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ईरान द्वारा भारत और चीन को तेल का निर्यात किए बिना जेसीपीओए का बचा रहना असंभवः यूरोप

यूरोपीय देश यह उम्मीद जता रहे हैं कि जेसीपीओए के ढाँचे के अंतर्गत भारत और चीन, ईरान के हितों की रक्षा की ज़िम्मेदारी अपने उपर लेकर तेहरान से तेल आयात जारी रखें।

विलायत पोर्टलः समाचार एजेंसी तसनीम की रिपोर्ट के मुताबिक़, ईरान द्वारा जबसे यह एलान किया गया है कि वह परमाणु समझौते जेसीपीओए के कुछ बिन्दुओं पर अमल नहीं करेगा, तब से यूरोपीय देशों में बेचैनी सी देखने को मिल रही है। अब वे लगातार इस प्रयास में हैं कि किसी भी तरह ईरान को जेसीपीओए से बाहर न जाने दें। इसी संदर्भ में यूरोपीय देश परमाणु समझौते की रक्षा में पूरी तरह सामने आ गए हैं, लेकिन साथ ही यूरोपीय देशों के अधिकारी यह भी कह रहे हैं कि ईरान द्वारा भारत और चीन को तेल का निर्यात किए बिना जेसीपीओए का बचा रहना असंभव लग रहा है।

ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने भी अमेरिका, चीन तथा रूस के साथ ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। यह सभी यूरोपीय देश अगर चाहें तो अमेरिका के जेसीपीओए से निकल जाने के बावजूद इस समझौते को बचाने की ख़ातिर ईरान से व्यापार का सिलसिला जारी रख सकते हैं और अमेरिकी प्रतिबंधों से तेहरान को हो रहे नुक़सान की भरपाई भी कर सकते हैं, लेकिन अमेरिकी डॉलर में कच्चे तेल के निर्यात पर ईरानी अर्थव्यवस्था की निर्भरता के कारण अमेरिकी प्रतिबंधों को नाकाम करने के लिए एक चैनल बनाना जटिल हो गया है। इन सबके बावजूद अगर यूरोप थोड़ी सा साहस दिखाए और अमेरिका के सामने घुटने न टेके तो तेल को बेचने का नया चैनल बन सकता है।

याद रहे कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के जेसीपीओए से निकलने से पहले परमाणु समझौता यूरोपीय देशों की विदेश नीति के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि थी, जिसके अनुसार ईरान, संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रतिबंधों की समाप्ति के साथ जेसीपीओए के प्रति प्रतिबद्ध रहेगा। लेकिन इस बीच अमेरिका ने एक बार फिर तेहरान पर एकपक्षीय प्रतिबंध लगाकर न केवल जेसीपीओए को कमज़ोर किया है बल्कि इसके पीछे व्हाइट हाउस का उद्देश्य यह है कि किसी भी तरह ईरान की इस्लामी व्यवस्था को नुक़सान पहुंचाया जा सके और एक बार फिर से तेहरान को अपनी इच्छा के अनुसार समझौते के लिए वार्ता की मेज़ पर लाने के लिए बाध्य किया जा सके। दूसरी ओर यूरोपीय देशों को इस बात की आशा है कि अभी भी वे जेसीपीओए को ख़त्म होने से बचा जा सकते हैं और ईरान के यूरेनियम संवर्धन को सीमित रख सकते हैं।

इस बीच इस्लामी गणतंत्र ईरान के राष्ट्रपति डॉक्टर हसन रूहानी ने चेतावनी दी है कि अगर यूरोपीय देशों, चीन और रूस ने अमेरिका के एकपक्षीय प्रतिबंधों के मुक़ाबले में तेल, बैंकिंग और व्यापार के क्षेत्र में अपने वचन को पूरा नहीं किया तो ईरान भी युरेनियम संवर्धन की सीमा का पालन नहीं करेगा और यूरेनियम संवर्धन की सीमा को बढ़ा देगा। ईरानी राष्ट्रपति का कहना था कि जेसीपीओए के तहत ईरान को यूरेनियम संवर्धन 3.67 के स्तर तक सीमित रखना था, हम इसका पालन नहीं करेंगे और किसी स्तर के पाबंद नहीं रहेंगे, इसके अलावा अराक के हैवी वाटर के बारे में भी 60 दिन बाद फ़ैसला लेंगे कि क्या परमाणु समझौते से पहले वाले कार्यक्रम को जारी रखें और इस परियोजना को पूरा करें।

उल्लेखनीय है कि ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा की सर्वोच्च परिषद ने एलान किया है कि तेहरान जेसीपीओए के कुछ बिन्दुओं पर अमल नहीं करेगा और इस समझौते के बाक़ी बचे हुए देशों को 60 दिन का वक़्त दे रहा है कि वे तेल और बैंकिंग के क्षेत्र में वे अपने वचनों को पूरा करें।

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