके बग़ैर क़ौम और समाज मुर्दा कहलाता है।

मुफ़्ती गुलज़ार अहमद नईमी

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