Code : 934 196 Hit

इमाम हुसैन अ.स. का इंक़ेलाब और नेलसन मंडेला

अफ़्रीक़ा को आज़ादी का सबक़ सिखाने वाले और नस्ली भेदभाव का ख़ात्मा करने वाले महान लीडर नेलसन मंडेला ने अपनी कामयाबी का सेहरा इमाम हुसैन अ.स. और कर्बला को क़रार देते हुए लिखा कि जब मुझे जेल में पूरे 20 साल गुज़र गए तो एक रात मैंने फ़ैसला कर लिया था कि कल सुबह हुकूमत की सारी शर्तों को मान कर ख़ुद को उनके हवाले कर दूंगा, लेकिन अचानक उसी रात मुझे कर्बला की दास्तान और इमाम हुसैन अ.स. की याद ने हिम्मत और हौसला दिया कि जब कर्बला में इतने सख़्त हालात और इतनी कठिन परिस्तिथियों में इमाम हुसैन अ.स. ने ज़ुल्म के आगे घुटने नहीं टेके और यज़ीद की बैअत नहीं की तो मैं नेलसन मंडेला क्यों ज़ुल्म के आगे झुक जाऊं

विलायत पोर्टलः  इस समय पूरी दुनिया में कर्बला से सीख हासिल करने और इंसानियत और सच्चाई से प्यार करने वाले 20 सफ़र यानी 30 अक्टूबर को इमाम हुसैन अ.स. और कर्बला के दूसरे शहीदों की याद मनाने की तैयारी में लगे हैं, करोड़ों लोग अरबईन बिलयन मार्च में शामिल हो कर पैग़म्बर स.अ. को उनके नवासे की दर्दनाक शहादत पर तसलियत पेश करने कर्बला पहुंच चुके हैं और जो नहीं जा सके वह जहां भी हैं अपने अपने तरीक़ों से अहलेबैत अ.स. की ख़िदमत में पुरसा पेश करेंगे।
लोगों का इस दिन इतना भावुक होना और अपनी ज़िंदगी के अहम कामों को छोड़ कर इमाम हुसैन अ.स. की अज़ादारी करने की पीछे जो राज़ है वह इमाम अ.स. की इंसानी वैल्यूज़ और सच्चाई के लिए अपनी और अपने जवान और मासूम बच्चों की क़ुर्बानी है, जिसने दुनिया के लगभग सभी धर्मों के लोगों के दिलों में जगह बनाई और मानसिक और शरीरिक ग़ुलामी से बचा कर अल्लाह की बनाई हुई ख़ूबसूरत दुनिया में खुली हवा में आज़ादी की सांस लेने का मौक़ा दिया जिसका ज़िक्र नेलसन मंडेला ने खुले शब्दों में किया है।
नेलसन मंडेला के लिए कर्बला और इमाम हुसैन अ.स. आइडियल
अफ़्रीक़ा को आज़ादी का सबक़ सिखाने वाले और नस्ली भेदभाव का ख़ात्मा करने वाले महान लीडर नेलसन मंडेला ने अपनी कामयाबी का सेहरा इमाम हुसैन अ.स. और कर्बला को क़रार देते हुए लिखा कि जब मुझे जेल में पूरे 20 साल गुज़र गए तो एक रात मैंने फ़ैसला कर लिया था कि कल सुबह हुकूमत की सारी शर्तों को मान कर ख़ुद को उनके हवाले कर दूंगा, लेकिन अचानक उसी रात मुझे कर्बला की दास्तान और इमाम हुसैन अ.स. की याद ने हिम्मत और हौसला दिया कि जब कर्बला में इतने सख़्त हालात और इतनी कठिन परिस्तिथियों में इमाम हुसैन अ.स. ने ज़ुल्म के आगे घुटने नहीं टेके और यज़ीद की बैअत नहीं की तो मैं नेलसन मंडेला क्यों ज़ुल्म के आगे झुक जाऊं, इसलिए मेरी कामयाबी का राज़ कर्बला और इमाम हुसैन अ.स. को अपनी आइडियल क़रार देने में है।
इमाम हुसैन अ.स. के इंक़ेलाब की ताज़गी का असर देखिए कि कर्बला और इराक़ से इराक़ी जनता के प्रतिरोध और ज़ुल्म के मुक़ाबले डट जाने से इस ज़माने का यज़ीद अमेरिका वहां से भागने पर मजबूर हो कर अपनी हार का ऐलान कर बैठा, और कर्बला में इमाम हुसैन अ.स. के रौज़े की तरफ़ हर साल चेहेल्लुम के मौक़े पर कई मिलियन का मजमा इस बात का अहद करता दिखाई देता है कि हम हर दौर के यज़ीद के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाते रहेंगे और मैदान में डटे रहेंगे।
इराक़ पर जब इस दौर के यज़ीद ने अपने ही पाले हुए पिठ्ठू सद्दाम की हुकूमत के ख़ात्मे और रासायनिक हथियारों के बहाने चढ़ाई कर के ज़ुल्म और अत्याचार के पहाड़ तोड़े तो दूसरी तरफ़ इराक़ी जनता ने इस दौर के यज़ीद अमेरिका के सामने झुकने के बजाए इमाम हुसैन अ.स. की अज़ादारी और कर्बला वालों के ग़म में मातम की ताक़त और फ़लसफ़े से ज़ुल्म और यज़ीदियत के ख़िलाफ़ आवाज़ उठा कर आख़िरकार अमेरिका को इराक़ छोड़ने पर मजबूर कर दिया, इराक़ में आशूरा और चेहेल्लुम के मौक़े पर करोड़ों अज़ादार के जमा होने और अरबईन बिलियन मार्च में एक करोड़ से ज़्यादा लोगों के लब्बैक या हुसैन अ.स., हुसैनियत ज़िंदाबाद और यज़ीदियत मुर्दाबाद के नारों ने वहां ड्यूटी पर तैनात अमेरिकी सेना के मनोविज्ञान को इतना प्रभावित किया कि अमेरिकी सेना में अमेरिकी सरकार के ख़िलाफ़ बग़ावत के डर से अमेरिका वहां से दुम दबा कर भाग गया, बेशक अमेरिका का इराक़ से भाग जाना टॉम जैसे सैंकड़ों फ़ौजियों के मनोविज्ञान प्रभावित हुए और उनके दिल के अज़ादारी और इमाम हुसैन अ.स. के मातम की वजह से जंग के विरोध के जज़्बात पैदा हुए, टॉम का ख़त 2003 में कई मीडिया चैनलों और न्यूज़ पेपरों द्वारा सामने आया जिसके एक पैरॉग्राफ़ का तर्जुमा आपके लिए पेश किया जा रहा है..
टॉम अपनी मां के नाम लिखता है कि मेरी मां मैं आपका बेटा टॉम हूं, और यह कर्बला शहर के बैरक या मोर्चे पर मेरी ड्यूटी का तीसरा दिन है, यहां एक पवित्र जगह की ज़ियारत के लिए लोग जा रहे हैं और उन लोगों का कहना है कि उनके नबी (हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा स.अ.) के नवासे की इस क़ुर्बानी की याद में बनाया गया है, क्योंकि उन्होंने (इमाम हुसैन अ.स.) ने अपने बच्चों समेत पूरे ख़ानदान यहां तक कि 6 महीने के बच्चे तक को अल्लाह की मर्ज़ी के लिए क़ुर्बान कर दिया, मां मैं भी बॉस्टन अमेरिका से बहुत दूर आया हूं लेकिन मैं जानता हूं कि मैं अल्लाह की मर्ज़ी के लिए नहीं आया बल्कि मैं और मेरे दूसरे अमेरिकी फ़ौजी साथी हम सब यहां इसलिए आए हैं क्योंकि हमें हमारे राष्ट्रपति ने तैनात किया है।
टॉम के इस ख़त से अच्छी तरह अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि किस तरह इराक़ से अमेरिका की करारी शिकस्त में इमाम हुसैन अ.स. की शख़्सियत और अज़ादारी ने अहम रोल निभाया है क्योंकि इराक़ में सैंकड़ों अमेरिकी फ़ौजी मानसिक बीमार हो चुके थे, दूसरी तरफ़ मध्य पूर्व में हिज़्बुल्लाह और ईरान के इस्लामी इंक़ेलाब ने इमाम हुसैन अ.स. के फ़लसफ़े पर अमल करते हुए यज़ीदियत की नींदें हराम कर दी हैं, जिसकी ताज़ा मिसाल वक़्त के यज़ीद अमेरिका के सहयोगी सारी साम्राज्यवादी ताक़ते और तालिबान, दाएश और दूसरे वहाबी आतंकी संगठन हैं जिनको इसी कर्बला से सीख लेने वाले ईरानी, इराक़ी और हिज़बुल्लाही जियालों ने ऐसी धूल चटाई जिसके बारे में उन्होंने ख़्वाब में भी नहीं सोंचा होगा।
जिस तरह कर्बला के मैदान में आशूरा को इमाम हुसैन अ.स. और आपके वफ़ादार साथियों ने क़ुर्बानियां देकर इस्लाम को हमेशा के लिए ज़िंदगी दे कर मोहर्रम और आशूरा को अमर कर दिया उसी तरह चेहेल्लुम या सफ़र के महीने में अहलेबैत अ.स. के घराने की पाक बीबियों का दीन के लिए क़ुर्बानी देना है, यही वजह है कि इमाम ख़ुमैनी र.ह. फ़रमाते हैं कि मोहर्रम और सफ़र ही ने इस्लाम को ज़िदा रखा है।



0
शेयर कीजिए
फॉलो अस
नवीनतम