Code : 1411 24 Hit

अली इब्ने यक़तीन

एक शख़्स का कहना है कि मुझे अली इब्ने यक़तीन ने एक ख़त देकर इमाम अ.स. के पास ले जाने को कहा, मैंने इमाम अ.स. के पास जाकर उनका ख़त पहुंचा दिया, उन्होंने बिना ख़त पढ़ें हुए अपनी आस्तीन से एक ख़त निकाल कर मुझे दिया और कहा कि उन्होंने जो कुछ लिखा है उसका यह जवाब है।

विलायत पोर्टलः आपका नाम अली था, शैख़ तूसी र.ह. ने अपनी रेजाल की किताब में आपको बनी असद के क़बीले का ग़ुलाम बताया है, लेकिन आप इमाम मूसा काज़िम अ.स. के ख़ास सहाबियों में से हैं, आप सन् 121 हिजरी में कूफ़ा में पैदा हुए और आपने कई किताबें लिखी।

एक शख़्स का कहना है कि मुझे अली इब्ने यक़तीन ने एक ख़त देकर इमाम अ.स. के पास ले जाने को कहा, मैंने इमाम अ.स. के पास जाकर उनका ख़त पहुंचा दिया, उन्होंने बिना ख़त पढ़ें हुए अपनी आस्तीन से एक ख़त निकाल कर मुझे दिया और कहा कि उन्होंने जो कुछ लिखा है उसका यह जवाब है। (शवाहेदुन-नबुव्वह, पेज 195)

एक बार हारून रशीद ने अली इब्ने यक़तीन जो कि इमाम अ.स. के ख़ास सहाबी थे और हारून भी उन्हें अपने से बहुत क़रीब रखता था और उन पर भरोसा करता था, एक दिन हारून ने आपको बहुत सारे तोहफ़े दिए जिनमें क़ीमती शाही कपड़े, एक विशेष शाही लिबास जिसमें सोने के तार से फूलों की कढ़ाई थी, इस लिबास को केवल बादशाह और ख़लीफ़ा पहना करते थे, अली इब्ने यक़तीन ने इमाम अ.स. से मोहब्बत और अक़ीदत में हारून के दिए हुए सामान में और भी कुछ बढ़ा कर इमाम मूसा काज़िम अ.स. की ख़िदमत में पेश किया, इमाम अ.स. ने तोहफ़ा तो क़बूल कर लिया लेकिन उस विषेश लिबास को यह कह कर वापस कर दिया कि इसे अपने पास रखो, यह तुम्हारे उस समय काम आएगा जब तुम्हारी जान को ख़तरा होगा, उन्होंने यह ख़्याल करते हुए कि इमाम अ.स. न जाने किस हादसे की ओर इशारा कर रहे हैं उस लिबास को अपने पास रख लिया, कुछ दिनों बाद अली इब्ने यक़तीन अपने ग़ुलाम की किसी हरकत से नाराज़ हो गए और उसे अपने घर से निकाल दिया, उसने जाकर हारून से चुग़ली कर दी और कहा कि आपने जो क़ीमती कपड़े और विशेष लिबास अली इब्ने यक़तीन को दिया था वह सब उन्होंने इमाम मूसा काज़िम अ.स. को दे दिया और चूंकि वह शिया हैं इसलिए वह इमाम अ.स. को बहुत मानते हैं, हारून यह बात सुनते ही ग़ुस्से से पगला गया, उसने तुरंत सिपाहियों को हुक्म दिया कि अली इब्ने यक़तीन को इसी जिस हालत में हों उन्हें गिरफ़्तार कर लाएं, उन्हें लाया गया हारून ने उस विशेष लिबास के बारे में पूछा कि वह कहां है? उन्होंने कहा: बादशाह! वह तो मेरे पास है, उसने कहा मुझे देखना है और अगर न दिखा सके तो गर्दन उड़ा दूंगा, उन्होंने कहा: बादशाह! मैं अभी पेश किए देता हूं, यह कहते हुए उन्होंने एक शख़्स से कहा जाओ मेरे घर के उस कमरे में एक संदूक़ रखा है उसे उठा लाओ, जब वह बताया हुआ संदूक़ लाया तो आपने उसकी मोहर तोड़ कर वह विशेष सोने के तार से कढ़ा हुआ लिबास निकाल कर बादशाह के सामने रख दिया, जब बादशाह ने अपनी आंखों से देख लिया तो उसका ग़ुस्सा शांत हुआ और उसने ख़ुश होकर कहा अब तुम्हारे बारे में किसी की कोई बात नहीं मानूंगा। (शवाहेदुन-नबुव्वह, पेज 194)

0
शेयर कीजिए
फॉलो अस
नवीनतम