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अंतरराष्ट्रीय संगठनों व संस्थाओं से निकलना ट्रंप सरकार की गैर कानूनी कार्यवाहियों का एक भाग हैः जवाद ज़रीफ़

विदेशमंत्री जवाद ज़रीफ़ ने कहा है कि परमाणु समझौते से निकल जाने से लेकर राष्ट्रसंघ की मानवाधिकार परिषद और दूसरे अंतरराष्ट्रीय संगठनों व संस्थाओं से निकलना ट्रंप सरकार की गैर कानूनी कार्यवाहियों का एक भाग है और इस चीज़ को बहुपक्षीय व्यवस्था के लिए खतरा समझा जा रहा है।

विलायत पोर्टलः विदेशमंत्री जवाद ज़रीफ़ ने कहा है कि ईरान पर अधिक से अधिक दबाव डालने की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की नीति विफल हो जायेगी।

ज़रीफ़ ने फॉक्स न्यूज़ के साथ साक्षात्कार में कहा कि डोनल्ड ट्रंप की अध्यक्षता में अमेरिका की वर्तमान सरकार अंतरराष्ट्रीय समझौतों को कोई महत्व नहीं देती है, परमाणु समझौते से निकल जाने से लेकर राष्ट्रसंघ की मानवाधिकार परिषद और दूसरे अंतरराष्ट्रीय संगठनों व संस्थाओं से निकलना ट्रंप सरकार की गैर कानूनी कार्यवाहियों का एक भाग है और इस चीज़ को बहुपक्षीय व्यवस्था के लिए खतरा समझा जा रहा है।

इस आधार पर यह बात ईरानी जनता के लिए इस बात की सूचक है कि अमेरिका वार्ता का पक्ष बनने के लाएक नहीं है।

अमेरिका ने ईरान की इस्लामी क्रांति की सफलता से वर्षों पहले अगस्त वर्ष 1953 में विद्रोह करवा कर ईरान की कानूनी सरकार को गिरा दिया था। उस समय से उसने जहां एक ओर तेल निकालने और उसके निर्यात के बहाने सदैव ईरान की संपत्ति को लूटने का प्रयास किया है वहीं दूसरी ओर उसने ईरान में सैनिक छावनी बनाकर क्षेत्र में अपने हितों को साधने का प्रयास किया है।

गत चालिस वर्षों के दौरान भी ईरान के साथ अमेरिकी रवइये का आधार वर्चस्ववाद रहा है। अमेरिका क्षेत्र में अपने हितों की सुरक्षा के लिए युद्ध, विद्रोह, प्रतिबंध, सैनिक हमले और हत्या जैसे विभिन्न बहानों का प्रयोग करता है। इस समय भी वह इन्हीं शैलियों व हथकंडों का प्रयोग कर रहा है।

अमेरिका की एक नीति यह है कि वह ईरान की छवि को बिगाड़ कर पेश करना चाहता है परंतु इस लक्ष्य में वह कभी भी सफल नहीं हो पायेगा।

प्रसिद्ध अरब विश्लेषक अब्दुलबारी अतवान लिखते हैं कि ट्रंप ईरानी तेल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाकर ईरान को अस्थिर करने के प्रयास में हैं परंतु वह ऐसा करके आग से खिलवाड़ कर रहे हैं जबकि उन्होंने युद्ध की इस आग को इस्राईल के उकसाने पर जलाई है परंतु ध्यान योग्य बिन्दु यह है कि सऊदी अरब और दूसरे देशों को जलने का अधिक खतरा है।"

अब्दुलबारी अतवान आगे लिखते हैं कि ईरान शक्तिशाली देश है और उसके पास स्ट्रैटेजिक योजना है और वह अपनी सैनिक क्षमता और मिसाइल शक्ति का प्रयोग करके स्थिति को नियंत्रित और सामने वाले पक्ष को जल्द घुटने पर बाध्य कर सकता है।

पारस टुडे

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