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आतंकी संगठन दाइश पैदाइश से विनाश तक एक विश्लेषण(2)

सीरिया में ग्रह युध्द छिड़ने के केवल एक महीने बाद ही 2011 में Islamic State of Iraq and Syria पूरी तरह से सक्रिय हो गया था लेकिन अभी भी यह संगठन अल-क़ायदा से ही जुड़ा हुआ था, इस संगठन के अधिकतर लोग इराक़ में क़त्लेआम, आत्मघाती हमले और नरसंहार करने के बाद सीरिया की ओर प्रस्थान कर रहे थे, सीरिया जहां जिब्हतुन नुसरा नामी संगठन पहले से ही बशारुल असद की सत्ता के विरुध्द आतंक फैलाए हुए था वहां पर यह लोग भी उसी संगठन के साथ जुड़ गए।

विलायत पोर्टलः अल-क़ायदा के उसामा बिन लादेन और अल-ज़वाहिरी का मानना था कि अल-क़ायदा के इस तरह ताबड़तोड़ मुसलमानों पर हमले से अल-क़ायदा की लोकप्रियता आस पास के देशों में ख़त्म हो जाएगी इसी कारण उसने 9 जुलाई 2005 में ज़वाहिरी ने ज़रक़ावी के नाम एक पत्र लिखा जिसमें अल-कायदा के इस नेता ने ज़रक़ावी को रणनीति बना कर हमला कर के अमेरिका को इराक़ से बाहर निकालने को कहा।

यह पत्र अक्टूबर 2005 में अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी द्वारा सार्वजनिक कर दिया गया, फ़िशमैन का मानना है कि अल-क़ायदा के ज़वाहिरी जैसे लीडरों की बात न मानते हुए और लगातार मनमानी कर के शियों के सांसकृतिक और अनेक मुख्य केंद्रों और स्थलों पर हमला कर के मुसलमानों विशेष कर शियों की हत्या करने के कारण ज़रक़ावी और ज़वाहिरी और बिन लादेन के संबंध टूट गए।

ज़रक़ावी की मौत जून 2006 अमेरिकी हवाई हमले में हुई जिसको अमेरिका ने अपनी लिए बड़ी कामयाबी का ऐलान किया, ज़रक़ावी की मौत के तुरंत बाद ज़वाहिरी ने अपने क़रीबी और विस्फोटक पदार्थ का विशेषज्ञ अबू अय्यूब अल-मिस्री को अल-क़ायदा की इराक़ शाखा का चीफ़ बनाया, अल-मिस्री ने अक्टूबर 2006 में अल-क़ायदा की जगह Islamic State of Iraq and Syria नाम स्वीकार कर लिया ताकि अपने लड़ाकों और ताक़त को बढ़ाया जा सके, अल-ज़वाहिरी को इस बात का डर सताने लगा कि कहीं अल-मिस्री को सत्ता की लालच कहीं नुक़सान न पहुंचा दे, इसके बाद यह आतंकी संगठन अबू बक्र बग़दादी के नेतृत्व में गतिविधियां अंजाम देने लगा, अमेरिकी सरकार के अनुसार यह संगठन अब सीरिया में बसा हुआ है।

अबू बक्र बग़दादी जिसका असली नाम इब्राहीम अवाद अली अल-बद्र है लेकिन उसको अबू बक्र बग़दादी के नाम से पहचाना जाता है, यह 1971 में बग़दाद से 125 किलोमीटर उत्तरी इलाक़े सामरा में पैदा हुआ, बग़दाद यूनिवर्सिटी से पी एच डी करने के बाद उसी यूनिवर्सिटी की अकादमी सदस्यता भी हासिल की।

शुरू में इसने अपनी पहचान एक उपदेशक के रूप में बनाई, और जो लोग उसे नज़दीक से जानते हैं उनका कहना है कि शुरू में वह एक शांत स्वभाव का था और उसका कहना था कि लोगों का भाईचारे के साथ रहना ही हर समस्या का हल है, दूसरी तरफ़ उन लोगों का यह भी कहना है कि बग़दादी का शुरू से ही सद्दाम और बाथ पार्टी से अच्छा संबंध रहा है।

अमेरिका 2003 में पूरी तरह इराक़ पर क़ब्ज़ा कर चुका था, उसी समय बग़दादी ने सद्दाम के सैनिकों के साथ मिल कर फ़्लोजा अमेरिकी सैनिकों पर हमला किया और फिर सद्दाम के सैनिकों के साथ मिल कर गोरिल्ला युध्द में भाग लेता रहा और उसी समय एक हमले के दौरान अमेरिकी सैनिकों द्वारा गिरफ़्तार कर के कुछ समय के लिए जेल में डाल दिया गया।

2004 में इराक़ में तौहीद और जिहाद के नाम से संगठन बनाया गया, बग़दादी भी उसमें गतिविधियां अंजाम दे रहा था, इसके बाद एक और संगठन अल-क़ायदा बैनन-नहरैन के नाम से बना इसमें भी बग़दादी बिन लादेन के इशारों में काम कर रहा था, इस संगठन ने 2006 में अपना नाम बदल कर इस्लामी राज्य इराक़ रख लिया, इस संगठन के नेता एक एक कर के मारे जाते रहे और इसी 2006 में इस संगठन के मेन लीडर अबू उमर अल-बग़दादी और अबू हमज़ा अल-मुहाजिर भी मार डाले गए और फिर यही मौक़ा था जब अबू बक्र बग़दादी इस संगठन का लीडर बना।

अबू बक्र बग़दादी की सबसे पहली रणनीति यह रही कि उसने जेल से छूटने वाले सभी कट्टरपंथियों को अपने संगठन में शामिल करना शुरू कर दिया, और इनमें ऐसे लोग भी थे जो बम बनाना से लेकर उसे कैसे लगाना है कैसे ब्लास्ट करना है कैसे डिफ़ियूज़ करना है इन सबके माहिर थे, धीरे धीरे बग़दादी द्वारा तैय्यार किया जाने वाले इस संगठन की पहचान अमेरिकियों पर आत्मघाती हमले कर के उनको मारने के लिए जाना जाने लगा और इस संगठन मे कई देशों के लोग शामिल होने लगे।

2011 में अबू बक्र बग़दादी का नाम भी अमेरिका की आतंकवादी सूची में शामिल हो गया और उसकी पक्की ख़बर देने वाले के लिए 10 मिलियन डॉलर का ईनाम भी रखा गया, जिस समय अबू बक्र बग़दादी पर यह ईनाम रखा गया उस समय ऐमन ज़वाहिरी के पकड़े जाने पर 25 मिलियन का ईनाम रखा जा चुका था।

सीरिया में ग्रह युध्द छिड़ने के केवल एक महीने बाद ही 2011 में Islamic State of Iraq and Syria पूरी तरह से सक्रिय हो गया था लेकिन अभी भी यह संगठन अल-क़ायदा से ही जुड़ा हुआ था, इस संगठन के अधिकतर लोग इराक़ में क़त्लेआम, आत्मघाती हमले और नरसंहार करने के बाद सीरिया की ओर प्रस्थान कर रहे थे, सीरिया जहां जिब्हतुन नुसरा नामी संगठन पहले से ही बशारुल असद की सत्ता के विरुध्द आतंक फैलाए हुए था वहां पर यह लोग भी उसी संगठन के साथ जुड़ गए।

2013 में अबू ग़ुरैब जेल पर हमले के समय क़रीब 500 से 600 पुराने प्रशिक्षित आतंकवादी भागने में कामयाब रहे और वह सभी अल-क़ायदा से जा कर मिल गए।

दाइश ने सीरिया पहुंचने के बाद आतंकी संगठन अल-नुसरा को यह कर गद्दार घोषित कर दिया कि अल-नुसरा ने दाइश के लोगों के विरुध्द हथियार उठाए हैं, अल-नुसरा ने इस आरोप के बाद अल-ज़वाहिरी के पास जा कर शिकायत की और ज़वाहिरी ने दाइश के सरगना अबू बक्र बग़दादी और अल-नुसरा के सरगना जौलानी दोनों से अपनी बनाई हुई शरई अदालत में हाज़िर होने को कहा, लेकिन बग़दादी ने ज़वाहिरी की बात को रद्द करते हुए अपनी एक आडियो क्लिप अल-जज़ीरा चैनल भेज कर ऐलान कर दिया कि वह केवल बिन लादेन को अपना लीडर मानता है और ज़वाहिरी के किसी भी आर्डर को नहीं मानेगा, और दूसरी ओर अल-नुसरा में जितने विदेशी आतंकवादी थे वह सब दाइश में शामिल हो गए।


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